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6 लाख फूंके और कई इंजेक्शन सहे फिर जब DNA टेस्ट हुआ तो बच्चा न मां का निकला न बाप का, IVF के नाम पर महाधोखा!

हरियाणा के गुरुग्राम से आईवीएफ (इन विट्रो फर्टिलाइजेशन) से जुड़ा ऐसा मामला सामने आया है जो IVF के नाम पक एक बड़ी ठगी की ओर इशारा कर रहा है। इस केस में लाखों रुपये खर्च करने और असहनीय दर्द सहने के बाद जब दंपत्ति के घर किलकारी गूंजी तो उनकी खुशी का ठिकाना नहीं था। वहीं बच्चे के जन्म के बाद शक होने पर जब डीएनए टेस्ट कराया गया तो जो रिपोर्ट आई उसने उनके पैरों तले जमीन खिसका दी

MoneyControl Newsअपडेटेड Jun 15, 2026 पर 4:39 PM
6 लाख फूंके और कई इंजेक्शन सहे फिर जब DNA टेस्ट हुआ तो बच्चा न मां का निकला न बाप का, IVF के नाम पर महाधोखा!
शिकायतकर्ता राहुल राठौर ने अपनी आपबीती और इस पूरी धोखाधड़ी की कड़ियों को सामने रखा

आईवीएफ (इन विट्रो फर्टिलाइजेशन) तकनीक को आज के दौर में उन कपल्स के लिए एक वरदान माना जाता है, जो मां-पिता बनने के सुख से वंचित रहे हैं। अब हरियाणा के गुरुग्राम से ऐसा मामला सामने आया है जो IVF के नाम पक एक बड़ी ठगी की ओर इशारा कर रहा है। इस केस में लाखों रुपये खर्च करने और असहनीय दर्द के साथ दर्जनों इंजेक्शनों को सहने के बाद जब दंपत्ति के घर किलकारी गूंजी तो उनकी खुशी का ठिकाना नहीं था। कुछ ही समय बाद जब शक होने पर बच्चों का डीएनए टेस्ट कराया गया तो जो रिपोर्ट आई उसने उनके पैरों तले जमीन खिसका दी। जन्म लेने वाला बच्चा न तो अपनी मां का निकला और न ही अपने पिता का। पीड़ित दंपत्ति ने अब इस पूरे मामले में चाइल्ड स्वैप (बच्चा बदले जाने) का गंभीर आरोप लगाते हुए जांच की गुहार लगाई है।

कैसे शुरू हुआ आईवीएफ से लेकर इस धोखे का सफर?

न्यूज एजेंसी एएनआई से बातचीत करते हुए शिकायतकर्ता राहुल राठौर ने अपनी आपबीती और इस पूरी धोखाधड़ी की कड़ियों को सामने रखा। राहुल के मुताबिक उन्होंने माता-पिता बनने के लिए दिल्ली के ग्रेटर कैलाश स्थित एक नामी फर्टिलिटी क्लिनिक का रुख किया था। क्लिनिक में 13 फरवरी को एग रिट्रीवल और सीमेन कलेक्शन की प्रक्रिया पूरी की गई। इसके बाद तैयार हुए भ्रूण को 14 मई को महिला के गर्भ में ट्रांसफर किया गया। इसके बाद 5 जनवरी को दंपत्ति के घर बच्चों का जन्म हुआ।

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