सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर entrepreneur और content creator Sheetal Rijhwani की एक पोस्ट ने अचानक ऑनलाइन बड़ी चर्चा छेड़ दी है। उन्होंने अपने पोस्ट में Gen Z कर्मचारियों के काम करने के तरीके को लेकर कुछ ऐसे दावे किए, जिन्होंने इंटरनेट पर नई बहस को जन्म दे दिया है। इस पोस्ट के सामने आते ही लोग दो अलग-अलग खेमों में बंट गए हैं एक तरफ वो लोग हैं जो मानते हैं कि Gen Z वाकई में पुराने टॉक्सिक वर्क कल्चर को बदल रहा है, वहीं दूसरी तरफ कुछ यूजर्स इसे जरूरत से ज्यादा बढ़ा-चढ़ाकर बताया गया मामला मान रहे हैं।
इस चर्चा ने काम के घंटों, ऑफिस अनुशासन और वर्क-लाइफ बैलेंस जैसे मुद्दों को फिर से सुर्खियों में ला दिया है। खास बात यह है कि यह बहस सिर्फ एक पोस्ट तक सीमित नहीं रही, बल्कि अलग-अलग पीढ़ियों के नजरिए को भी सामने लेकर आई है।
पोस्ट के अनुसार, कुछ Gen Z कर्मचारी ऑफिस में एक अलग ग्रुप बनाकर काम करते हैं। ये लोग तय समय पर ऑफिस छोड़ देते हैं, बिना जरूरत देर तक रुककर मैनेजर को खुश करने की कोशिश नहीं करते और वीकेंड पर वर्क कॉल्स भी अवॉइड करते हैं।
ऑफिस की गलत चीजों पर सीधा सवाल
दावा यह भी है कि अगर कोई मैनेजर गलत व्यवहार करता है, तो ये कर्मचारी सीधे HR तक शिकायत पहुंचाते हैं। बताया गया कि HR भी कई मामलों में कर्मचारियों का साथ देता है और मुद्दों को गंभीरता से लेता है।
AC बंद हुआ तो लिया बड़ा फैसला
पोस्ट का सबसे दिलचस्प हिस्सा वह था, जिसमें कहा गया कि ऑफिस की AC खराब होने पर Gen Z ग्रुप ने काम रोक दिया और पास के कैफे से काम करने का फैसला किया, जब तक समस्या ठीक नहीं हुई।
मिलेनियल्स झेल लेते हैं, हम नहीं
एक मजेदार मोड़ तब आया जब कहा गया कि मिलेनियल्स अक्सर ऐसी परिस्थितियों को सह लेते हैं, जबकि Gen Z इसे चैलेंज करते हैं। इसी बात पर पोस्ट में “Emotional damage” जैसा कैजुअल कमेंट भी किया गया, जो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।
सोशल मीडिया पर मिली-जुली प्रतिक्रिया
इस पोस्ट पर अलग-अलग पीढ़ियों के लोगों ने अपनी राय दी। कुछ ने कहा कि Gen Z सच में टॉक्सिक वर्क कल्चर को तोड़ रहा है, जबकि कुछ ने इसे जरूरत से ज्यादा सख्त रिएक्शन बताया।
नई और पुरानी सोच की टक्कर
कमेंट सेक्शन में Gen X और अन्य यूजर्स ने बताया कि नौकरी का माहौल समय के साथ बदलता रहा है जहां पहले लोग लंबे समय तक नौकरी में टिके रहते थे, वहीं अब कॉन्ट्रैक्ट और फ्लेक्सिबल वर्क कल्चर बढ़ रहा है। कई लोगों ने माना कि अब “ओवरवर्क = डेडिकेशन” वाली सोच पर सवाल उठना जरूरी है।