केरल की एक अदालत ने गुरुवार को एक व्यक्ति को तीन आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। इस शख्स को अपनी नाबालिग बेटी का तीन साल तक बार-बार यौन उत्पीड़न करने का दोषी पाया गया। हैवान पिता करीमनगर के पास अपने किराए के मकान में तीन साल तक, पांस साल की उम्र से लेकर आठ साल की उम्र तक बार-बार मासूम बेटी को अपनी हवस का शिकार बनाता रहा। स्पेशल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर (SPP) शिजोमन जोसेफ ने बताया कि इडुक्की फास्ट ट्रैक विशेष अदालत की जज मंजू वी ने यौन अपराधों से बच्चों के संरक्षण (POCSO) के तहत अलग-अलग अपराधों के लिए इस शख्स को मरने तक आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
अदालत ने पिता पर तीन लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया और निर्देश दिया कि अगर यह राशि उससे वसूल हो जाए, तो वो पैसा उसकी बेटी को दे दी जाए। अदालत ने कहा कि अगर जुर्माना नहीं भरा गया, तो दोषी को और छह साल की अतिरिक्त कैद की सजा काटनी होगी। अदालत ने जिला विधिक सेवा प्राधिकरण को बच्ची को पर्याप्त मुआवजा देने का भी निर्देश दिया।
SPP ने बताया कि बच्ची के साथ हुए दुर्व्यवहार का मामला 2020 में तब सामने आया जब वह आठ साल की थी।
बच्ची लगातार पेट दर्द से पीड़ित थी और उसका इलाज चल रहा था। उसने एक दिन अपनी मां से पूछा कि उसके पिता ने जो कुछ उसके साथ किया, क्या ये बीमारी उसकी वजह से हुई है। ये सुनकर उसका मां हैरान रह गई।
SPP ने बताया कि जब मां ने उससे घटना के बारे में विस्तार से पूछा और उसके बाद काउंसलिंग की गई तो बार-बार यौन शोषण के बारे में जानकारी सामने आई।
अभियोजक ने बताया कि लड़की के बयान के अनुसार, जब वह कक्षा 1 में पढ़ती थी, तब से उसका पिता अपने घर पर बार-बार उसका यौन शोषण करता रहा था।
उन्होंने बताया कि यह दुर्व्यवहार उन दोनों किराए के मकानों में हुआ जहां परिवार रहता था।
इसके बाद, करीमनूर पुलिस स्टेशन में पिता के खिलाफ मामला दर्ज किया गया। SPP ने कहा कि अभियोजन पक्ष ने आरोपी के लिए ज्यादा से ज्यादा सजा की मांग की और अदालत ने अनुरोध स्वीकार कर लिया।