Video: शेर के कब्जे में 30 मिनट तक जिंदगी और मौत से लड़ता रहा शख्स, आखिर कैसे बची जान? खुद सुनाई रोंगटे खड़े कर देने वाली कहानी
Video: गुजरात के एक गांव में इंसान और शेर के बीच हुई अनोखी मुठभेड़ ने सभी को हैरान कर दिया। 45 वर्षीय कालू परमार का सामना अचानक एक शेर से हुआ, लेकिन उन्होंने डरने के बजाय धैर्य और हिम्मत दिखाई। करीब 30 मिनट तक चले इस खतरनाक पल में उनकी सूझबूझ ने उन्हें नई जिंदगी दे दी
Video: शेर को ढूंढने और सुरक्षित पकड़ने के लिए 32 सदस्यीय टीम को लगाया गया है।
गुजरात के एक छोटे से गांव में एक ऐसी घटना सामने आई, जिसने हर किसी को हैरान कर दिया। यहां एक आम चरवाहे का सामना अचानक जंगल के सबसे खतरनाक शिकारी से हो गया। हालात ऐसे थे कि एक छोटी सी गलती उसकी जान ले सकती थी, लेकिन उसने डर और घबराहट के बजाय धैर्य और हिम्मत का सहारा लिया। कई मिनट तक चले इस खौफनाक आमने-सामने में उसकी नजरें शेर से मिली रहीं और हर पल जिंदगी और मौत के बीच की लड़ाई जैसा महसूस हुआ। इस घटना ने लोगों को हैरान कर दिया कि आखिर कैसे एक इंसान ने इतने खतरनाक हालात में खुद पर काबू रखा। अब इस अनोखे मुकाबले की कहानी सोशल मीडिया से लेकर हर जगह चर्चा का विषय बन गई है।
अचानक हुआ शेर से आमना-सामना
कालू परमार ने बताया कि घटना सोमवार सुबह की है। वह अपने घर के आंगन में गाय बांधने के बाद अंदर जाने वाले थे। तभी पीछे से किसी जानवर ने उन पर हमला कर दिया।
उन्होंने कहा, "मुझे समझ ही नहीं आया कि क्या हुआ। कुछ सेकंड बाद पता चला कि वह शेर था और मैं जमीन पर गिर चुका था।"
हमले के बाद शेर ने उनका हाथ अपने मुंह में पकड़ लिया। उस समय उनके पास बचने के लिए कोई रास्ता नजर नहीं आ रहा था।
शेर को शांत करने के लिए अपनाई अनोखी रणनीति
परमार ने बताया कि उस खतरनाक पल में उन्होंने शेर से लड़ने के बजाय खुद को शांत रखने का फैसला किया। उन्होंने धीरे-धीरे शेर के सिर और गर्दन पर हाथ फेरना शुरू किया।
उनका मानना था कि इससे शेर को महसूस होगा कि वह उसे नुकसान नहीं पहुंचाना चाहते। उन्होंने लगातार शेर की आंखों में देखते हुए खुद को शांत रखा।
करीब 30 मिनट तक दोनों के बीच एक अजीब सा सामना चलता रहा और आखिरकार शेर ने उनका हाथ छोड़ दिया।
आंखों के सामने घूम रहा था परिवार का चेहरा
परमार ने बताया कि उन 30 मिनटों में उन्हें अपनी पत्नी, पांच बेटियों और बेटे की याद आ रही थी। उन्हें लग रहा था कि शायद उनकी जिंदगी का यह आखिरी पल हो सकता है।
उन्होंने कहा कि भगवान की कृपा से शेर ने उन्हें छोड़ दिया और वह सिर्फ पंजों की चोट के साथ बच गए।
विशेषज्ञों ने दी सावधानी की सलाह
वन्यजीव विशेषज्ञों का कहना है कि शेर के हमले के दौरान कोई एक तरीका हमेशा काम करेगा, ऐसा नहीं कहा जा सकता। जानवर का व्यवहार, परिस्थिति और आसपास का माहौल नतीजे को प्रभावित करता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, शेर को छूना या उसके करीब जाना आमतौर पर जोखिम भरा हो सकता है। हालांकि परमार के मामले में उनका शांत रहना और घबराहट से बचना मददगार साबित हुआ।
बीमारी से उबरने के बाद हुआ हमला
दिलचस्प बात यह है कि परमार हाल ही में बीमारी से ठीक हुए थे। घटना से सिर्फ 10 दिन पहले ही वह फ्लू के इलाज के बाद अस्पताल से घर लौटे थे।
उन्होंने बताया कि गांव के लोग आसपास के जंगल में शेरों की आवाज सुनते रहते हैं, लेकिन गांव के अंदर किसी शेर को देखना उनके लिए पहली बार था।
वन विभाग ने साफ किया है कि परमार पर हमला करने वाला जानवर शेर था, न कि शेरनी जैसा पहले बताया जा रहा था।
शेर को ढूंढने और सुरक्षित पकड़ने के लिए 32 सदस्यीय टीम को लगाया गया है। अधिकारियों के मुताबिक, भारी बारिश के कारण शेर आसपास के जंगल क्षेत्र में चला गया है।
वन विभाग के अधिकारी चिराग अमीन ने बताया कि टीम शेर की पहचान करने के साथ यह भी जांच रही है कि क्या उसे पहले कभी पकड़ा गया था। जरूरत पड़ने पर उसे दूसरे स्थान पर भी शिफ्ट किया जा सकता है।