कल्पना कीजिए एक ऐसे परिवार की जो दशकों से एक साथ खाना खाता था, एक-दूसरे के दुख-सुख बांटता था और साथ खेलता था। लेकिन आज, वही भाई एक-दूसरे की गर्दन के प्यासे हैं। युगांडा के किबाले नेशनल पार्क का न्गोगो समुदाय, जो कभी अपनी अटूट एकता के लिए मिसाल था, आज नफरत की आग में जल रहा है।
रिश्तों की बलि और नफरत का उदय
न्गोगो का यह कुनबा करीब 200 सदस्यों के साथ दुनिया का सबसे बड़ा और सुखी चिंपांजी परिवार माना जाता था। लेकिन वक्त बदला और रिश्तों की गर्माहट, ठंडी नफरत में बदल गई। साल 2018 के आसपास इस कुनबे की नींव हिलने लगी और यह दो गुटों में बंट गया: 'वेस्टर्न' और 'सेंट्रल'। जो हाथ कभी एक-दूसरे की सफाई करते थे, अब वही हाथ पत्थर और दांतों से जान लेने पर उतारू हैं।
वैज्ञानिकों को सबसे ज्यादा हैरान जिस बात ने किया, वह है इन चिंपांजियों की रणनीति। 'वेस्टर्न' गुट के चिंपांजी किसी ट्रेंड कमांडो फोर्स की तरह व्यवहार कर रहे हैं। वे खामोशी से, एक ही कतार में चलते हुए दुश्मन के इलाके में घुसते हैं। वे घात लगाकर बैठते हैं और मौका मिलते ही हमला कर देते हैं। यह सिर्फ जानवरों की लड़ाई नहीं, बल्कि एक सोची-समझी सैन्य कार्रवाई जैसी लगती है।
मासूमों का कत्ल और सत्ता का लालच
इस खूनी जंग में अब तक 28 चिंपांजियों की बेरहमी से हत्या की जा चुकी है। सबसे ज्यादा दुखद यह है कि इस नफरत की आग में मासूम बच्चों को भी नहीं बख्शा गया। 'सेंट्रल' गुट, जो कभी संख्या में भारी था, अब धीरे-धीरे बिखर रहा है। हमलावर 'वेस्टर्न' गुट न केवल जान ले रहा है, बल्कि उनकी जमीनों पर भी कब्जा करता जा रहा है। यह सत्ता और वर्चस्व की वैसी ही भूख है जैसी इंसानी इतिहास में देखी गई है।
आखिर दोस्ती दुश्मनी में क्यों बदली?
इस पूरी घटना ने वैज्ञानिकों को असमंजस में डाल दिया है। आमतौर पर चिंपैंजी दूसरे अनजान समूहों पर हमला करते हैं, लेकिन अपने ही पुराने साथियों के खिलाफ इस तरह का संगठित 'गृहयुद्ध' दुर्लभ है। वैज्ञानिकों का कहना है कि इस दुश्मनी का कोई एक स्पष्ट कारण नजर नहीं आता, लेकिन यह इंसानी व्यवहार और समाज के टूटने के पैटर्न से काफी मिलता-जुलता है।