मार्को रुबियो की इस तस्वीर पर ईरान ने ईरानी सभ्यता याद दिलाई! ताजमहल और मुमताज का पर्शियन कनेक्शन क्या है?
ताजमहल को मुगल वास्तुकला का बेहतरीन शाहकार माना जाता है। यह अद्भुत कृति पर्शियन (ईरानी), इस्लामिक, भारतीय और मध्य एशियाई शैलियों का एक अद्भुत मिश्रण है। इसमें पर्शियन प्रभाव सबसे ज्यादा दिखाई देता है। इसे बनाने में 20000 से अधिक कारीगरों और मजदूरों ने काम किया था। इसका निर्माण 1632 से शुरू होकर 1648-1653 के बीच पूरा हुआ था
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने अपनी पत्नी के साथ सोमवार को ताजमहल का दीदार करने पहुंचे
भारत दौरे पर आए अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने अपनी पत्नी के साथ आगरा के मशहूर और दुनिया के अजूबों में शामिल ताजमहल के सामने अपनी पत्नी के साथ तस्वीर क्या खिंचवाई ईरान को मानो मौका मिल गया। इस खूबसूरत तस्वीर को लेकर ईरान ने अमेरिकी विदेश मंत्री और अमेरिका पर एक बेहद तीखा और कूटनीतिक तंज कसा है। हैदराबाद में स्थित ईरान के महावाणिज्य दूतावास ने अपने ऑफिशियल एक्स (X) हैंडल से इसे लेकर एक पोस्ट शेयर किया है। ईरान ने इस पोस्ट के जरिए अमेरिकी सरकार की नीतियों को आईना दिखाते हुए ताजमहल और मुमताज महल का पर्शियन (ईरानी) कनेक्शन याद दिलाया है। आइए जानते हैं क्या है यह पूरा मामला और ताजमहल का वो इतिहास, जिसे लेकर ईरान ने अमेरिका को घेरा है।
ईरान के हैदराबाद वाणिज्य दूतावास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर मार्को रुबियो की फोटो पर तंज कसते हुए लिखा कि- अगर रुबियो को इतिहास या आर्किटेक्चर की थोड़ी भी समझ होती तो वे यहां तस्वीर के लिए पोज नहीं देते। यह स्मारक एक मुगल सम्राट की ईरानी पत्नी के प्यार में बनवाया गया था, जिसे ईरान के प्रतिभाशाली आर्किटेक्ट्स ने तैयार किया था, जबकि उनकी (रुबियो की) सरकार आज ईरानी सभ्यता को मिटाने की धमकी देती है और दूसरी सभ्यताओं का अपमान करती है। आपको बता दें कि ईरान का यह कड़ा बयान मौजूदा समय में अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे भारी जियोपॉलिटिकल टेंशन के बीच आया है।
आप इस एक्स पोस्ट को यहां नीचे देख सकते हैं।
If Rubio knew the history or architecture, he wouldn't have posed for a picture here. This monument was built out for the love of emperor's Iranian wife, crafted by the genius of Iranian architects — meanwhile his government today threatens to wipe out Iranian civilization,… pic.twitter.com/zi4CNU3u7U
— Iran In Hyderabad (@IraninHyderabad) May 25, 2026
क्या है मुमताज महल का ईरानी कनेक्शन?
आपको बता दें कि ईरानी दूतावास ने जिस सम्राट की ईरानी पत्नी का जिक्र किया है, वे कोई और नहीं बल्कि मुमताज महल थीं। उनकी याद में ही मुगल सम्राट शाहजहां ने ताजमहल का निर्माण करवाया था। मुमताज महल का इतिहास पूरी तरह से पर्शियन (ईरानी) जड़ों से जुड़ा हुआ है। मुमताज महल का असली नाम अर्जुमंद बानू बेगम था। उनका जन्म 27 अप्रैल 1593 को हुआ था। वे भारत में आकर बसे एक बेहद प्रतिष्ठित और रसूखदार पर्शियन कुलीन परिवार से ताल्लुक रखती थीं। उनके दादा मिर्जा गियास बेग को इतिमाद-उद-दौला की उपाधि मिली थी। वो साल 1577 के आस-पास फारस (आधुनिक ईरान) से भारत आए थे और मुगल सम्राट अकबर की सेवा में शामिल हुए थे।
मुमताज के पिता अबुल हसन आसिफ खान आगे चलकर शाहजहां के शासनकाल में ग्रैंड वजीर यानी प्रधानमंत्री बने। उनकी मां दीवानजी बेगम भी ईरान के काजविन के एक पर्शियन कुलीन परिवार से थीं। मुमताज महल एक शिया मुस्लिम थीं। वे सम्राट जहांगीर की शक्तिशाली पत्नी नूरजहां की भतीजी थीं, जो खुद इसी ईरानी पारिवारिक नेटवर्क से आती थीं। अर्जुमंद बानू बेगम की शादी 1612 में शाहजहां से हुई थी। शाहजहां ने उनकी खूबसूरती, चरित्र और ऊंचे दर्जे को देखते हुए उन्हें मुमताज महल (महल का अनमोल रत्न) की उपाधि दी थी।
मुमताज महल ने शाहजहां के 14 बच्चों को जन्म दिया (जिनमें से 7 जीवित रहे, जिनमें औरंगजेब भी शामिल था)। साल 1631 में बुरहानपुर में अपने 14वें बच्चे को जन्म देते समय महज 38 वर्ष की उम्र में उनका निधन हो गया। उनके निधन से शाहजहां को इतना गहरा सदमा लगा कि उन्होंने उनकी याद में प्यार के प्रतीक के रूप में ताजमहल का निर्माण शुरू करवाया।
ईरानी आर्किटेक्ट्स के जीनियस दिमाग की देन है ताजमहल
ताजमहल को मुगल वास्तुकला का बेहतरीन शाहकार माना जाता है। यह अद्भुत कृति पर्शियन (ईरानी), इस्लामिक, भारतीय और मध्य एशियाई शैलियों का एक अद्भुत मिश्रण है। इसमें पर्शियन प्रभाव सबसे ज्यादा दिखाई देता है। इसे बनाने में 20000 से अधिक कारीगरों और मजदूरों ने काम किया था। इसका निर्माण 1632 से शुरू होकर 1648-1653 के बीच पूरा हुआ था। इसके निर्माण का मुख्य जिम्मा ईरानी विशेषज्ञों के पास था। आइए जानते हैं इसमें शामिल अहम नाम कौन थे-
उस्ताद अहमद लाहोरी: ताजमहल के मुख्य आर्किटेक्ट होने का श्रेय उस्ताद अहमद लाहोरी को श्रेय दिया जाता है। ये एक पर्शियन वास्तुकार थे। उन्होंने दिल्ली के लाल किले का भी डिजाइन तैयार किया था।
उस्ताद ईसा: फारस के उस्ताद ईसा (ईसा मोहम्मद एफेंदी) ने भी इसके आर्किटेक्चरल डिजाइन, मुख्य रूप से इसके विशाल गुंबद और स्ट्रक्चरल प्लानिंग में बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
अमानत खान शिराजी: ईरान के शिराज से आए अमानत खान इसके मुख्य कैलीग्राफर थे। ताजमहल के सफेद संगमरमर पर काले संगमरमर से उकेरी गई शानदार कुरान की आयतें और शिलालेख उन्हीं की कलाकारी का नतीजा हैं।
ताजमहल के डिजाइन में साफ दिखती है ईरानी कला
ताजमहल का पूरा लेआउट और सजावट ईरानी (पर्शियन) परंपराओं से प्रेरित है। पानी की नहरों से चार हिस्सों में बंटा हुआ ताजमहल का खूबसूरत बगीचा क्लासिक पर्शियन पैराडाइज गार्डन का लेआउट है। इसका डबल-शेल डोम (दोहरा गुंबद), ऊंचे मेहराबदार प्रवेश द्वार और मीनारें तिमुरिद और सफाविद पर्शियन स्टाइल को दर्शाती हैं। संगमरमर पर की गई जटिल नक्काशी, ज्यामितीय पैटर्न और फूलों की बारीक आकृतियां ये सब भी पर्शियन कला से प्रेरित हैं।
हालांकि इसे बनाने के लिए सफेद मकराना मार्बल इसके निर्माण के लिए सफेद मकराना मार्बल राजस्थान के नागौर से लाया गया था और इसका जमीनी काम भारतीय कारीगरों ने किया था, लेकिन इसकी पूरी वैचारिक और कलात्मक सोच पूरी तरह ईरानी वास्तुकला पर आधारित थी।