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8 घंटे से ज्यादा काम नहीं, 200% ओवरटाइम और मैनेजर तो पूछिए मत! पंकज ने भारत में 10 साल की जॉब Vs पोलैंड में 4 साल को गजब कंपेयर किया

पोलैंड में रहने वाले एक्सपैट प्रदीप पंकज सिंह के अनुसार भारत और यूरोप के कॉर्पोरेट माहौल में बड़ा अंतर है। India में जहां लंबे समय तक ऑफिस में रुकना मेहनत माना जाता है, वहीं यूरोप में समय की सीमा और निजी जीवन का सम्मान ज्यादा महत्वपूर्ण है

Edited By: Anchal Jhaअपडेटेड Jun 17, 2026 पर 4:57 PM
8 घंटे से ज्यादा काम नहीं, 200% ओवरटाइम और मैनेजर तो पूछिए मत! पंकज ने भारत में 10 साल की जॉब Vs पोलैंड में 4 साल को गजब कंपेयर किया
प्रदीप बताते हैं कि यूरोप में सबसे बड़ा फर्क काम के बाद की जिंदगी को लेकर है।

 पोलैंड में रहने वाले भारतीय एक्सपैट प्रदीप पंकज सिंह ने अपने अनुभव के आधार पर भारत और यूरोप के कॉर्पोरेट वर्क कल्चर की एक दिलचस्प तुलना पेश की है। उनके अनुसार दोनों जगहों के बीच फर्क सिर्फ काम के घंटे या नियमों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरी सोच और कार्यशैली का अंतर है। India में कई जगहों पर लंबे समय तक ऑफिस में मौजूद रहने को मेहनत और डेडिकेशन का संकेत माना जाता है, जबकि यूरोप में काम की समय-सीमा और आउटपुट को ज्यादा महत्व दिया जाता है। इस तुलना में सबसे बड़ा फर्क मैनेजमेंट की मानसिकता और कर्मचारियों के प्रति दृष्टिकोण में दिखाई देता है।

एक तरफ जहां “हमेशा उपलब्ध रहने” की अपेक्षा होती है, वहीं दूसरी तरफ काम और निजी जीवन के बीच स्पष्ट सीमा रखी जाती है। यह अंतर कर्मचारियों की उत्पादकता के साथ-साथ उनकी मानसिक शांति और जीवन की गुणवत्ता पर भी गहरा असर डालता है।

भारत का कॉर्पोरेट माहौल

प्रदीप के अनुसार भारत के आईटी और कॉर्पोरेट सेक्टर में काम को अक्सर घंटों के पैमाने पर आंका जाता है। यहां यह धारणा गहरी है कि जो व्यक्ति ऑफिस में ज्यादा देर तक बैठा है, वही ज्यादा मेहनती या ज्यादा डेडिकेटेड माना जाता है। इसी वजह से कई कर्मचारी अपना काम समय पर पूरा करने के बावजूद भी ऑफिस छोड़ने में हिचकिचाते हैं, क्योंकि माहौल उन्हें यह संकेत देता है कि जल्दी जाना ठीक नहीं माना जाएगा।

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