Video: न देर रात काम, न वीकेंड का दबाव... भारतीय महिला ने बताई न्यूजीलैंड की अनोखी वर्क कल्चर

लंबे घंटे काम करना और ऑफिस के बाद भी जुड़े रहना कई कर्मचारियों की जिंदगी का हिस्सा बन चुका है। लेकिन न्यूजीलैंड में काम कर रही एक भारतीय महिला ने वहां की वर्क कल्चर को लेकर अपना अनुभव साझा किया है। समय पर घर जाने की सलाह और काम की सराहना ने उन्हें काफी प्रभावित किया

अपडेटेड Jul 11, 2026 पर 4:07 PM
न्यूजीलैंड में कर्मचारियों को सिर्फ एक वर्कर की तरह नहीं देखा जाता

आज के कॉर्पोरेट कल्चर में देर तक काम करना और ऑफिस के बाद भी काम से जुड़े रहना कई कर्मचारियों की जिंदगी का हिस्सा बन चुका है। लेकिन न्यूजीलैंड में काम कर रही भारतीय महिला यामिका गांधी का अनुभव इससे बिल्कुल अलग रहा। उन्होंने बताया कि वहां ऑफिस में मिलने वाली छोटी-छोटी चीजें जैसे सहकर्मियों का काम की तारीफ करना और समय पर घर जाने के लिए कहना ने उनके वर्क-लाइफ बैलेंस को देखने का नजरिया बदल दिया।

उनका भारत और न्यूजीलैंड की कार्य संस्कृति को लेकर किया गया ये अनुभव अब सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया है।

एक 'थैंक यू' मैसेज ने किया हैरान


यामिका गांधी ने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो शेयर किया, जिसमें उन्होंने न्यूजीलैंड के ऑफिस कल्चर का अनुभव बताया।

उन्होंने बताया कि एक शुक्रवार को शाम करीब 4 बजे वह ऑफिस में थीं। उस दिन ज्यादातर कर्मचारी घर से काम कर रहे थे। एक जरूरी काम पूरा करने के बाद उनके एक सहयोगी ने उन्हें मैसेज भेजा

थैंक यू यामिका, आपके काम की सच में सराहना करता हूं।”

यामिका ने कहा कि उन्हें ऐसी तारीफ आज भी अलग लगती है, क्योंकि उनके हिसाब से वह सिर्फ अपनी नौकरी की जिम्मेदारी निभा रही थीं। लेकिन वहां लोग छोटी उपलब्धियों को भी नोटिस करते हैं और खुलकर सराहना करते हैं।

'ज्यादा देर मत रुको, घर जाओ'

यामिका ने बताया कि न्यूजीलैंड में उनके सहकर्मी अक्सर उन्हें ऑफिस में ज्यादा देर तक रुकने से रोकते हैं। वे उन्हें कहते हैं कि अगर काम पूरा हो गया है तो घर चली जाएं और अपनी निजी जिंदगी के लिए समय निकालें।

उन्होंने बताया कि कंपनी जॉइन करते समय उनके मैनेजर ने साफ कर दिया था कि हफ्ते में 40 घंटे से ज्यादा काम करने की जरूरत नहीं है। अगर कभी डेडलाइन के कारण अतिरिक्त समय देना पड़े, तो बाद में छुट्टी लेकर उसकी भरपाई की जा सकती है।

यहां घंटे नहीं, काम मायने रखता है

यामिका ने भारत के ऑफिस कल्चर का जिक्र करते हुए कहा कि कई जगह कर्मचारियों से ऑफिस टाइम के बाद भी काम करने और वीकेंड पर उपलब्ध रहने की उम्मीद की जाती है। उनका कहना है कि कई बार भारत में मेहनत को काम की गुणवत्ता से ज्यादा काम किए गए घंटों से जोड़ा जाता है। कर्मचारियों को लगातार खुद को साबित करने का दबाव महसूस होता है।

न्यूजीलैंड में कर्मचारी को मिलती है अहमियत

यामिका के मुताबिक, न्यूजीलैंड में कर्मचारियों को सिर्फ एक वर्कर की तरह नहीं देखा जाता, बल्कि उनकी जरूरतों और समस्याओं को भी समझा जाता है। अगर कोई कर्मचारी अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पा रहा हो, तो उसे तुरंत बदलने के बजाय उसकी परेशानी समझने और सुधार के लिए मदद करने की कोशिश की जाती है। उन्होंने बताया कि वहां लोग ऑफिस टाइम में पूरी मेहनत करते हैं और फिर परिवार, दोस्तों और अपने शौक के लिए समय निकालते हैं।

ऐसा माहौल हर ऑफिस में होना चाहिए

यामिका की पोस्ट पर कई यूजर्स ने अपनी प्रतिक्रिया दी। कुछ लोगों ने कहा कि बेहतर वर्क कल्चर कर्मचारियों की मानसिक सेहत और काम की गुणवत्ता दोनों को सुधारता है। एक यूजर ने लिखा कि ऐसा बदलाव देखने के बाद वर्क कल्चर का फर्क साफ समझ आता है। वहीं कुछ लोगों ने कहा कि हर भारतीय कंपनी का माहौल एक जैसा नहीं होता और कई जगह अच्छे उदाहरण भी मौजूद हैं। कुछ यूजर्स ने यह भी कहा कि सिर्फ तारीफ करना काफी नहीं है, बल्कि काम का सही बंटवारा और सम्मानजनक माहौल भी जरूरी है।

वर्क-लाइफ बैलेंस पर फिर छिड़ी बहस

यामिका गांधी की कहानी ने एक बार फिर सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या ज्यादा घंटे काम करना ही मेहनत की पहचान है, या फिर बेहतर प्रदर्शन के साथ निजी जिंदगी के लिए समय मिलना भी जरूरी है। उनका अनुभव दिखाता है कि एक सकारात्मक ऑफिस माहौल में छोटे-छोटे बदलाव भी कर्मचारियों के अनुभव को पूरी तरह बदल सकते हैं।

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