आज के समय में कई युवा नौकरी का ऑफर मिलने पर सबसे पहले CTC (कॉस्ट टू कंपनी) के आंकड़े को देखते हैं, लेकिन यह रकम हमेशा इन-हैंड सैलरी नहीं होती है। हाल ही में एक प्रोफेशनल ने सोशल मीडिया पर अपने CTC से जुड़ा एक एक्सपीरिएंश शेयर किया है। 25 लाख रुपये सालाना पैकेज का ऑफर सुनकर किसी को भी लगेगा कि उसे शानदार नौकरी मिली है। IIT रुड़की और ISB से पढ़ाई कर चुके सिद्धार्थ माहेश्वरी के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ। युवक ने बताया कि 25 लाख रुपये सालाना पैकेज मिलने के बावजूद उसकी पहली इन-हैंड सैलरी उम्मीद से काफी कम थी। सोशल मीडिया पर ये पोस्ट तेजी से वायरल हो रहा है।
IIT रुड़की और ISB से पढ़ाई कर चुके सिद्धार्थ माहेश्वरी न बताया की उन्हें गुरुग्राम की एक स्टार्टअप कंपनी से हाई-प्रोफाइल पैकेज वाला ऑफर मिला, लेकिन जब पहली सैलरी उनके खाते में आई तो उन्हें समझ आया कि ऑफर लेटर में दिखने वाला CTC और इन-हैंड सैलरी एक जैसी नहीं होती।
सोशल मीडिया पर किया पोस्ट
इंस्टाग्राम पोस्ट में सिद्धार्थ माहेश्वरी ने अपनी पहली सैलरी मिलने का एक्सपीरिएंश को शेयर किया है। उन्होंने बताया कि 25 लाख रुपये सालाना पैकेज मिलने के बावजूद उनकी पहली इन-हैंड सैलरी सिर्फ 1.45 लाख रुपये आई, जिसे देखकर वह हैरान रह गए। उन्होंने लिखा, “जब पहली सैलरी आई तो मैंने अपना बैंक बैलेंस एक बार नहीं, बल्कि कई बार चेक किया। हर बार वही रकम दिखाई दी। पहले मुझे लगा कि शायद बैंक से कोई गलती हुई है, लेकिन बाद में समझ आया कि असल अंतर ऑफर लेटर में दिखाए गए पैकेज और हाथ में मिलने वाली सैलरी के बीच था।”
पहली सैलरी मिलने पर सिद्धार्थ माहेश्वरी हैरान रह गए, क्योंकि 25 लाख रुपये सालाना पैकेज के बावजूद उनके खाते में सिर्फ 1.45 लाख रुपये आए थे। बाद में उन्हें समझ आया कि CTC और इन-हैंड सैलरी में बड़ा अंतर होता है।।
सिद्धार्थ ने बताया कि, ऑफर लेटर में दिखाया गया 25 लाख रुपये का सालाना पैकेज देखने में काफी बड़ा लगता है, लेकिन इसकी पूरी गणना समझने पर तस्वीर अलग नजर आती है। उनके अनुसार, इस पैकेज के आधार पर मासिक CTC करीब 2 लाख रुपये से अधिक बनता था, लेकिन सैलरी स्ट्रक्चर में बेसिक पे, हाउस रेंट अलाउंस, स्पेशल अलाउंस और अन्य सुविधाओं को अलग-अलग हिस्सों में बांटा गया था। इन सभी को जोड़ने पर उनकी मासिक ग्रॉस सैलरी करीब 1.7 लाख रुपये के आसपास पहुंचती थी, जो ऑफर लेटर में दिख रहे बड़े पैकेज से काफी अलग महसूस होती थी।
कैसी कम हुई इन-हैंड-सैलरी
इसके बाद सैलरी से होने वाली विभिन्न कटौतियों का असर दिखाई दिया। कर्मचारी भविष्य निधि (PF), प्रोफेशनल टैक्स और आयकर जैसी जरूरी कटौतियां हर महीने वेतन से अलग की गईं। इन सभी खर्चों को घटाने के बाद हाथ में मिलने वाली राशि काफी कम हो गई और आखिरकार उनकी वास्तविक मासिक सैलरी लगभग 1.4 लाख रुपये के आसपास रह गई। इसी वजह से ऑफर लेटर में दिखने वाला बड़ा पैकेज और बैंक खाते में आने वाली रकम के बीच बड़ा अंतर नजर आया।
सिद्धार्थ माहेश्वरी ने समझाया कि किसी कंपनी के CTC में कई ऐसे हिस्से भी शामिल होते हैं, जो सीधे कर्मचारी के बैंक खाते में नहीं आते। इनमें कंपनी की ओर से जमा किया जाने वाला PF, ग्रेच्युटी, मेडिकल इंश्योरेंस और वेरिएबल पे जैसी सुविधाएं शामिल होती हैं। ये कुल पैकेज का हिस्सा तो होती हैं, लेकिन इन्हें तुरंत नकद रूप में प्राप्त नहीं किया जा सकता। उन्होंने यह भी बताया कि नए टैक्स नियमों के अनुसार उनकी सालाना टैक्स देनदारी 2 लाख रुपये से अधिक बन रही थी, जिसके कारण हर महीने उनकी सैलरी से एक निश्चित राशि TDS के रूप में काटी जा रही थी।
इन-हैंड-सैलरी के बारे में जरूर पूछे
अपना एक्सपीरिएंस शेयर करते हुए सिद्धार्थ ने नौकरी तलाशने वाले युवाओं को सलाह दी कि केवल बड़े CTC को देखकर प्रभावित नहीं होना चाहिए। उनके अनुसार, नौकरी स्वीकार करने से पहले ये जरूर समझ लेना चाहिए कि सभी टैक्स और अन्य कटौतियों के बाद हर महीने वास्तव में कितनी रकम हाथ में मिलेगी, क्योंकि रोजमर्रा के खर्च, बिल और ईएमआई उसी राशि से पूरे किए जाते हैं।
उनकी यह पोस्ट सोशल मीडिया पर तेजी से चर्चा में आ गई। वहीं उनकी पोस्ट पर कमेंट्स डिसेबल कर दिए गए थे, फिर भी लोगों ने इसे खूब शेयर किया और इससे CTC तथा वास्तविक इन-हैंड सैलरी के अंतर को लेकर व्यापक बहस शुरू हो गई।