36 हजार रुपये कमाता है पर हर महीने 15 हजार गरीबों को खाना खिलाने में कर देता है खर्च! दिल्ली के डिलीवरी बॉय आकाश की कहानी गजब

जब बात दूसरों की मदद करने की आती है तो अक्सर लोग अपनी जेब और बैंक बैलेंस देखने लगते हैं। बहुत से लोग अपनी पूरी सैलरी खुद के घर के खर्चों और बचत में ही लगा देते हैं। लेकिन दिल्ली में रहने वाले एक डिलीवरी राइडर ने इंसानियत की एक ऐसी अनूठी मिसाल पेश की है जिसे जानकर हर कोई हैरान है।

अपडेटेड Jul 15, 2026 पर 7:47 PM
दिल्ली का ये डिलीवरी बॉय अपनी सैलरी गरीबों पर कर देता है खर्च

जब बात दूसरों की मदद करने की आती है तो अक्सर लोग अपनी जेब और बैंक बैलेंस देखने लगते हैं। बहुत से लोग अपनी पूरी सैलरी खुद के घर के खर्चों और बचत में ही लगा देते हैं। लेकिन दिल्ली में रहने वाले एक डिलीवरी राइडर ने इंसानियत की एक ऐसी अनूठी मिसाल पेश की है जिसे जानकर हर कोई हैरान है। यह कहानी है आकाश सरोज की जो पेशे से एक फूड डिलीवरी बॉय हैं। वह अपनी मेहनत की कमाई का एक बहुत बड़ा हिस्सा उन अजनबी और बेघर लोगों के पेट भरने में लगा देते हैं जो सड़कों पर भूखे सोते हैं। वह हर दिन पूरी शिद्दत से अपने इस मिशन को निभा रहे हैं।

डिलीवरी के बाद शुरू होती है असली ड्यूटी

आकाश सरोज पिछले छह सालों से दिल्ली की सड़कों पर एक डिलीवरी एग्जीक्यूटिव के रूप में काम कर रहे हैं। दिनभर अपनी बाइक दौड़ाकर लोगों के घरों तक खाना पहुंचाने वाले आकाश की असली ड्यूटी तब शुरू होती है जब उनके काम की शिफ्ट खत्म होती है। काम खत्म होने के बाद वह घर जाकर आराम करने के बजाय खुद अपने हाथों से गर्म भोजन तैयार करते हैं। इसके बाद वह दिल्ली के उन इलाकों का रुख करते हैं जहां बेघर और जरूरतमंद लोग रहते हैं ताकि कोई भी इंसान भूखा न सोए।


दिल्ली के इन इलाकों में बांटते हैं खाना

आकाश मुख्य रूप से दिल्ली के इन चार बड़े इलाकों में सक्रिय रहते हैं और घूम-घूम कर भूखों को भोजन कराते हैं। इसमें पीतमपुरा, रोहिणी, जहांगीरपुरी और जीटीबी नगर शामिल हैं।

अपनी कमाई का 40% से ज्यादा हिस्सा करते हैं खर्च, नहीं लेते कोई डोनेशन

आकाश के इस नेक काम के पीछे कोई बड़ा स्पॉन्सर, एनजीओ या बाहरी डोनेशन नहीं है। वह इस पूरे अभियान का खर्च अपनी खुद की जेब से उठाते हैं। आकाश डिलीवरी के काम से प्रतिदिन औसतन करीब ₹1200 कमाते हैं। यानी उनकी मंथली इनकम करीब ₹36000 होती है। इस कमाई में से वह हर दिन लगभग 500 रुपये जरूरतमंदों के लिए भोजन तैयार करने और उनकी मदद करने में खर्च कर देते हैं। इसका मतलब यह हुआ कि आकाश अपनी मेहनत की गाढ़ी कमाई का 40 प्रतिशत से भी अधिक हिस्सा उन अनजान लोगों के लिए गर्म खाना बनाने में लगा देते हैं जिनसे उनका कोई खून का रिश्ता तक नहीं है।

सोशल मीडिया से नहीं मिलता ₹1 भी

आकाश अपनी इस फूड ड्राइव के वीडियो रिकॉर्ड करके सोशल मीडिया पर भी शेयर करते हैं। इन वीडियोज में सिर्फ खाना बांटना ही नहीं बल्कि बेघर लोगों के चेहरे की मुस्कान और उनके साथ की गई खूबसूरत बातचीत भी कैद होती है। हालांकि इंटरनेट पर अपनी बढ़ती लोकप्रियता के बावजूद आकाश ने स्पष्ट किया कि मैं इंस्टाग्राम से जीरो रुपये कमाता हूं, मेरी फूड ड्राइव का 100% खर्च मेरी डिलीवरी की कमाई से ही आता है।

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स्वर्गीय पिता के संस्कार और सीख है सबसे बड़ी प्रेरणा

जब आकाश से हिंदुस्तान टाइम्स ने पूछा कि इतनी मामूली इनकम के बावजूद उन्हें हर दिन इस काम को करने की प्रेरणा कहां से मिलती है, तो उनका जवाब बेहद भावुक करने वाला था। आकाश ने कहा कि ये मेरे पिता के मूल्य और संस्कार। मैं बस यह सुनिश्चित करना चाहता हूं कि कोई भी इंसान भूखा न सोए।

आकाश का यह काम दिखने में जितना आसान लगता है असल जिंदगी में इसे रोज करना उतना ही चुनौतीपूर्ण है। एक फुल-टाइम डिलीवरी जॉब के साथ रोज भोजन तैयार करना और उसे बांटना बेहद थका देने वाला होता है। पैसे कमाने से लेकर, खर्चों की प्लानिंग करना, खुद खाना बनाना और फिर सही समय पर उसे जरूरतमंदों तक पहुंचाने की पूरी जिम्मेदारी अकेले आकाश के कंधों पर होती है।

डिस्क्लेमर: यह रिपोर्ट अन्य मीडिया आउटलेट्स की रिपोर्ट पर आधारित है। इस दावे की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं की गई है।

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