विदेशी क्लाइंट्स पाने के लिए बदली पहचान, 17 साल की उम्र में कमाए महीने के 80 हजार...वायरल हुआ पोस्ट
सोशल मीडिया पर इन दिनों एक पोस्ट सोशल मीडिया तेजी से वायरल हो रहा है। पोस्ट में व्यक्ति ने बताया कि, फ्रीलांसिंग के शुरुआती दिनों में विदेशी क्लाइंट्स का भरोसा जीतने के लिए उन्होंने खुद को नीदरलैंड्स का निवासी बताकर काम किया था
जिन विदेशी ग्राहकों ने पहले उनके साथ काम करने में रुचि नहीं दिखाई थी (Photo: Canva)
सोशल मीडिया इन दिनों लिंक्डइन का पोस्ट तेजी से वायरल हो रहा है। AevyTV के को-फाउंडर शिरष बाजपेयी का एक पुराना एक्सपीरिएंस सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है। उन्होंने एक LinkedIn पोस्ट में बताया कि फ्रीलांसिंग के शुरुआती दिनों में विदेशी क्लाइंट्स का भरोसा जीतने के लिए उन्होंने खुद को नीदरलैंड्स का व्यक्ति बताकर काम किया था। शिरष बाजपेयी का ये पोस्ट सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।
अपने वायरल पोस्ट में शिरष बाजपेयी ने बताया कि उन्होंने 17 साल की उम्र में फ्रीलांसिंग की शुरुआत की थी। उस समय उन्हें विदेशी क्लाइंट्स के साथ काम हासिल करने में कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता था।
सोशल मीडिया पर किया पोस्ट
शिरष बाजपेयी के अनुसार, कई विदेशी ग्राहकों ने उनके साथ काम करने से सिर्फ इसलिए इनकार कर दिया क्योंकि वे भारत से थे। उन्होंने ये भी दावा किया कि कुछ लोगों ने उनके प्रति नस्लभेदी टिप्पणियां कीं। अपने पोस्ट में उन्होंने लिखा, “जब मैं 17 साल का था, तब मैंने खुद को नीदरलैंड्स का लड़का बताकर विदेशी क्लाइंट्स के साथ काम करना शुरू किया। इससे मुझे काम मिलने लगा और मैं टीनएजर में ही हर महीने करीब 80 हजार रुपये कमाने लगा।”
खुद को नीदरलैंड्स का बताया
बाजपेयी ने बताया कि, उनकी योग्यता और काम करने की क्षमता वही थी, लेकिन बेहतर अवसर पाने के लिए उन्होंने इंटरनेट पर अपनी एक नई पहचान बना ली। उन्होंने खुद को नीदरलैंड्स का निवासी बताया, एक अलग नाम अपनाया और अपने वीडियो में अमेरिकी लहजे में बात करना शुरू किया। उनका कहना कि ऐसा करने के बाद विदेशी ग्राहकों का रवैया बदल गया और उन्हें पहले की तुलना में अधिक काम मिलने लगा। बाजपेयी ने स्वीकार किया कि उनकी इस रणनीति का असर बहुत जल्दी देखने को मिला।
जिन विदेशी ग्राहकों ने पहले उनके साथ काम करने में रुचि नहीं दिखाई थी, वे बाद में उन्हें प्रोजेक्ट देने के लिए तैयार हो गए। उनका कहना था कि उनके काम की गुणवत्ता और कौशल पहले जैसे ही थे, लेकिन लोगों की सोच और नजरिया बदल गया, जिससे उन्हें नए अवसर मिलने लगे।
हर महिने कमाते थे 80 हजार रुपए
बाजपेयी ने बताया कि, कुछ समय बाद उन्हें अपने काम का भुगतान भारतीय रुपये की बजाय अमेरिकी डॉलर में मिलने लगा। उन्होंने कहा कि 2017-18 के दौरान वह एक थंबनेल डिजाइन के लिए 50 डॉलर से अधिक फीस लेते थे, जो उस समय किसी कॉलेज छात्र के लिए काफी अच्छी कमाई मानी जाती थी। उनका कहना कि एक प्रोजेक्ट को पूरा करने में उन्हें करीब 20 से 40 मिनट का समय लगता था। इसी वजह से पढ़ाई के साथ-साथ वह हर महीने लगभग 80 हजार रुपये तक कमा लेते थे।
कैसे मिले क्लाइंट्स
बाजपेयी ने बताया कि शुरुआती दिनों में ग्राहक पाने के लिए उन्होंने अपने काम का एक कोलाज बनाया और उसे ट्विटर पर कई लोगों को भेजा। इसी तरीके से उन्हें अपने पहले क्लाइंट्स मिले। बाद में उन्होंने बताया कि ये तरीका वास्तव में "कोल्ड आउटरीच" जैसा था, हालांकि उस समय उन्हें इस शब्द के बारे में जानकारी भी नहीं थी। उनकी इसी पहल ने उन्हें शुरुआती प्रोजेक्ट्स और नए अवसर दिलाने में मदद की। वहीं लंबे समय तक इस बनाई गई पहचान को बनाए रखना आसान नहीं था।
कैसे पता चली सच्चाई
आखिरकार एक अप्रत्याशित घटना के दौरान सच्चाई सामने आ गई। बाजपेयी ने बताया कि जब उनके और CarryMinati के चैनल पर कुछ सौ सब्सक्राइबर थे, तब कैरीमिनाटी ने उनके चैनल का जिक्र किया था। इसके बाद लोगों को उनकी असली पहचान के बारे में पता चलने लगा। जब लोगों ने उनके वीडियो देखे, तो कई दर्शकों ने सवाल पूछना शुरू कर दिया कि एक भारतीय क्रिएटर विदेशी एक्सेंट में क्यों बोल रहा है। धीरे-धीरे इस बात की चर्चा बढ़ गई और लोग उनकी पहचान को लेकर सवाल उठाने लगे। बढ़ती चर्चा के बाद बाजपेयी ने वह फीचर हटाने का फैसला किया।
बाद में उन्होंने कहा कि जिस विदेशी एक्सेंट और पहचान की वजह से उन्हें विदेशी क्लाइंट्स मिले, उसी वजह से उन्हें भारत में आलोचना और सवालों का भी सामना करना पड़ा। उनके अनुसार, क्लाइंट्स ने आखिरकार उनके काम को देखकर ही उन पर भरोसा किया।
लोगों ने किया कमेंट
सोशल मीडिया पर कई लोगों ने इस पर अपना रिएक्शन दिए हैं। एक यूजर ने कमेंट किया, "ये दिलचस्प है कि कई बार लोगों की सोच आपको पहला मौका दिला देती है, लेकिन उस मौके को बनाए रखने का काम आपकी काबिलियत करती है।" वहीं दूसरे यूजर ने कहा, "इस कहानी के बाकी विवादों को अलग रख दें, तो एक बात साफ है कि एक टीएनजर उम्र का लड़का खुद क्लाइंट्स तलाश रहा था, अजनबियों को मैसेज भेज रहा था और ऐसा काम कर रहा था जिसके लिए लोग उसे पैसे देने को तैयार थे।"
कई अन्य यूजर्स ने कहा, “मैं सिर्फ इतना कहना चाहता हूं कि इस तरह का नस्लीय भेदभाव आज भी मौजूद है।” एक और कमेंट में कहा गया, “यह घटना दिखाती है कि कई बार लोग किसी व्यक्ति के काम को देखने से पहले ही उसके बारे में राय बना लेते हैं, जिससे असली प्रतिभा नजरअंदाज हो सकती है।”