केरल के कोच्चि में काम कर रहे कर्मचारी का पोस्ट सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। कोच्चि में एक निजी कंपनी में मैनेजर के रूप में काम करने वाले एक कर्मचारी ने दावा किया कि कंपनी ने पहले से अप्रूव्ड की गई छुट्टियों के बावजूद उसकी सैलरी काट ली है। इस फैसले से परेशान कर्मचारी ने अपनी बात सोशल मीडिया पर शेयर करते हुए लोगों से राय मांगी है। उसकी पोस्ट पर कई लोगों ने अपना रिएक्शन दिया है। इस मामले ने कंपनी की छुट्टी और वेतन नीति को लेकर चर्चा छेड़ दी है।
सोशल मीडिया पर वायरल हुआ पोस्ट
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Reddit पर शेयर की गई एक पोस्ट में एक कर्मचारी ने बताया कि, उसने करीब चार महीने पहले कोच्चि की एक कंपनी में मैनेजर के पद पर काम शुरू किया था। प्रोबेशन पीरियड के कारण उसे दो महीने के लिए हर महीने Rs 18,000 की सैलरी ऑफर की गई थी। वहीं प्रोबेशन पूरा होने के बाद उसकी सैलरी बढ़ाकर 20,000 रुपये कर दी गई। कर्मचारी ने ये भी कहा कि नौकरी के इंटरव्यू के समय उसने कंपनी प्रबंधन से छुट्टियों से जुड़े नियमों और नीतियों के बारे में विस्तार से जानकारी ली थी।
छुट्टी मिलने के बाद कटी सैलरी
व्यक्ति ने पोस्ट में कहा, "इंटरव्यू के दौरान मैंने खास तौर पर छुट्टी की नीति के बारे में पूछा था। उस समय मुझे बताया गया था कि मुझे हर साल 15 दिनों की छुट्टी मिलेगी और ये बात मेरे ऑफर लेटर में भी दर्ज थी। प्रोबेशन अवधि के दौरान मैंने 3 दिन की छुट्टी ली थी, जिसके बाद मेरी सैलरी में कटौती कर दी गई। उस समय मुझे लगा कि ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि मैं प्रोबेशन पर था। लेकिन प्रोबेशन पूरा होने के बाद जब मैंने दोबारा छुट्टी ली, तब भी मेरी सैलरी काटी गई, जिससे मैं हैरान रह गया।"
इस व्यवस्था के बारे में न तो इंटरव्यू के दौरान और न ही जॉइनिंग के समय मुझे कोई जानकारी दी गई थी
साल के अंत में मिलती है सैलरी
उन्होंने बताया, "असली हैरानी तब हुई जब मैंने इस बारे में एचआर और मैनेजमेंट से बात की। उन्होंने कहा कि उनकी कंपनी में यही नियम है। उनके मुताबिक कर्मचारियों को साल में 15 दिनों की छुट्टी तो मिलती है, लेकिन जब भी कोई कर्मचारी छुट्टी लेता है, उसकी सैलरी से उस अवधि का पैसा काट लिया जाता है। इसके बाद साल के अंत में ली गई कुल छुट्टियों का हिसाब किया जाता है और काटी गई राशि को अलग से वापस कर दिया जाता है।"
जॉइनिंग के समय नहीं दी गई ये जानकारी
उन्होंने आगे कहा, "इस व्यवस्था के बारे में न तो इंटरव्यू के दौरान और न ही जॉइनिंग के समय मुझे कोई जानकारी दी गई थी। अगर मुझे पहले से इस नियम के बारे में बताया गया होता, तो मैं इस नौकरी को लेकर अलग तरीके से सोचता। मैंने प्रबंधन से कहा कि वेतन में कटौती तभी उचित होगी, जब मैं सालाना निर्धारित 15 दिनों की छुट्टी से अधिक अवकाश लूं, लेकिन वे अपनी नीति में कोई बदलाव करने को तैयार नहीं हैं। इसके अलावा, छुट्टी पर रहने के दौरान भी मुझसे कई बार काम से जुड़ी जिम्मेदारियां निभाने की उम्मीद की जाती है, लेकिन इस बात को नजरअंदाज कर दिया जाता है।"
पोस्ट करने वाले व्यक्ति ने मदद मांगते हुए कहा, "ऐसी स्थिति में मुझे क्या करना चाहिए? क्या मुझे इस नीति की लिखित जानकारी मांगनी चाहिए, एचआर के सामने औपचारिक रूप से यह मुद्दा उठाना चाहिए, या फिर नई नौकरी की तलाश शुरू कर देनी चाहिए? इस मामले में कोई भी सलाह मेरे लिए उपयोगी होगी।" जल्द ही कई लोगों ने इस मामले पर अपनी राय दी।
एक यूजर ने कहा, "मेरे एक्सपीरिएंस के अनुसार यह बिल्कुल सामान्य प्रक्रिया नहीं है। मुझे तो ये भी नहीं लगता कि आपको बाद में वह पैसा वापस मिलेगा। यह पूरी व्यवस्था काफी अजीब लगती है। आपको अपना कॉन्ट्रैक्ट ध्यान से देखना चाहिए और चेक करना चाहिए कि क्या इसमें इस तरह की कोई शर्त लिखी गई थी। आमतौर पर छुट्टियों से जुड़े नियम कॉन्ट्रैक्ट में स्पष्ट रूप से दर्ज होते हैं।" एक अन्य व्यक्ति ने लिखा, "अर्न्ड लीव या श्रम कानूनों के तहत मिलने वाली अन्य छुट्टियां भुगतान के साथ दी जानी चाहिए। ये व्यवस्था कानूनी रूप से सही नहीं लगती और किसी कानूनी जांच में शायद टिक भी न पाए। मेरा सुझाव है कि आप बेहतर नौकरी के ऑप्शनों पर भी विचार करें।"
वहीं, एक और यूजर ने कहा, "ये नियम गैर-कानूनी हो सकता है। आपको अपने नजदीकी लेबर ऑफिस से संपर्क कर सलाह लेनी चाहिए।"