Viral Video: विदेश में लग्जरी लाइफ का सपना पड़ा भारी, NRI कपल पर चढ़ा ₹8 करोड़ से ज्यादा का कर्ज

Viral Video: 22 साल की उम्र में भारत से अमेरिका गए एक कपल ने अपनी कहानी साझा की है, जिसमें उन्होंने बताया कि कैसे “अमेरिकन ड्रीम” की चाह में लिया गया हर फैसला धीरे-धीरे बड़े कर्ज का कारण बन गया। अच्छी जिंदगी और लग्जरी के सपने अब उनके लिए आर्थिक बोझ बन चुके हैं

अपडेटेड Jun 23, 2026 पर 11:39 AM
कपल के मुताबिक वो लंबे समय तक बिना सही प्लानिंग के “ऑटोपायलट मोड” में जिंदगी जीते रहे

22 साल की उम्र में भारत से अमेरिका जाकर नया जीवन शुरू करने वाले एक कपल ने अपनी कहानी साझा की है, जो “अमेरिकन ड्रीम” की असल तस्वीर को सामने लाती है। शुरुआत में सब कुछ बेहद आकर्षक लगा अच्छी नौकरी, बड़ा घर, आरामदायक जिंदगी और बेहतर भविष्य की उम्मीदें। लेकिन समय के साथ यही सपने धीरे-धीरे उनके लिए आर्थिक बोझ बनते चले गए। घर खरीदना, रेनोवेशन कराना, निवेश के फैसले और क्रेडिट पर खर्च करना उन्हें उस वक्त सामान्य लगा, लेकिन बाद में यही फैसले भारी कर्ज का कारण बन गए।

कपल के मुताबिक वो लंबे समय तक बिना सही प्लानिंग के “ऑटोपायलट मोड” में जिंदगी जीते रहे, जहां हर नया खर्च एक नई जिम्मेदारी जोड़ता गया। अब वो अपनी फाइनेंशियल स्थिति को संभालने और कर्ज से बाहर निकलने की कोशिश कर रहे हैं, ताकि दोबारा संतुलित और सुरक्षित जीवन जी सकें।

शुरुआत लगी सही, लेकिन खर्च बन गया बोझ


कपल के मुताबिक, शुरुआत में घर खरीदना, किचन रेनोवेशन करना, कार लेना और प्रॉपर्टी में इन्वेस्ट करना उन्हें बिल्कुल “नॉर्मल” फैसले लगे। लेकिन समय के साथ ये सभी फैसले मिलकर एक बड़ा आर्थिक बोझ बनते चले गए, जिसका अंदाजा उन्हें बाद में हुआ।

ऑटोपायलट मोडमें गुजरती जिंदगी

उन्होंने बताया कि वो लंबे समय तक बिना ज्यादा सोच-विचार के खर्च करते रहे, जैसे जिंदगी “ऑटोपायलट मोड” पर चल रही हो। हर नया खर्च एक नई EMI, नया लोन और नई जिम्मेदारी जोड़ता गया, जिससे धीरे-धीरे फाइनेंशियल प्रेशर बढ़ता गया।

8.4 करोड़ रुपये का भारी कर्ज कैसे बना?

जब उन्होंने अपने पूरे कर्ज का हिसाब लगाया, तो चौंकाने वाला आंकड़ा सामने आया करीब $850,000 (लगभग ₹8.4 करोड़)।

इसका ब्रेकअप कुछ ऐसा था:

$400,000 — अपने घर का मॉर्गेज

$270,000 — इन्वेस्टमेंट प्रॉपर्टी

$150,000 — किचन रेनोवेशन लोन

$30,000 — क्रेडिट कार्ड का कर्ज

अब बदल रही है जिंदगी की दिशा

अब यह कपल अपनी फाइनेंशियल लाइफ को दोबारा पटरी पर लाने की कोशिश कर रहा है। उनका लक्ष्य है कि आने वाले करीब 1,200 दिनों में वह पूरा कर्ज चुका दें और एक बार फिर से कंट्रोल में अपनी जिंदगी को ला सकें।

सीख क्या मिलती है?

ये कहानी दिखाती है कि कभी-कभी “अच्छी जिंदगी” की दौड़ में लिए गए छोटे-छोटे फैसले भी धीरे-धीरे बड़ा आर्थिक संकट बन सकते हैं, अगर प्लानिंग सही न हो।

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