Nautapa 2026: शुरू हुए साल के सबसे तपते 9 दिन, जानिए क्या करें और क्या नहीं

Nautapa 2026: गर्मी अपने चरम पर पहुंच चुकी है और आज से नौतपा की शुरुआत हो गई है, जो 2 जून 2026 तक चलेगा। हिंदू पंचांग के अनुसार ये साल के सबसे तपते 9 दिन होते हैं, जब सूर्य का प्रभाव सबसे ज्यादा माना जाता है और तापमान तेजी से बढ़कर जनजीवन को प्रभावित करता है

अपडेटेड May 25, 2026 पर 8:51 AM
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Nautapa 2026: दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे तक धूप सबसे ज्यादा खतरनाक मानी जाती है।

सूरज की तपिश अब लोगों की मुश्किलें बढ़ाने लगी है, क्योंकि आज से नौतपा की शुरुआत हो चुकी है। हिंदू पंचांग और ज्योतिष शास्त्र में इन 9 दिनों को साल का सबसे गर्म दौर माना जाता है। मान्यता है कि इस दौरान सूर्य देव का प्रभाव पृथ्वी पर सबसे अधिक रहता है, जिससे तापमान तेजी से बढ़ता है और गर्म हवाएं लोगों को बेहाल कर देती हैं। यही वजह है कि नौतपा को सिर्फ मौसम का बदलाव नहीं, बल्कि प्रकृति का अहम संकेत भी माना जाता है।

कहा जाता है कि इन दिनों की तेज गर्मी आने वाले मानसून का इशारा देती है। धार्मिक दृष्टि से भी नौतपा बेहद खास माना जाता है, इसलिए इस दौरान खानपान, दान-पुण्य और दिनचर्या को लेकर विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है।

आखिर क्या होता है नौतपा?


ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक जब सूर्य देव रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करते हैं, तभी नौतपा की शुरुआत होती है। सूर्य इस नक्षत्र में करीब 15 दिन तक रहते हैं, लेकिन शुरुआती 9 दिन सबसे ज्यादा तपिश वाले माने जाते हैं। इन दिनों गर्म हवाएं, तेज धूप और बढ़ता तापमान लोगों की दिनचर्या पर सीधा असर डालता है।

पौराणिक मान्यता यह भी कहती है कि नौतपा जितना तेज होता है, मानसून उतना ही अच्छा माना जाता है। यानी प्रकृति का यह चक्र आने वाली बारिश का संकेत भी देता है।

नौतपा में जल दान क्यों माना जाता है सबसे बड़ा पुण्य?

भीषण गर्मी के बीच प्यासे लोगों को पानी पिलाना बेहद पुण्यदायी माना गया है। ऐसे में राहगीरों के लिए प्याऊ लगवाना या ठंडे पानी की व्यवस्था करना शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस दौरान जल दान करने से सूर्य देव प्रसन्न होते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि बनी रहती है।

सिर्फ इंसानों नहीं, पशु-पक्षियों का भी रखें ध्यान

नौतपा के दौरान इंसानों के साथ पशु-पक्षियों को भी सबसे ज्यादा परेशानी होती है। ऐसे में घर की छत, बालकनी या आंगन में मिट्टी के बर्तन में पानी और दाना रखना बेहद जरूरी माना गया है। यह न सिर्फ दया का काम है, बल्कि सनातन परंपरा में इसे पुण्य का कार्य भी कहा गया है।

शरीर को ठंडा रखने के लिए बदलें खानपान

इन 9 दिनों में शरीर में पानी की कमी तेजी से हो सकती है। इसलिए डाइट में ऐसी चीजें शामिल करनी चाहिए जो शरीर को ठंडक दें। तरबूज, खरबूजा, खीरा, ककड़ी, छाछ, लस्सी, आम पना और नींबू पानी जैसी चीजें शरीर को हाइड्रेट रखने में मदद करती हैं।

नौतपा में इन चीजों का दान माना जाता है शुभ

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दौरान सत्तू, मिट्टी का घड़ा, हाथ वाला पंखा और छाता दान करना काफी फलदायी माना जाता है। कहा जाता है कि जरूरतमंदों को गर्मी से राहत देने वाली चीजों का दान करने से शुभ फल प्राप्त होते हैं।

इन गलतियों से बचना बेहद जरूरी

तेज धूप में निकलने से बचें

दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे तक धूप सबसे ज्यादा खतरनाक मानी जाती है। जरूरी काम न हो तो घर से बाहर निकलने से बचें। अगर बाहर जाना पड़े तो सिर और कान को सूती कपड़े या छाते से ढककर निकलें।

तला-भुना और भारी खाना न खाएं

नौतपा में पाचन तंत्र थोड़ा कमजोर हो जाता है। ऐसे में ज्यादा मसालेदार, बासी और तला-भुना खाना शरीर को नुकसान पहुंचा सकता है।

शराब और मांसाहार से बनाएं दूरी

धार्मिक मान्यता के साथ-साथ स्वास्थ्य के लिहाज से भी इन दिनों शराब, मांस और गर्म तासीर वाली चीजों से दूरी बनाने की सलाह दी जाती है। ये शरीर का तापमान और बढ़ा सकती हैं।

क्या नौतपा में शुभ काम करना सही माना जाता है?

हालांकि रोजमर्रा के काम चलते रहते हैं, लेकिन कई जगहों पर परंपरा के अनुसार विवाह या बड़े मांगलिक कार्यों की शुरुआत इन 9 दिनों में नहीं की जाती। माना जाता है कि भीषण गर्मी के कारण लोग असहज हो सकते हैं।

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