Gen Z के अकेलेपन का इलाज! 32 साल की कृष्णा ने बनाया ऐसा ऐप, जुटाई ₹33.5 करोड़ की फंडिंग

Gen Z के बीच बढ़ते अकेलेपन को दूर करने के लिए 32 साल की कृष्णा दोसापति ने अनोखा तरीका खोजा है। उन्होंने ऐसा प्लेटफॉर्म बनाया है, जो युवाओं को ऑनलाइन कनेक्शन से आगे बढ़कर असल जिंदगी में नए लोगों से मिलने का मौका देता है। उनके स्टार्टअप ने हाल ही में करीब ₹33.5 करोड़ की फंडिंग जुटाई है

अपडेटेड Oct 05, 2026 पर 4:24 PM
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इस स्टार्टअप के पीछे कोई काल्पनिक समस्या नहीं, बल्कि कृष्णा का अपना अनुभव है। (representative image)

आज के दौर में सोशल मीडिया पर लोगों से जुड़ना बेहद आसान है, लेकिन आमने-सामने दोस्त बनाना और प्रोफेशनल नेटवर्क तैयार करना कई युवाओं के लिए मुश्किल होता जा रहा है। इसी समस्या को 32 वर्षीय उद्यमी कृष्णा दोसापति एक नए तरीके से हल करने की कोशिश कर रही हैं। उनका मानना है कि Gen Z के अकेलेपन का जवाब शायद ज्यादा सोशल मीडिया नहीं, बल्कि लोगों को असल जिंदगी में मिलवाना हो सकता है।

उन्होंने ऐसा प्लेटफॉर्म तैयार किया है, जिसका मकसद युवाओं को उनके आसपास रहने वाले समान रुचियों और प्रोफेशन वाले लोगों से जोड़ना है।

₹33 करोड़ से ज्यादा की फंडिंग, बढ़ी उम्मीदें


कृष्णा दोसापति Clockout की फाउंडर और CEO हैं। उनकी कंपनी ने हाल ही में $3.5 मिलियन यानी करीब ₹33.5 करोड़ की फंडिंग जुटाई है। इस फंडिंग राउंड की अगुवाई 114 Ventures ने की, जबकि Evite Ventures, Allied Ventures, Sher Ventures, Gaingels और BMPB VC ने भी इसमें हिस्सा लिया। अक्टूबर 2024 में लॉन्च हुआ Clockout खुद को LinkedIn और Meetup के बीच का मिश्रण बताता है। इसका मकसद सिर्फ ऑनलाइन कनेक्शन बनाना नहीं, बल्कि उन कनेक्शनों को वास्तविक मुलाकातों और कम्युनिटी में बदलना है।

आइडिया की शुरुआत खुद कृष्णा की परेशानी से हुई

इस स्टार्टअप के पीछे कोई काल्पनिक समस्या नहीं, बल्कि कृष्णा का अपना अनुभव है। न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी से पढ़ाई पूरी करने के बाद जब उन्होंने न्यूयॉर्क में काम शुरू किया, तो उन्हें महसूस हुआ कि इतने बड़े शहर में रहने के बावजूद नए प्रोफेशनल लोगों से मिलना आसान नहीं था। यहीं से उनके मन में सवाल आया कि अगर उन्हें नई कम्युनिटी बनाने में परेशानी हो रही है, तो युवा प्रोफेशनल्स के लिए यह समस्या कितनी बड़ी होगी? इसी सोच ने Clockout का रास्ता तैयार किया।

ऐप सिर्फ प्रोफाइल नहीं, असली मुलाकात पर देता है जोर

Clockout पर यूजर्स अपनी रुचियों, इंडस्ट्री और साझा कनेक्शन के आधार पर दूसरे प्रोफेशनल्स को खोज सकते हैं। इसके बाद प्लेटफॉर्म का लक्ष्य उन्हें डिजिटल बातचीत से निकालकर क्लब, इवेंट और आमने-सामने मुलाकातों तक पहुंचाना है। यानी यहां सिर्फ किसी को ‘कनेक्ट’ करना ही मंजिल नहीं है, बल्कि उस कनेक्शन को असल जिंदगी की दोस्ती या प्रोफेशनल कम्युनिटी में बदलना अहम है।

10 महीने में 6 लाख से ज्यादा डाउनलोड

Clockout के मुताबिक, लॉन्च के बाद प्लेटफॉर्म को 6 लाख से ज्यादा डाउनलोड मिल चुके हैं। कंपनी का दावा है कि पेड फीचर्स शुरू करने के सिर्फ 10 महीनों में उसका वार्षिक आवर्ती राजस्व (ARR) $1.1 मिलियन तक पहुंच गया। 2025 में यूजर्स ने करीब 4 लाख इनवाइट्स भी भेजे।

क्या डिजिटल दौर में असली लोगों की जरूरत बढ़ रही है?

Clockout का मॉडल इस बड़े सवाल के बीच आया है कि ऑनलाइन कनेक्शन बढ़ने के बावजूद युवा पेशेवर अकेलापन क्यों महसूस कर रहे हैं। रिपोर्ट्स में Gallup के आंकड़ों के हवाले से बताया गया है कि 2025 में 35 साल से कम उम्र के करीब 22% कर्मचारियों ने अकेलापन महसूस किया। फिलहाल Clockout फ्रीमियम मॉडल पर काम करता है। अतिरिक्त फीचर्स और क्लबों व इवेंट्स तक अनलिमिटेड पहुंच के लिए सालाना $99 की सदस्यता उपलब्ध है।

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