रेलवे गेटमैन से बने DSP! दिन में नौकरी रात में पढ़ाई...पहले ही प्रयास में पास ऐसे पास की BPSC की परीक्षा

70वीं बिहार लोक सेवा आयोग (बीपीएससी) की परीक्षा में राजू कुमार पूरे राज्य में 72वीं रैंक हासिल की है। उनका चयन डीएसपी के पद पर हुआ। डीएसपी बनने से पहले राजू कुमार बिहार के रक्सौल में भारत-नेपाल सीमा के पास रेलवे गेट नंबर 33 पर गेटमैन की नौकरी करते थे

अपडेटेड Jun 28, 2026 पर 9:09 PM
पिता के जाने के बाद परिवार आर्थिक तंगी से जूझने लगा

बड़ी सफलता पाने के लिए सिर्फ अच्छे हालात नहीं, बल्कि मेहनत और मजबूत इरादों की भी जरूरत होती है। बिहार के समस्तीपुर के रहने वाले राजू कुमार ने यह बात सच साबित कर दिखाई। वह रेलवे क्रॉसिंग पर गेटमैन की नौकरी करते थे। दिनभर ड्यूटी करने के बाद वह घर जाकर पढ़ाई में जुट जाते थे। उनका सपना था कि वह सरकारी अधिकारी बनें, और उन्होंने इस सपने को कभी नहीं छोड़ा। राजू कुमार ने अपने पहले ही प्रयास में 70वीं बिहार लोक सेवा आयोग (बीपीएससी) परीक्षा पास कर ली।

दिन में रेलवे गेटमैन, रात में पढ़ाई

बिहार तक की रिपोर्ट के मुताबिक, 70वीं बिहार लोक सेवा आयोग (बीपीएससी) की परीक्षा में राजू कुमार पूरे राज्य में 72वीं रैंक हासिल की है। उनका चयन पुलिस उपाधीक्षक (डीएसपी) के पद पर हुआ। उनकी यह सफलता मेहनत, लगन और आत्मविश्वास की एक शानदार मिसाल बन गई है। डीएसपी बनने से पहले राजू कुमार बिहार के रक्सौल में भारत-नेपाल सीमा के पास रेलवे गेट नंबर 33 पर गेटमैन की नौकरी करते थे। उनकी ड्यूटी रेलवे फाटक की देखभाल करना और हर मौसम में लंबे समय तक काम करना था। नौकरी की व्यस्तता के बावजूद उन्होंने अपनी पढ़ाई नहीं छोड़ी और बीपीएससी परीक्षा की तैयारी लगातार जारी रखी।


राजू कुमार की सफलता की कहानी

राजू का जीवन आसान नहीं रहा। जब वह 10वीं कक्षा में पढ़ रहे थे, तभी महज 12 साल की उम्र में उनके पिता का निधन हो गया। पिता के जाने के बाद परिवार आर्थिक तंगी से जूझने लगा। मुश्किल हालात के बावजूद राजू ने हार नहीं मानी और अपनी पढ़ाई व सपनों को आगे बढ़ाते रहे। मुश्किल समय में राजू कुमार को उनके चचेरे भाई राजेश कुमार सुमन का पूरा साथ मिला। राजेश रोसड़ा में बीएसएस क्लब नाम से एक मुफ्त संस्थान चलाते थे, जहां प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्रों को मार्गदर्शन दिया जाता था। उनके सहयोग और अपनी कड़ी मेहनत की बदौलत राजू ने पढ़ाई जारी रखी और अपने लक्ष्य पर पूरा ध्यान बनाए रखा।

पढ़ाई के साथ ही राजू ने रेलवे ग्रुप-डी की परीक्षा दी और पहले ही प्रयास में सफलता हासिल कर ली। इसके बाद उनकी नियुक्ति रक्सौल में रेलवे गेटमैन के पद पर हुई। इस नौकरी से उन्हें आर्थिक सहारा मिला, जिससे वह अपनी मां और पूरे परिवार की जिम्मेदारियां भी बेहतर तरीके से निभा सके। रेलवे में नौकरी मिलने के बाद भी राजू कुमार ने अपने सपनों को नहीं छोड़ा। उनका लक्ष्य इससे कहीं बड़ा था। उनकी मेहनत और सीखने की लगन को देखकर दोस्तों ने उन्हें प्रशासनिक सेवा की तैयारी करने की सलाह दी। दोस्तों की बात मानकर राजू ने ग्रेजुएशन में दाखिला लिया और रेलवे की नौकरी के साथ-साथ बीपीएससी परीक्षा की तैयारी शुरू कर दी।

BPSC में हासिल की 72वीं रैंक

12 घंटे की ड्यूटी के बाद भी वह देर रात तक पढ़ाई करते थे। नौकरी और पढ़ाई के बीच संतुलन बनाना आसान नहीं था, लेकिन उन्होंने समय का सही इस्तेमाल किया। उनकी कई वर्षों की मेहनत आखिरकार सफल हुई। पहले ही प्रयास में उन्होंने 70वीं बीपीएससी परीक्षा पास की और बिहार पुलिस सेवा में पुलिस उपाधीक्षक (डीएसपी) के पद पर चयनित हो गए।

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