IIT JEE नहीं निकाल पाया पर अब 7 फिगर में है सैलरी, पिता को रिटायरमेंट पर गिफ्ट की BMW, 26 साल के शौर्य की कहानी जानिए

अंकुर वारिकू द्वारा शेयर की गई शौर्य शिखर की कहानी सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रही है। आईआईटी-जेईई में सफल नहीं होने के बाद शौर्य ने हार नहीं मानी। मेहनत और लगन के दम पर उन्होंने अपनी जिंदगी बदल दी और 26 साल की उम्र में अपने पिता को रिटायरमेंट पर 55 लाख रुपये की बीएमडब्ल्यू कार गिफ्ट की

अपडेटेड Jun 07, 2026 पर 9:17 PM
अंकुर वारिकू ने सोशल मीडिया पर शौर्य की कहानी शेयर करते हुए बताया कि जीवन में परिस्थितियां हमेशा एक जैसी नहीं रहतीं (Image: Ankur Warikoo/ LinkedIn)

सोशल मीडिया पर आए दिन कोई ना कोई स्टोरी वायरल होती रहती हैं। हाल ही में सोशल मीडिया पर एंटरप्रेन्योर और कंटेंट क्रिएटर की कहानी तेजी से वायरल हो रहा है। एंटरप्रेन्योर और कंटेंट क्रिएटर अंकुर वारिकू द्वारा शेयर की गई एक कहानी सोशल मीडिया पर लोगों का ध्यान खींच रही है। ये कहानी शौर्य शिखर नाम के एक युवा की है, जो कभी आईआईटी-जेईई में सफल नहीं हो पाया था। आईआईटी-जेईई में सेलेक्शन नहीं होने के बाद वह खुद को असफल मानने लगा था। समय और कठिन परिक्षम के साथ शौर्य शिखर की जिंदगी पूरी तरह बदल गई। 26 साल की उम्र में वह अपने पिता के रिटायरमेंट पर उन्हें करीब 55 लाख रुपये की बीएमडब्ल्यू कार गिफ्ट में दिया। ये उपलब्धि उसकी मेहनत और संघर्ष का बड़ा उदाहरण बनी।

अंकुल वारिकू ने किया पोस्ट

अंकुर वारिकू ने सोशल मीडिया पर शौर्य की कहानी शेयर करते हुए बताया कि जीवन में परिस्थितियां हमेशा एक जैसी नहीं रहतीं। कई बार शुरुआती असफलताओं के बावजूद मेहनत और सही दिशा में प्रयास इंसान को बड़ी सफलता तक पहुंचा सकते हैं। उन्होंने लिखा, “पांच साल पहले शौर्य शिखर को लगा था कि उसकी जिंदगी खत्म हो गई है। इस साल उसने अपने पापा को रिटायरमेंट गिफ्ट के तौर पर 55 लाख रुपये की बीएमडब्ल्यू कार दी। यह पोस्ट पैसों के बारे में नहीं है। यह उस सोच के बारे में है, जो शायद देर से आती है, लेकिन जरूर आती है। वह सोच यह है कि आखिरकार जिंदगी अपना रास्ता बना ही लेती है और सब कुछ बेहतर हो सकता है।”


आईआईटी-जेईई एग्जाम में नहीं हो पाया सफल

वारिकू के अनुसार, “26 साल का शौर्य पांच साल पहले मेरी टीम में शामिल हुआ था। उस समय वह अपनी जिंदगी में सही दिशा तलाशने की कोशिश कर रहा था। उसने आईआईटी-जेईई की एग्जाम दी थी, लेकिन उसमें सफल नहीं हो पाया। इस असफलता के बाद उसे लगने लगा था कि वह पूरी तरह नाकाम हो गया है, खासकर इसलिए क्योंकि उसके पापा आईआईटी से पढ़े हुए थे।”

इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने के बजाय उसने बीबीए कोर्स में दाखिला लेने का फैसला किया। उस समय यह बदलाव उसके लिए आसान नहीं था और वह अपने करियर को लेकर काफी असमंजस में था। वारिकू ने उस समय को याद करते हुए लिखा, “इतना ही नहीं, वह इंजीनियरिंग भी नहीं कर पाया। इसके बजाय उसने बीबीए की डिग्री करने का फैसला किया। उसका वजन 110 किलो से ज्यादा था। उसे लगता था कि उसने अपने माता-पिता को निराश कर दिया है। उसे अपना कॉलेज बिल्कुल पसंद नहीं था और उसे पूरा यकीन हो गया था कि उसकी जिंदगी अब सही दिशा में नहीं जा पाएगी।”

55 लाख की बीएमडब्ल्यू गिफ्ट की

वहीं इसके बाद के वर्षों में शौर्य की जिंदगी में बड़ा बदलाव आया। मुश्किलों के आगे हार मानने के बजाय उसने नई स्किल्स सीखने और खुद को बेहतर बनाने पर ध्यान दिया। वारिकू ने आगे लिखा, “अगर आज की बात करें, तो शौर्य ने अपने पापा को रिटायरमेंट गिफ्ट के तौर पर 55 लाख रुपये की बीएमडब्ल्यू कार दी है। वह हर महीने सात अंकों में कमाई करता है। कार का डाउन पेमेंट उसकी कुल संपत्ति के 5 प्रतिशत से भी कम है और उसकी ईएमआई उसकी मासिक आय के 7 प्रतिशत से भी कम होगी। सबसे अच्छी बात यह है कि वह अब पहले से कहीं ज्यादा फिट भी है।”

समय एक जैसा नहीं होता

इस कहानी को शेयर करते हुए अंकुर वारिकू ने बताया कि कई बार सफलता का असली मतलब समय बीतने के बाद ही समझ आता है। उन्होंने लिखा, “उसे अपनी जिंदगी बदलने में सिर्फ पांच साल लगे। लेकिन उस दिन को याद कीजिए जब वह आईआईटी में दाखिला नहीं ले पाया था। उस दिन को याद कीजिए जब उसे एहसास हुआ कि वह ऐसे कॉलेज में पढ़ रहा है, जिसे वह पसंद नहीं करता। उस समय को भी याद कीजिए जब वह खुद को देखकर शायद शर्मिंदगी महसूस करता था। उन दिनों ‘जिंदगी आखिरकार ठीक हो जाएगी’ जैसी बातें कोई मदद नहीं करती थीं। लेकिन जिंदगी की यही खास बात है, समय के साथ चीजें बदलती हैं और आखिरकार जिंदगी अपना रास्ता बना ही लेती है।”

लोगों ने दिया रिएक्शन

इस पोस्ट को सोशल मीडिया पर काफी लोगों ने पसंद किया और शौर्य की मेहनत व संघर्ष की सराहना की। एक यूजर ने लिखा, “आगे बढ़ते रहना ही सबसे बड़ा मंत्र है। इससे ठहराव और निराशा दूर होती है और जीवन में एक मकसद मिलता है।” एक अन्य यूजर ने कहा, “‘जिंदगी आखिरकार ठीक हो जाएगी’ से ज्यादा मुझे ‘आगे बढ़ते रहो’ वाला संदेश पसंद आया। जब सब कुछ आपके अनुसार नहीं होता, तब भी आगे बढ़ते रहना ही सबसे महत्वपूर्ण होता है।” एक और यूजर ने टिप्पणी की, “यह इस बात का सबसे बड़ा उदाहरण है कि आपकी मौजूदा स्थिति कभी भी आपकी अंतिम मंजिल नहीं होती।”

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