सही जवाब पता थे फिर भी IIT एग्जाम में लिखे गलत उत्तर, वजह जानकर रह जाएंगे हैरान

IIT में दाखिला पाने का सपना लाखों छात्रों का होता है, लेकिन ऋषभ खनेजा ने एक अलग रास्ता चुना। उन्होंने जानबूझकर IIT प्रवेश परीक्षा में गलत जवाब लिखे, जबकि उन्हें सही उत्तर पता थे। उनका यह फैसला हार नहीं, बल्कि अपनी पसंद की जिंदगी और असली लक्ष्य को तलाशने की कोशिश थी

अपडेटेड Jul 15, 2026 पर 3:36 PM
ऋषभ का कहना है कि उनके और उनके माता-पिता के सपने अलग नहीं थे।

भारत में IIT में दाखिला पाना लाखों छात्रों का सपना होता है, लेकिन एक युवक ने इस दौड़ से हटकर ऐसा फैसला लिया जिसने हर किसी को सोचने पर मजबूर कर दिया। जब बाकी छात्र IIT में पहुंचने के लिए पूरी मेहनत कर रहे थे, तब ऋषभ खनेजा ने जानबूझकर अपनी परीक्षा में गलत जवाब लिखे। हैरानी की बात यह थी कि उन्हें सही उत्तर पता थे। उनका यह कदम असफलता नहीं, बल्कि अपनी जिंदगी की दिशा खुद चुनने का प्रयास था।

परिवार और समाज की तय उम्मीदों से अलग रास्ता चुनना आसान नहीं था, लेकिन ऋषभ ने वही किया जो उन्हें सही लगा। आज उनकी कहानी इस बात की मिसाल है कि सफलता का मतलब सिर्फ बड़ी डिग्री या नौकरी हासिल करना नहीं, बल्कि अपने उद्देश्य और खुशी को पहचानना भी है।

IIT की रेस में शामिल था


ऋषभ खनेजा ने Humans of Bombay के साथ अपनी कहानी साझा करते हुए बताया कि उन्होंने जानबूझकर IIT प्रवेश परीक्षा में असफल होने का फैसला किया था। उनका कहना है कि यह कदम किसी डर या कमजोरी की वजह से नहीं था, बल्कि इसलिए था क्योंकि वह ऐसी जिंदगी नहीं जीना चाहते थे जो उन्हें अपनी नहीं लगती थी।

उन्होंने बताया कि परीक्षा हॉल में बैठकर वह जानते थे कि सही जवाब क्या हैं, फिर भी उन्होंने कुछ सवालों के गलत उत्तर चुने।

परिवार ने देखा था एक तय रास्ता

ऋषभ परिवार के बड़े बेटे थे और उनके लिए भविष्य का रास्ता पहले से तय माना जाता था। विज्ञान से पढ़ाई, इंजीनियरिंग, MBA और फिर कॉर्पोरेट नौकरी यह वही सफर था जिसे समाज सफलता की पहचान मानता है।

हर पारिवारिक समारोह में IIT और बड़ी नौकरी पाने वाले लोगों की कहानियां सुनाई जाती थीं। लेकिन ऋषभ के मन में एक सवाल था क्या यही रास्ता वास्तव में उन्हें खुश रखेगा?

दूसरों की सफलता देखकर उठे सवाल

ऋषभ ने महसूस किया कि जिन लोगों ने समाज के हिसाब से बड़ी उपलब्धियां हासिल की थीं, उनमें से कई लोग अंदर से खुश नहीं दिखते थे। इसी बात ने उन्हें अपनी जिंदगी और फैसलों पर सोचने के लिए मजबूर किया।

उन्होंने इंजीनियरिंग की जगह मुंबई के Mithibai College से Arts की पढ़ाई करने का फैसला किया। उस समय कई लोगों को लगा कि उन्होंने अपना करियर खराब कर लिया है।

एक क्लासरूम ने बदल दी सोच

बाद में ऋषभ Teach For India से जुड़े और मुंबई के मानखुर्द इलाके में बच्चों को पढ़ाने लगे। यही अनुभव उनकी जिंदगी का बड़ा मोड़ बना। उन्होंने बताया कि बच्चों के साथ काम करते हुए उन्हें एहसास हुआ कि असली संतुष्टि सिर्फ बड़े पद या ऑफिस की सफलता में नहीं, बल्कि किसी की जिंदगी में सकारात्मक बदलाव लाने में भी मिल सकती है।

कॉर्पोरेट नौकरी छोड़ी, चुना अपना रास्ता

ऋषभ ने कुछ समय कॉर्पोरेट सेक्टर में भी काम किया। अच्छी सैलरी और अच्छे माहौल के बावजूद उन्हें महसूस हुआ कि कुछ कमी रह गई है। इसके बाद उन्होंने नौकरी छोड़कर तीन महीने की बाइक यात्रा की। इस सफर ने उन्हें खुद को बेहतर समझने का मौका दिया।

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आज रचनात्मक दुनिया में बना रहे पहचान

अब ऋषभ हिमाचल प्रदेश के बीड़ में रहते हैं और लेखक, फोटोग्राफर व कलाकार के रूप में काम कर रहे हैं। साथ ही वह लोगों को अपनी रचनात्मकता से दोबारा जुड़ने में मदद करते हैं।

'सफलता और मंजूरी में से चुनना सबसे मुश्किल'

ऋषभ का कहना है कि उनके और उनके माता-पिता के सपने अलग नहीं थे। माता-पिता भी सिर्फ उनकी खुशी चाहते थे, लेकिन उन्हें अपनी खुशी तक पहुंचने का रास्ता खुद तलाशना था। उनकी कहानी यह संदेश देती है कि सफलता का मतलब हमेशा वही रास्ता चुनना नहीं होता जिसे दुनिया सही मानती है, बल्कि वह रास्ता चुनना होता है जो व्यक्ति को अंदर से संतुष्ट करे।

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