हाल ही में एक जर्मन राजनयिक ने अपने आरामदायक दायरे से बाहर निकलकर भारतीय किसान की लाइफ का एक्सपीरिएंस लिया । वहां उन्होंने गायों को चारा खिलाया, हाथ से चलने वाली चारा काटने की मशीन (कुट्टी मशीन) चलाई और बिना ग्लव्स पहने गाय का गोबर भी उठाया। भारत में जर्मन दूतावास द्वारा साझा किया गया उनके इस ग्रामीण दौरे का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है।
इस वीडियो में नई दिल्ली स्थित जर्मन दूतावास के मंत्री काउंसलर और राजनीतिक मामलों के प्रमुख मारियस ओसवाल्ड एक गांव में जाते हुए और प्रमोद शर्मा नाम के एक भारतीय किसान से मिलते हुए दिखाई देते हैं। प्रमोद शर्मा ने उन्हें खेती-बाड़ी के रोजमर्रा के कामों से परिचित कराया।
बातचीत के दौरान शर्मा ने बताया कि जहां कई भारतीय नई स्किल्स सीखने और नौकरी खोजने के लिए जर्मनी जाते हैं, वहीं ओसवाल्ड गांव के जीवन का अनुभव लेने के लिए भारत आए हैं। “डॉयच गोज देसी - एपिसोड 1” टाइटल से शुरू होने वाले इस वीडियो में एक किसान राजनयिक को गांव का जीवन जीने की चुनौती देते हुए दिखाई देता है।
औसवाल्ड ने गर्मी की शिकायत की। इस पर शर्मा ने उन्हें सुझाव दिया कि वे अपना ब्लेजर उतार दें और गले में 'गमछा' (सूती तौलिया) लपेट लें। इसके बाद दोनों एक गोशाला गए, जहां शर्मा ने बताया कि मवेशियों को चारा खिलाना दिन के सबसे पहले कामों में से एक होता है।
उन्होंने अपने हाथों से गोबर उठाया
औसवाल्ड ने चारा तैयार करने में शर्मा का साथ दिया और गायों को चारा खिलाने से पहले हाथ से चलने वाली चारा काटने की मशीन (कुट्टी मशीन) भी चलाई। इसके बाद उन्हें गोबर उठाकर घर के बाहर फेंकना था। राजनयिक ने पूछा कि क्या यह गंदा काम है, जिस पर शर्मा ने समझाया कि जानवर परिवार का ही हिस्सा होते हैं और उनकी देखभाल करना ग्रामीण जीवन का एक सामान्य हिस्सा है।
इसके बाद औसवाल्ड ने अपने नंगे हाथों से गोबर उठाया। वीडियो के अंत में राजनयिक ने खेती से जुड़ी चुनौतियों को स्वीकार करते हुए कहा, "खेती-बाड़ी का जीवन आसान नहीं होता।"
जर्मन दूतावास ने कैप्शन में लिखा, "शायद ही किसी राजनयिक ने अपने काम के दौरान मारियस की तरह खुद को इतना 'गंदा' किया होगा। लेकिन अगर हम चाहते हैं कि भारतीय जर्मनी में सफल हों तो हमें भी यह साबित करना होगा कि हम भारत में ढल सकते हैं। इस बार चुनौती कुछ पारंपरिक थी - खेती-बाड़ी! आपको क्या लगता है, क्या मारियस इसमें सफल रहे?"
इंटरनेट पर गांव की जिंदगी का अनुभव लेने के लिए उनकी तारीफ हो रही है
इस वीडियो पर कई सकारात्मक प्रतिक्रियाएं आईं। सोशल मीडिया यूजर्स ने नई और अनजान चीजों को आजमाने की इच्छा दिखाने के लिए इस राजनयिक की खूब तारीफ की। एक यूजर ने लिखा, "हाहा, स्थानीय लोगों के साथ घुलने-मिलने और उन्हें समझने की यह एक बहुत अच्छी पहल है। असल में खेती-बाड़ी की जिंदगी आसान नहीं होती। आगे के अनुभवों के लिए शुभकामनाएं। हम आगे भी ऐसी और चीजें देखने के लिए इंतजार करेंगे।"
एक यूजर ने जर्मन राजनयिक की तारीफ करते हुए कहा, "बहुत बढ़िया सर... पूरी लगन के साथ एक अनजान क्षेत्र में कदम रखने के लिए आपका सम्मान है।""वाह! एक ने लिखा- जिसने पहले कभी ऐसा कुछ नहीं किया है, किसी भारतीय गांव में ऐसा काम करने के लिए बहुत हिम्मत चाहिए। बिना दस्तानों के और पूरे फॉर्मल कपड़ों में! बहुत बढ़िया मारियस। ग्रामीण भारत में आपका स्वागत है।