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Mothers day 2026: मुझको यकीं है सच कहती थीं जो भी अम्मी कहती थीं...जावेद अख्तर का ये जादू मदर्स डे पर आपको इमोशनल कर जाएगा

Mothers day 2026: जैसे-जैसे हम बड़े होते हैं, दुनिया के चेहरे बदलते जाते हैं। जावेद साहब इस ग़ज़ल के ज़रिए एक बहुत गहरी बात कहते हैं। जैसी यही लाइन कि- एक ये दिन जब ज़ेहन में सारी अय्यारी की बातें हैं, एक वो दिन जब दिल में भोली-भाली बातें रहती थीं। क्या आपको नहीं लगता कि झूठ, फरेब, छल, प्रपंच की दुनिया में हमारे बचपन वाली ईमानदारी और भोलापन कहीं खो गया है

MoneyControl Newsअपडेटेड May 07, 2026 पर 12:24 PM
Mothers day 2026: मुझको यकीं है सच कहती थीं जो भी अम्मी कहती थीं...जावेद अख्तर का ये जादू मदर्स डे पर आपको इमोशनल कर जाएगा
10 मई को दुनिया जब मदर्स डे सेलिब्रेट कर रही होती है

जिंदगी की इस भागदौड़ में हम अक्सर बहुत आगे निकल आते हैं, लेकिन एक मोड़ ऐसा होता है जहां पहुंचकर हर शख्स ठहर जाता है, वह है मां की याद। 10 मई को दुनिया जब मदर्स डे सेलिब्रेट कर रही होती है, तो दरअसल खुद को मां के बहाने थोड़ा ठहरने और उस प्रेम को याद करने का मौका दे रही होती है, जो बदले में आपसे कुछ नहीं मांगता। ऐसे में हमने भी सोचा कि क्यों न आपको आने वाले मदर्स डे पर कुछ ऐसी पंक्तियों से परिचित कराया जाए जो आपके दिल को छू लें और आप भले अपनी मां से दूर हों लेकिन वो आपकी यादों में तैर जाएं। ऐसे में मशहूर गीतकार जावेद अख्तर से बेहतर ऑप्शन और क्या हो सकता था!

जावेद अख्तर साहब की एक मशहूर गजल है, जिसके बोल हैं- मुझको यकीं है सच कहती थीं जो भी अम्मी कहती थीं। यह गजल सिर्फ शायरी नहीं, बल्कि हर उस इंसान की दास्तां है जिसने बड़ा होने की कीमत चुकाई है।

बचपन की वो जादुई दुनिया

ग़ज़ल की शुरुआत में जावेद साहब उन मासूम यकीनों की बात करते हैं जो माँ ने हमारे मन में बोए थे। याद करिए जब मां कहती थी कि 'परियां आकाश से उतरती हैं', 'चांद में बुढ़िया चरखा कातती है' या 'मेहनत का फल मीठा होता है'। उस वक्त हमें इन बातों पर रत्ती भर भी शक नहीं था। वह दौर कितना खुशनुमा था जब दुनिया वैसी ही दिखती थी जैसी मां दिखाती थी। इस गजल को पढ़ते हुए पाठक अपनी आंखों के सामने उस बचपन को दोबारा जीने लगता है, जहां मां की गोद ही पूरी कायनात थी।

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