सोशल मीडिया पर इन दिनों डिलीवरी पार्टनर की कहानी तेजी से वायरल हो रही है। इस पोस्ट ने नौकरी छूटने, बढ़ती उम्र में रोजगार की मुश्किलों को लेकर नई बहस छेड़ दी है। सोशल एंटरप्रेन्योर किरण वर्मा ने लिंक्डइन पर 56 साल के एक पोर्टर डिलीवरी पार्टनर से हुई मुलाकात का अपना एक्सपीरिएंश शेयर किया है। उन्होंने बताया कि कॉर्पोरेट नौकरी खत्म होने के बाद उस व्यक्ति को परिवार चलाने के लिए डिलीवरी का काम करना पड़ा। सोशल मीडिया पर इस कहानी ने लोगों को इमोशनल कर दिया।
'चेंज विद वन मील' नाम की सामाजिक संस्था से जुड़े किरण वर्मा ने बताया कि, उन्होंने नोएडा में शहर के भीतर एक अर्जेंट लेटर भेजने के लिए सिर्फ 40 रुपये में पोर्टर की डिलीवरी सेवा ली थी। उन्हें लगा था कि ये एक नॉर्मल डिलीवरी होगी, लेकिन बातचीत ने उन्हें नौकरी और रोजगार की कई कड़वी सच्चाइयों से रूबरू करा दिया।
सोशल मीडिया पर किया पोस्ट
किरण वर्मा ने अपने लिंक्डइन पोस्ट में बताया कि, पैकेट लेने के लिए एक उम्रदराज डिलीवरी पार्टनर उनके घर आया। वह पहली मंजिल पर रहते हैं और तुरंत नीचे नहीं जा सकते थे, इसलिए उन्होंने डिलीवरी पार्टनर को ऊपर आने के लिए कहा। बुजुर्ग व्यक्ति धीरे-धीरे सीढ़ियां चढ़कर उनके पास पहुंचा। पानी का ऑफर मना कर दिया और मुस्कुराते हुए पैकेज दे दिया। वर्मा के मुताबिक, वह व्यक्ति काफी अच्छे तरीके से बात कर रहा था और प्रोफेशनल कपड़ों में था। उसकी बात और व्यक्तित्व देखकर उन्होंने पैकेज लेने के बाद उसे वापस बुलाया और कुछ देर बैठकर बातचीत करने के लिए कहा।
राइडर ने उनसे कहा, "आज काम ही नहीं था, मैं काम का इंतजार कर रहा था।" किरण वर्मा ने बताया कि, बातचीत के दौरान डिलीवरी पार्टनर ने अपना नाम 56 वर्षीय मनोज बताया। मनोज ने कहा कि वह नोएडा के रहने वाले हैं और 2023 में छंटनी से पहले करीब 14 साल तक टाटा एआईए लाइफ इंश्योरेंस के प्रशासन विभाग में काम कर चुके हैं। नौकरी जाने के बाद उन्होंने कई जगह कोशिश की, लेकिन बढ़ती उम्र और स्वास्थ्य से जुड़ी परेशानियों की वजह से उन्हें नई नौकरी नहीं मिल सकी।
बातचीत के दौरान हुए इमोशनल
जब वर्मा ने उनसे छंटनी के बारे में पूछा तो बातचीत इमोशनल हो गई। उन्होंने कहा, "बेटा, जब सब्जी बनती है तो करी पत्ता सबसे पहले डाला जाता है, लेकिन जब सब्जी खाई जाती है तो सबसे पहले करी पत्ता ही निकाल दिया जाता है।" मनोज ने इस उदाहरण के जरिए बताया कि अनुभवी कर्मचारी भी करी पत्ते की तरह होते हैं, जिनकी जरूरत काम के दौरान तो होती है, लेकिन बाद में अक्सर उन्हें सबसे पहले अलग कर दिया जाता है।
वर्मा ने साफ किया कि उन्हें मनोज की नौकरी जाने के पीछे की असली परिस्थितियों की जानकारी नहीं है। वर्मा ने बताया कि उन्होंने मनोज के साथ कई मिनट तक बातचीत की। बातचीत खत्म होने के बाद वर्मा ने उनकी मेहनत की सराहना करते हुए तय डिलीवरी शुल्क से ज्यादा पैसे भी दिए। उन्होंने लिखा, "जिंदगी मुश्किल है, असल जिंदगी के हालात उससे भी ज्यादा मुश्किल हैं और सबसे कठिन बात ये है कि आप काम करना चाहते हैं, लेकिन जिंदगी आपको काम के लायक नहीं समझती।"
वर्मा ने आगे बताया कि जब डिलीवरी पार्टनर वहां से जा रहा था, तो उन्होंने उसे अपनी बालकनी से ऐसे विदा किया, जैसे किसी अपने परिचित को अलविदा कह रहे हों। इस पर प्रोफेशनल्स, रिक्रूटर्स तथा स्टार्टअप जगत से जुड़े कई लोगों ने अपनी प्रतिक्रियाएं दीं। इंट्रासिटी डिलीवरी प्लेटफॉर्म पोर्टर ने भी इस पोस्ट पर सार्वजनिक रूप से जवाब देते हुए लिखा, "हमारी टीम की मेहनत की सराहना करने और यह दिल छू लेने वाली कहानी साझा करने के लिए आपका धन्यवाद।" वहीं कंपनी ने डिलीवरी पार्टनर की व्यक्तिगत परिस्थितियों पर कोई टिप्पणी नहीं की।
सोशल मीडिया पर लोगों ने किया कमेंट
इस घटना के बाद सोशल मीडिया पर नौकरी जाने, बढ़ती उम्र में रोजगार की परेशानी और गिग वर्क को लेकर बड़ी चर्चा शुरू हो गई। कई लोगों ने इसे आज के रोजगार बाजार की कड़वी सच्चाई बताया। एक LinkedIn यूजर ने लिखा, "जिंदगी मुश्किल है। हर इंसान अपनी ऐसी लड़ाई लड़ रहा होता है, जिसे हम न तो देख पाते हैं और न ही पूरी तरह समझ पाते हैं। कई बार किसी को सिर्फ दया, हमदर्दी और थोड़ी-सी बातचीत की जरूरत होती है।" वहीं, एक अन्य यूजर ने किरण वर्मा का धन्यवाद करते हुए लिखा कि यह कहानी याद दिलाती है कि "जिंदगी हर किसी के लिए कठिन है, बस सबके हालात अलग-अलग हैं।"