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कागजों की गलती ने छीन ली कमाई, गेहूं बेचने के लिए भटक रहे किसान

जालौन जिले में खसरा रिकॉर्ड की गलती किसानों के लिए बड़ी मुसीबत बन गई है। खेतों में गेहूं तैयार है, लेकिन कागजों में दूसरी फसल दर्ज होने से वे सरकारी खरीद केंद्रों पर बिक्री नहीं कर पा रहे। प्रशासन ने किसानों से तहसील जाकर खसरा दुरुस्त कराने की अपील की है, ताकि समस्या का समाधान हो सके।

Edited By: Anchal Jhaअपडेटेड Apr 15, 2026 पर 9:39 AM
कागजों की गलती ने छीन ली कमाई, गेहूं बेचने के लिए भटक रहे किसान
किसानों का कहना है कि क्रॉप सर्वे के दौरान कर्मचारियों ने सही तरीके से खेतों का निरीक्षण नहीं किया।

उत्तर प्रदेश के जालौन जिले की माधौगढ़ तहसील में इन दिनों किसानों के सामने एक हैरान करने वाली स्थिति खड़ी हो गई है। खेतों में मेहनत से उगाई गई गेहूं की फसल पूरी तरह तैयार है, लेकिन कागजों में हुई छोटी सी गलती उनकी सबसे बड़ी मुश्किल बन गई है। जहां एक तरफ किसान कटाई के बाद अच्छी कीमत की उम्मीद लगाए बैठे थे, वहीं दूसरी ओर सरकारी खरीद केंद्रों तक उनकी फसल पहुंच ही नहीं पा रही। वजह है रिकॉर्ड में गड़बड़ी, जिसने उनकी मेहनत और उम्मीदों के बीच दीवार खड़ी कर दी है।

इस समस्या ने न सिर्फ किसानों की आमदनी पर असर डाला है, बल्कि उन्हें मजबूरी में दूसरे विकल्प तलाशने पर भी मजबूर कर दिया है। अब ये स्थिति सवाल खड़ा कर रही है कि आखिर कागजी व्यवस्था की खामियों का बोझ कब तक किसानों को उठाना पड़ेगा।

खसरे की गलती बनी सबसे बड़ी बाधा

ग्राम अमखेड़ा के किसान नरसिंह ने करीब 35 बीघा में गेहूं उगाया, लेकिन जब बेचने पहुंचे तो पता चला कि खसरे में उनकी फसल ‘मूली’ दर्ज है। यही हाल कई अन्य किसानों का भी है, जिनके रिकॉर्ड में गेहूं की जगह चना, मटर या सब्जियां दर्ज हैं। असलियत और कागज के बीच यह फर्क किसानों के लिए मुसीबत बन गया है।

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