मई का महीना आते ही “नौतपा” शब्द हर तरफ चर्चा में आ जाता है। जैसे-जैसे तापमान बढ़ने लगता है और मौसम विभाग लू व भीषण गर्मी की चेतावनी जारी करता है, लोग पहले से ही सावधान हो जाते हैं। घरों में कूलर और पंखों की सर्विसिंग शुरू हो जाती है, पानी का स्टॉक रखा जाता है और दिन के समय बाहर निकलने से बचने की योजना बनने लगती है। दरअसल, नौतपा वो अवधि मानी जाती है जब सूर्य की किरणें धरती पर सबसे अधिक तीखी और प्रचंड होती हैं, जिससे गर्मी अपने चरम पर पहुंच जाती है।
इस दौरान मौसम का असर इतना तेज होता है कि सामान्य दिनचर्या भी प्रभावित होने लगती है। यही वजह है कि नौतपा को गर्मी के सबसे कठिन और चुनौतीपूर्ण समय के रूप में देखा जाता है, जहां सावधानी और तैयारी बेहद जरूरी हो जाती है।
नौतपा का असली मतलब क्या है?
नौतपा को ज्योतिष और मौसम दोनों से जोड़ा जाता है। जब सूर्य रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करता है, तब से अगले 9 दिन “नौतपा” कहलाते हैं। माना जाता है कि इस दौरान सूर्य अपनी सबसे तेज गर्मी दिखाता है। साल 2026 में ये अवधि 25 मई से 2 जून तक रहने की संभावना है। इस समय कई इलाकों में तापमान 45 डिग्री या उससे भी ज्यादा पहुंच सकता है।
क्यों डराते हैं नौतपा के दिन?
नौतपा के दौरान लू और हीटस्ट्रोक का खतरा सबसे ज्यादा बढ़ जाता है। तेज धूप और गर्म हवाएं शरीर का तापमान तेजी से बढ़ा देती हैं। अगर पानी की कमी हो जाए या ज्यादा देर धूप में रहना पड़े, तो डिहाइड्रेशन हो सकता है। बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों के लिए ये समय और भी ज्यादा जोखिम भरा माना जाता है।
क्या सच में सबसे ज्यादा गर्मी इन्हीं दिनों में होती है?
मई के आखिरी और जून की शुरुआत में सूरज की किरणें लगभग सीधे धरती पर पड़ती हैं, जिससे जमीन बहुत तेजी से गर्म हो जाती है। हालांकि हर साल मौसम एक जैसा नहीं रहता—कभी बारिश या हवाओं की वजह से थोड़ी राहत भी मिल जाती है। फिर भी इन दिनों को गर्मी का सबसे कठिन और चुनौतीपूर्ण समय माना जाता है।
नौतपा से पहले कैसी तैयारी जरूरी है?
इस समय सबसे जरूरी है शरीर को हाइड्रेट रखना। भरपूर पानी पिएं और घर से बाहर निकलते समय पानी साथ रखें। दोपहर 12 से 4 बजे तक बाहर निकलने से बचें। हल्के और सूती कपड़े पहनें और सिर को ढककर रखें। घर में ORS, नींबू पानी, छाछ और नारियल पानी जैसी चीजें जरूर रखें ताकि शरीर ठंडा रहे।
किन संकेतों को नजरअंदाज करना खतरनाक है?
अगर किसी को तेज सिरदर्द, चक्कर, उल्टी, ज्यादा प्यास, कमजोरी या सांस लेने में दिक्कत हो, तो यह हीटस्ट्रोक का संकेत हो सकता है। ऐसी स्थिति में तुरंत ठंडी जगह पर ले जाएं और डॉक्टर से संपर्क करें। थोड़ी सी लापरवाही भी इस मौसम में बड़ी परेशानी का कारण बन सकती है।