Jagannath Rath Yatra 2026: आज गर्भगृह से निकल खुद भक्तों को दर्शन देंगे जग के नाथ, श्री जगन्नाथ महाप्रभु की विश्व प्रसिद्ध रथ यात्रा आज से शुरू

Jagannath Rath Yatra 2026: श्री जगन्नाथ महाप्रभु की रथ यात्रा आज से ओडिशा के पुरी में शुरू हो रही है। आज भगवान अपने गर्भगृह से निकल कर खुद भक्तों के बीच उन्हें दर्शन देने आते हैं। इसलिए यह रथ यात्रा पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है और दूर-दूर से इसका हिस्सा बनने के लिए आते हैं। आइए जानें

अपडेटेड Jul 16, 2026 पर 11:46 AM
यह भव्य उत्सव ओडिशा के पुरी में स्थित प्रसिद्ध जगन्नाथ मंदिर में आयोजित किया जाता है।

Jagannath Rath Yatra 2026: भगवान जगन्नाथ की विश्व प्रसिद्ध रथ यात्रा आज से ओडिशा के पुरी सहित देश और दुनिया के विभिन्न हिस्सों में शुरू हो रही है। पंचांग के अनुसार, इस बार रथ यात्रा का शुभारंभ रवियोग जैसे अत्यंत शुभ संयोग में हो रहा है। इसलिए, इसका धार्मिक महत्व और भी बढ़ गया है। भगवान श्री जगन्नाथ महाप्रभु की रथ यात्रा हर साल आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि से शुरू होती है। आज के दिन भगवान श्री जगन्नाथ महाप्रभु अपने भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ अपनी मौसी के घर गुंडीचा मंदिर जाते हैं। इस बेहद खास यात्रा के लिए तीनों भाई और बहन के लिए सुंदर और दिव्य लकड़ी के रथ तैयार किए जाते हैं, जिन पर इनकी भव्य और अलौकिक रथ यात्रा निकाली जाती है। आज से शुरू हुई इस रथ यात्रा का समापन 24 जुलाई को मंदिर में भगवान की वापसी की यात्रा के साथ होगा।

भक्तों को दर्शन देने आज भगवान खुद निकलते हैं गर्भगृह से बाहर

आमतौर पर भक्त भगवान के दर्शन करने मंदिर के गर्भगृह तक जाते हैं, लेकिन जगन्नाथ रथयात्रा एक ऐसी अनोखी परंपरा है जहां भगवान स्वयं मंदिर से बाहर निकलकर अपने भक्तों को दर्शन देने आते हैं। मान्यता है कि जो श्रद्धालु मंदिर के भीतर नहीं जा पाते, महाप्रभु खुद उन पर कृपा बरसाने सड़क पर आते हैं। तीनों देव गुंडीचा मंदिर में पूरे 9 दिनों तक निवास करते हैं। शास्त्रों के अनुसार, गुंडीचा मंदिर में भगवान के आड़प दर्शन करने से सौ यज्ञों के बराबर पुण्य फल की प्राप्ति होती है।

जगन्नाथ रथ यात्रा महत्वपूर्ण तिथियां और समय

हिंदू पंचांग के अनुसार, रथ यात्रा प्रतिवर्ष आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को शुरू होती है।

द्वितीया तिथि का प्रारंभ : 15 जुलाई 2026 को सुबह 11:50 बजे से


द्वितीया तिथि की समाप्ति : 16 जुलाई 2026 को सुबह 08:52 बजे तक

रथ यात्रा प्रारंभ : 16 जुलाई 2026 (गुरुवार)

बहुड़ा यात्रा (वापसी): 24 जुलाई 2026

25 जुलाई 2026: सुनावेश- इस दिन तीनों देवों का सोने के भव्य आभूषणों से अलौकिक श्रृंगार किया जाता है।

रथ यात्रा का महत्व और परंपरा

यह भव्य उत्सव ओडिशा के पुरी में स्थित प्रसिद्ध जगन्नाथ मंदिर में आयोजित किया जाता है।

गुंडिचा मंदिर की यात्रा : भगवान जगन्नाथ, अपने बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ विशाल और सुसज्जित काष्ठ (लकड़ी) के रथों पर सवार होकर अपनी मौसी के घर यानी गुंडिचा मंदिर जाते हैं। यह यात्रा लगभग 3 किलोमीटर लंबी होती है।

9 दिनों का प्रवास : तीनों देवी-देवता गुंडिचा मंदिर में 9 दिनों तक विश्राम करते हैं, जिसके बाद वे वापस मुख्य मंदिर लौट आते हैं।

रथों का निर्माण : रथ यात्रा के लिए हर साल नए रथों का निर्माण किया जाता है। रथ बनाने का काम अक्षय तृतीया के पावन पर्व से शुरू होता है।

स्नान पूर्णिमा अनुष्ठान : रथ यात्रा से पहले ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन भगवान को 108 घड़ों के जल से स्नान कराया जाता है, जिसके बाद वे कुछ दिनों के लिए एकांतवास (अनवसर काल) में चले जाते हैं।

धार्मिक मान्यता : माना जाता है कि जो भी श्रद्धालु सच्चे मन से भगवान जगन्नाथ के रथ को खींचने में मदद करता है या इस यात्रा में शामिल होता है, उसे जीवन-मरण के चक्र से मुक्ति मिलती है और मोक्ष की प्राप्ति होती है।

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