Viral News: भाई ने कब्र से खोदकर निकाला मरी हुई बहन का कंकाल, ₹19,300 के लिए शव लेकर पहुंच गया बैंक

Odisha Viral News: ओडिशा के क्योंझर जिले में एक आदिवासी आदमी चिलचिलाती धूप में तीन किलोमीटर पैदल चला। वह अपनी मरी हुई बहन के कंकाल को अपने कंधे पर उठाकर एक बैंक ले गया, ताकि उसके खाते से 19,300 रुपये निकाल सके। उसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है

अपडेटेड Apr 28, 2026 पर 8:34 AM
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Odisha Viral News: बहन कालरा मुंडा की मृत्यु 26 जनवरी 2026 को हुई थी

Odisha Viral News: ओडिशा से एक चौंकाने वाली खबर सामने आई है। क्योंझर जिले में एक आदिवासी व्यक्ति सोमवार (27 अप्रैल) को अपनी मृत बहन का कंकाल लेकर बैंक में उसके नाम पर जमा पैसे निकालने पहुंच गया। यह घटना क्योंझर जिले के पटना ब्लॉक में स्थित ओडिशा ग्रामीण बैंक की मालीपोसी ब्रांच में हुई। व्यक्ति की पहचान डियानाली गांव के जीतू मुंडा (50) के रूप में हुई है। उसकी बड़ी बहन कालरा मुंडा (56) की मृत्यु 26 जनवरी 2026 को हुई थी। उसके बैंक खाते से 19,300 रुपये निकालना चाहता था।

निरक्षर जीतू मुंडा ने पत्रकारों को बताया, "मैं कई बार बैंक गया और वहां के लोगों ने मुझे खाताधारक को लाने के लिए कहा ताकि उसके नाम पर जमा धन निकाला जा सके। हालांकि मैंने उन्हें बताया कि उसकी मृत्यु हो चुकी है फिर भी उन्होंने मेरी बात नहीं सुनी और उसे बैंक लाने पर अड़े रहे। इसलिए हताशा में आकर मैंने उसकी कब्र से उसकी मृत्यु के प्रमाण के रूप में उसका कंकाल निकाल लिया।"

सूचना मिलने पर बैंक पहुंचे पटना थाने के प्रभारी निरीक्षक (आईआईसी) किरण प्रसाद साहू ने कहा, "जीतू एक अनपढ़ आदिवासी है। उसे नहीं पता कि कानूनी वारिस या 'नामित' क्या होता है। बैंक अधिकारी उसे मृतक के खाते से पैसे निकालने की प्रक्रिया समझाने में विफल रहे हैं।"


हालांकि, घटना के बाद पुलिस ने जीतू मुंडा को आश्वासन दिया कि वे उसकी मृत बहन के बैंक खाते से पैसे निकलवाने में मदद करेंगे। बाद में पुलिस की मौजूदगी में कंकाल को दोबारा कब्रिस्तान में दफना दिया गया। आदिवासी आदमी चिलचिलाती धूप में तीन किलोमीटर पैदल चला। वह अपनी मरी हुई बहन के कंकाल को अपने कंधे पर उठाकर बैंक ले गया, ताकि उसके खाते से दो हजार रुपये निकाल सके।

बैंक के कर्मचारियों से था परेशान

जीतू मुंडा अपनी बहन कालरा की मौत दो महीने पहले हो गई थी। उसके पति और इकलौते बच्चे की मौत उससे पहले ही हो चुकी थी, इसलिए जीतू ही उसका अकेला बचा हुआ रिश्तेदार था। जब जीतू अपनी बहन के खाते में बचे 19,300 रुपये निकालने के लिए बैंक गया, तो बैंक मैनेजर ने मना कर दिया। उसने कहा कि या तो खाताधारक को खुद मौजूद होना चाहिए या फिर जीतू को कानूनी वारिस होने के दस्तावेज दिखाने होंगे।

अब जीतू के पास न तो मृत्यु प्रमाण पत्र था और न ही उत्तराधिकार के कागजात। इससे परेशान वह बेबस होकर घर लौट आया। फिर सोमवार को जीतू गांव के श्मशान घाट गया। उसने अपनी बहन के अवशेषों को खोदकर निकाला। फिर कंकाल को एक कपड़े में लपेट, और चिलचिलाती गर्मी में 3 किलोमीटर पैदल चलकर बैंक पहुंच गया।

जब जीतू बैंक पहुंचा, तो उसे देखकर वहां मौजूद लोग सन्न रह गए। कुछ लोग रो पड़े, तो कुछ गुस्से से आग-बबूला हो गए। गांव वालों ने बैंक पर घोर असंवेदनशीलता का आरोप लगाया। उन्होंने पूछा, "क्या एक गरीब आदमी के लिए अपना ही पैसा निकालना इतना मुश्किल है?"

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स्थानीय लोगों ने कहा कि बैंक सरपंच से पुष्टि कर सकता था या मौके पर जाकर जांच कर सकता था। लेकिन कागज़ी कार्रवाई इंसानियत पर भारी पड़ गई। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची, जीतू को शांत कराया। पुलिस ने कहा कि इस मामले को मानवीय आधार पर निपटाया जाएगा। बैंक से इस पर जवाब मांगा गया है।

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