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बिना सैलरी की नौकरी से शुरुआत, आज अमेरिका में सालाना 2 करोड़ रुपये की कमाई...कमाल की है कहानी

सुमित गुप्ता की कहानी संघर्ष और मेहनत की मिसाल है। वह मुंबई के धारावी इलाके में बड़े हुए, जिसे एशिया की सबसे बड़ी झुग्गी-बस्तियों में गिना जाता है। सीमित संसाधनों के बीच पले-बढ़े सुमित ने अपनी मेहनत और लगन के दम पर आगे बढ़ते हुए अमेरिका की टेक इंडस्ट्री में अपनी अलग पहचान बनाई

MoneyControl Newsअपडेटेड May 29, 2026 पर 6:50 PM
बिना सैलरी की नौकरी से शुरुआत, आज अमेरिका में सालाना 2 करोड़ रुपये की कमाई...कमाल की है कहानी
धारावी के छोटे घर से निकला युवक, आज अमेरिका में 2 करोड़ रुपये की नौकरी का मालिक

मुंबई की एक छोटी सी बस्ती से शुरू हुआ एक युवक का सफर आज सफलता की बड़ी मिसाल बन गया है। बचपन में घर छोटा था, परिवार में कोई अंग्रेजी नहीं बोलता था और आर्थिक स्थिति भी मजबूत नहीं थी। पढ़ाई पूरी करने के लिए उधार तक लेना पड़ा। लेकिन इन मुश्किल हालातों के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और अपने सपनों को पूरा करने के लिए लगातार मेहनत करते रहे। कई सालों की मेहनत और संघर्ष के बाद उन्हें अमेरिका में टेक एरिया में अच्छी नौकरी मिली। आज उन्हें करीब 2 करोड़ रुपये सालाना सैलरी मिलती है, उनके पास अमेरिका का ग्रीन कार्ड है और उन्होंने अपने परिवार के लिए मुंबई में नया घर भी खरीदा है।

धारावी की गलियों से अमेरिका तक

उनकी कहानी उन लाखों भारतीय युवाओं की हकीकत को दिखाती है, जो सीमित अवसरों, सफलता के दबाव और आर्थिक परेशानियों के बीच अपने सपनों को पूरा करने की कोशिश करते हैं। हालांकि चुनौतियां आसान नहीं थीं, लेकिन मेहनत, धैर्य और सही दिशा में किए गए प्रयासों ने इस युवक को अपनी किस्मत बदलने का मौका दिया। आज वह न केवल खुद सफल हैं, बल्कि अपने परिवार को भी बेहतर जीवन देने में कामयाब रहे हैं।

सुमित गुप्ता की कहानी संघर्ष और मेहनत की मिसाल है। वह मुंबई के धारावी इलाके में बड़े हुए, जिसे एशिया की सबसे बड़ी झुग्गी-बस्तियों में गिना जाता है। सीमित संसाधनों के बीच पले-बढ़े सुमित ने अपनी मेहनत और लगन के दम पर आगे बढ़ते हुए अमेरिका की टेक इंडस्ट्री में अपनी अलग पहचान बनाई। एक इंटरव्यू में सुमित ने अपने शुरुआती दिनों की चुनौतियों के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि उनका बचपन धारावी में बीता और उनके परिवार में उनसे पहले किसी ने भी सातवीं कक्षा से आगे पढ़ाई नहीं की थी। परिवार में कोई अंग्रेजी नहीं बोलता था और न ही कोई कभी विदेश गया था। सुमित ने बताया कि साल 2000 के शुरुआती दौर में उनका परिवार धारावी से मुंबई के जोगेश्वरी इलाके में आकर बस गया।

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