समंदर की लहरों में बहने के 1 हफ्ते बाद जिंदा मिला टूरिस्ट, कच्चे केकड़े खाकर ऐसे बचाई जान

कभी-कभी एक छोटी सी घटना भी इंसान को ऐसी मुश्किल में डाल देती है, जिसकी उसने कभी कल्पना नहीं की होती। हाल ही में एक शख्स के साथ कुछ ऐसा ही हुआ। कई दिनों तक बेहद कठिन हालात का सामना करने के बावजूद उसने हिम्मत नहीं हारी। अब उसकी यह कहानी लोगों को हैरान करने के साथ-साथ प्रेरित भी कर रही है

अपडेटेड Jun 10, 2026 पर 3:21 PM
लहरों के साथ बहते हुए किन लगातार खुद को बचाने की कोशिश करता रहा।

कभी-कभी जिंदगी ऐसी मुश्किल परीक्षा ले लेती है, जिसके बारे में सोचकर भी डर लगने लगता है। हाल ही में एक शख्स के साथ ऐसा ही हुआ, जब वो अचानक ऐसी स्थिति में फंस गया जहां चारों तरफ सिर्फ पानी था और मदद की कोई उम्मीद नजर नहीं आ रही थी। लेकिन उसने हिम्मत नहीं हारी और हर हाल में जिंदा रहने की कोशिश करता रहा। कई दिनों तक चले इस संघर्ष के बाद उसकी कहानी अब लोगों को हैरान भी कर रही है और प्रेरित भी। सोशल मीडिया पर भी लोग उसके जज्बे और हौसले की खूब तारीफ कर रहे हैं।

एक लहर और बदल गई पूरी कहानी

39 साल का किन (Qin) नाम का ये व्यक्ति चीन के हैनान प्रांत की राजधानी हाइकोउ घूमने गया था। 27 मई को वो समुद्र तट पर टहल रहा था, तभी अचानक तेज लहरों ने उसे खींचकर गहरे पानी में पहुंचा दिया। उसका मोबाइल फोन भी समुद्र में खो गया, जिससे मदद मांगने का कोई रास्ता नहीं बचा।


समुद्र के बीच मिला 'उम्मीद का सहारा'

लहरों के साथ बहते हुए किन लगातार खुद को बचाने की कोशिश करता रहा। अगले दिन उसे समुद्र में एक तैरता हुआ बॉय (Buoy) दिखाई दिया ये फोम या प्लास्टिक का बना होता है जिसे तैराक अपनी जांघों के बीच फंसाते हैं। ये पैरों को पानी में ऊपर रखता है। उसने किसी तरह उस पर चढ़कर खुद को संभाला। यही तैरता ढांचा अगले कई दिनों तक उसकी जिंदगी का सहारा बना रहा।

भूख लगी तो खाने पड़े कच्चे केकड़े

समुद्र में फंसे किन के सामने सबसे बड़ी चुनौती भूख थी। आसपास खाने के लिए कुछ नहीं था। ऐसे में उसे बॉय के आसपास छोटे-छोटे केकड़े दिखाई दिए। रिपोर्ट्स के मुताबिक उसने सात दिनों के दौरान करीब 80 कच्चे केकड़े खाकर खुद को जिंदा रखा।

हालत इतनी बिगड़ी कि होने लगे भ्रम

लगातार धूप, प्यास और कमजोरी का असर उसके शरीर के साथ दिमाग पर भी पड़ने लगा। कई दिनों तक समुद्र में रहने के कारण उसे भ्रम (Hallucination) होने लगे। वो वास्तविक और काल्पनिक चीजों में फर्क नहीं कर पा रहा था।

सातवें दिन दिखी जिंदगी की किरण

सात दिन बाद दो मछुआरों झेंग शिझोंग और फू टिंगसान की नजर समुद्र में फंसे किन पर पड़ी। उन्होंने उसे बचाने के लिए लकड़ी बढ़ाई, लेकिन उस समय किन इतनी खराब हालत में था कि उसे लगा जैसे दोस्त उसे खाने पर बुला रहे हों।

मछुआरों ने दिया नया जीवन

दोनों मछुआरों ने उसे नाव पर चढ़ाया, साफ कपड़े दिए और पानी पिलाया। उसके शरीर पर कई घाव हो चुके थे, जिनमें संक्रमण भी शुरू हो गया था। इसके बावजूद मछुआरे पूरे रास्ते उससे बात करते रहे ताकि वो होश में बना रहे।

अस्पताल में चला इलाज

किन को तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया। डॉक्टरों ने बताया कि उसके शरीर में पानी की भारी कमी हो गई थी और कई हिस्सों की त्वचा धूप और समुद्री पानी की वजह से खराब हो चुकी थी। जांच में उसके पाचन तंत्र में सूजन भी मिली, जिसकी वजह कच्चे केकड़े खाना माना गया।

डॉक्टर बोले- वही केकड़े बन गए जीवनरक्षक

डॉक्टरों का कहना है कि कच्चे केकड़ों से उसके स्वास्थ्य को नुकसान जरूर पहुंचा, लेकिन अगर वो उन्हें नहीं खाता तो शायद जिंदा नहीं बच पाता। यानी जिसने बीमारी दी, उसी ने उसकी जान भी बचाई।

सोशल मीडिया पर लोग कर रहे सलाम

किन की यह कहानी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है। लोग उसकी हिम्मत और जज्बे की तारीफ कर रहे हैं। कई यूजर्स का कहना है कि इतनी मुश्किल परिस्थितियों में भी हार न मानना ही उसकी सबसे बड़ी जीत है।

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