106 की उम्र में YouTube पर छा गई थीं दादी, लाखों लोगों ने देखा देसी कुकिंग का जादू

पारंपरिक व्यंजनों का स्वाद और उन्हें बनाने का देसी अंदाज आज भी लोगों को खूब आकर्षित करता है। आंध्र प्रदेश की कर्रे मस्तानम्मा ने इसी परंपरा को दुनिया तक पहुंचाया। 106 साल की उम्र में वह YouTube स्टार बन गईं और अपने सादगीभरे कुकिंग वीडियो से लाखों लोगों का दिल जीत लिया

अपडेटेड Jul 04, 2026 पर 8:39 AM
मस्तानम्मा का जन्म आंध्र प्रदेश के कोप्पल्ले गांव में हुआ था।

किसी भी व्यंजन को देसी अंदाज में बनते देखने का अपना अलग ही आनंद होता है, खासकर तब जब पारंपरिक व्यंजन धीरे-धीरे विलुप्त होते जा रहे हों। और अगर खाना दादी-नानी के हाथों बना हो, तो उसका स्वाद और भी खास हो जाता है। यही वजह है कि आंध्र प्रदेश की कर्रे मस्तानम्मा ने 106 वर्ष की उम्र में पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा। साल 2017 में उन्हें दुनिया की सबसे उम्रदराज YouTuber के रूप में पहचान मिली।

उनके YouTube चैनल Country Foods की शुरुआत 2016 में हुई थी, जहां वह पारंपरिक ग्रामीण व्यंजनों की सरल और प्रामाणिक रेसिपी साझा करती थीं। 2018 में उनका निधन हो गया, लेकिन उनकी पाक कला और विरासत आज भी लाखों लोगों के दिलों में जीवित है।

पारंपरिक स्वाद को पहुंचाया दुनिया तक


मस्तानम्मा ने अपने देसी अंदाज और पारंपरिक पकाने की तकनीकों से लाखों लोगों का दिल जीता। मिट्टी के चूल्हे पर खाना बनाना, सिल-बट्टे पर मसाले पीसना और स्थानीय सामग्री का उपयोग उनकी पहचान बन गया। उनके वीडियो भारतीय ग्रामीण खानपान और संस्कृति की झलक पेश करते थे।

ऐसे शुरू हुआ YouTube का सफर

मस्तानम्मा के YouTube सफर की शुरुआत उनके पड़पोते के. लक्ष्मण और उनके दोस्त श्रीनाथ रेड्डी ने की। दोनों ने Country Foods चैनल बनाकर उनकी पारंपरिक रेसिपियों को दुनिया तक पहुंचाने का फैसला किया। देखते ही देखते यह चैनल सोशल मीडिया पर बेहद लोकप्रिय हो गया।

लाखों लोगों का मिला प्यार

चैनल लॉन्च होने के करीब दो साल के अंदर Country Foods के लगभग 15.7 लाख (1.57 मिलियन) सब्सक्राइबर हो गए। उनके वीडियो केवल रेसिपी तक सीमित नहीं थे, बल्कि भारतीय ग्रामीण जीवन, संस्कृति और पारंपरिक खानपान को भी दुनिया के सामने लेकर आए।

संघर्षों से भरा था बचपन

मस्तानम्मा का जन्म आंध्र प्रदेश के कोप्पल्ले गांव में हुआ था। बचपन में उन्हें एक मुस्लिम परिवार ने गोद लिया, लेकिन कुछ समय बाद वो अपने गांव लौट आईं। कम उम्र से ही उन्होंने कई कठिन परिस्थितियों का सामना किया।

कम उम्र में शादी, फिर दुखों का सिलसिला

सिर्फ 11 साल की उम्र में उनकी शादी भूषणम नाम के व्यक्ति से हुई। 22 वर्ष की उम्र में पति का निधन हो गया और पांच बच्चों की जिम्मेदारी उनके कंधों पर आ गई। परिवार का पालन-पोषण करने के लिए उन्होंने धान के खेतों में दिहाड़ी मजदूर के रूप में काम किया।

महामारी में खो दिए चार बच्चे

गुंटूर जिले के उनके गांव में फैली हैजा (कॉलेरा) की महामारी ने उनकी जिंदगी बदल दी। इस बीमारी में उनके पांच में से चार बच्चों की मौत हो गई। केवल सबसे बड़े बेटे डेविड जीवित बचे, जिन्होंने बाद में अपनी आंखों की रोशनी भी खो दी। 105 वर्ष की उम्र तक मस्तानम्मा खेतों में मजदूरी करती रहीं और रोज 200–300 रुपये कमाकर अपने बेटे के साथ घर चलाती थीं।

एक्स ओरेकल बेंगलुरु के एम्प्लोयी को ऐसे मिला MBA डिग्री का फायदा, 25 हजार से सीधा 1 लाख हुई सैलरी

हिंदी में शेयर बाजार स्टॉक मार्केट न्यूज़,  बिजनेस न्यूज़,  पर्सनल फाइनेंस और अन्य देश से जुड़ी खबरें सबसे पहले मनीकंट्रोल हिंदी पर पढ़ें. डेली मार्केट अपडेट के लिए Moneycontrol App  डाउनलोड करें।