बारिश का मौसम शुरू होते ही सांपों का दिखना आम बात है, और यही वजह है कि लोग अक्सर घबराहट में आ जाते हैं। हालांकि, हर सांप खतरनाक नहीं होता। विशेषज्ञों के अनुसार भारत में पाए जाने वाले लगभग 70% सांप जहरीले नहीं होते और वे केवल तब हमला करते हैं जब खुद को खतरे में पाते हैं। फिर भी, बारिश और बाढ़ के कारण जब ये सांप गांवों, खेतों और घरों के आसपास दिखाई देते हैं, तो डर और अफवाहें बढ़ जाती हैं। दिलचस्प बात ये है कि कई सांप ऐसे भी होते हैं, जिन्हें इंसानों का साथी कहा जाता है, क्योंकि वे फसलों को नुकसान पहुंचाने वाले चूहों जैसे जीवों को खत्म करते हैं।
पीलीभीत जैसे हरे-भरे इलाकों में सांपों की कई प्रजातियां पाई जाती हैं, जिनमें रैट स्नेक जैसी प्रजाति इंसानों के लिए बिल्कुल हानिरहित है। ये समय डरने का नहीं, बल्कि सही जानकारी से जागरूक होने का है।
पीलीभीत का जंगल और सांपों की दुनिया
उत्तर प्रदेश का पीलीभीत टाइगर रिजर्व और उसके आसपास का हरा-भरा इलाका सांपों की कई प्रजातियों का घर है। बारिश और बाढ़ के कारण ये सांप कभी-कभी गांवों और घरों में भी पहुंच जाते हैं।
‘किसानों का दोस्त’ रैट स्नेक
लोकल भाषा में “पगहिया” कहे जाने वाले रैट स्नेक को लोग बेवजह खतरनाक समझते हैं। जबकि यह इंसानों के लिए बिल्कुल हानिरहित है और खेतों के चूहों को खत्म कर किसानों की मदद करता है।
सांप क्यों करते हैं हमला?
वन्यजीव शोधकर्ता अख्तर मियां ने लोकल 18 से बात करते हुए बताया कि सांप तभी हमला करते हैं जब उन्हें खतरा महसूस होता है। वे स्वभाव से आक्रामक नहीं होते।
जानिए सांपों की असली पहचान
अख्तर मियां के अध्ययन के अनुसार, पीलीभीत में अब तक 20 से ज्यादा प्रजातियों के सांप पाए गए हैं। इनमें से बहुत कम जहरीले हैं और रैट स्नेक तो इंसानों का साथी भी माना जाता है।
बरसात में सांपों से डरने के बजाय, उनके स्वभाव को समझना और सही जानकारी रखना जरूरी है। सभी सांप खतरनाक नहीं होते, कई तो पर्यावरण और कृषि के लिए फायदेमंद भी साबित होते हैं।