Lizard Facts: कटने के बाद छिपकली की पूंछ बन जाती है नई, जानिए कैसे

Lizard Facts: घर की दीवारों पर अक्सर दिखने वाली छिपकलियों की कभी-कभी पूंछ कटी होती है, लेकिन कुछ समय बाद वही पूंछ फिर से उग आती है। यह नजारा हमें हैरान कर देता है और मन में सवाल जगाता है कि ऐसा कैसे होता है। दरअसल, यह छिपकली की एक खास जैविक क्षमता का परिणाम है

अपडेटेड Aug 12, 2025 पर 8:14 AM
Lizard Facts: छिपकली की पूंछ का कटना और दोबारा आना उसके जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

घर की दीवारों पर रेंगती छिपकलियां हमारे लिए कोई नई बात नहीं हैं, लेकिन क्या आपने गौर किया है कि कई बार इनमें से कुछ की पूंछ अधूरी या पूरी तरह कटी हुई होती है? और फिर कुछ समय बाद वही छिपकली नई पूंछ के साथ नजर आती है। ये नजारा देखकर हम चकित रह जाते हैं और मन में सवाल उठता है कि पूंछ कटने के बाद भी ये जीव कैसे जिंदा रहता है और आखिर नई पूंछ वापस कैसे आ जाती है। ये कोई जादू नहीं, बल्कि प्रकृति का एक अनोखा उपहार और अद्भुत जैविक प्रक्रिया है, जिसे विज्ञान में विशेष रूप से समझाया गया है।

पूंछ का दोबारा आना न केवल उसके शरीर की खास क्षमता का उदाहरण है, बल्कि उसके जीवन रक्षा के लिए भी अहम है। आज हम इसी रोचक तथ्य के पीछे छिपे विज्ञान और रहस्य से पर्दा उठाएंगे।

पूंछ कटने के बाद शरीर की प्रतिक्रिया


छिपकली के शरीर की बनावट बेहद अनोखी होती है। जब उसकी पूंछ कट जाती है, तो तुरंत ही उस हिस्से में मौजूद कोशिकाएं सक्रिय हो जाती हैं। ये कोशिकाएं कटे हुए हिस्से को भरने के लिए काम शुरू कर देती हैं और वहां एक तरह का सुरक्षा कवच (protective layer) बना देती हैं। ये कवच न केवल उस हिस्से को ढकता है, बल्कि नए पूंछ के निर्माण की तैयारी भी करता है।

इन्फेक्शन से बचाने वाला कवच

सुरक्षा कवच का सबसे बड़ा फायदा ये है कि ये छिपकली को किसी भी प्रकार के संक्रमण (infection) से बचाता है। पूंछ कटने के बाद खुला घाव आसानी से जीवाणु या वायरस का शिकार हो सकता है, लेकिन इस कवच की वजह से बीमारी लगने का खतरा काफी कम हो जाता है। इस तरह छिपकली सुरक्षित रूप से अपनी अगली पूंछ उगाने की प्रक्रिया पूरी करती है।

भ्रूण जैसी कोशिकाएं और नई पूंछ का निर्माण

पूंछ कटने के बाद छिपकली के शरीर में मौजूद कुछ विशेष कोशिकाएं भ्रूण जैसी अवस्था में आ जाती हैं। ये अवस्था उन्हें किसी भी अंग या ऊतक में बदलने की क्षमता देती है। इसी वजह से धीरे-धीरे कटे हुए हिस्से में नई पूंछ का निर्माण शुरू हो जाता है। ये प्रक्रिया दिनों से लेकर हफ्तों तक चल सकती है, और छिपकली के पास एक पूरी तरह नई पूंछ आ जाती है।

सभी छिपकलियों में नहीं होता ये चमत्कार

दिलचस्प बात ये है कि ये क्षमता सभी छिपकलियों में नहीं पाई जाती। विशेषज्ञों के मुताबिक, सिर्फ घर की दीवारों पर दिखने वाली आम छिपकलियों (House Gecko) में ही ये अद्भुत गुण होता है। बाकी कई प्रजातियों की छिपकलियों में पूंछ कटने के बाद वो दोबारा नहीं आती।

जीवन रक्षा की रणनीति

छिपकली की पूंछ का कटना और दोबारा आना उसके जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा है। अक्सर जब उस पर किसी शिकारी का हमला होता है, तो वो खुद अपनी पूंछ छोड़ देती है। पूंछ हिलती-डुलती रहती है, जिससे शिकारी का ध्यान उस पर चला जाता है और छिपकली को भागने का मौका मिल जाता है। बाद में वो सुरक्षित माहौल में नई पूंछ उगा लेती है।

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