पाकिस्तानी फेयरनेस क्रीम लगाने से 18 महिलाओं की किडनी पर संकट! भारत में बिक्री को लेकर उठे बड़े सवाल
कुछ ही दिनों में गोरा और चमकदार रंग देने का दावा करने वाली स्किन-व्हाइटनिंग क्रीम एक बार फिर चर्चा में हैं। हालिया घटनाक्रम के बाद ऐसे ब्यूटी प्रोडक्ट्स की सुरक्षा और गुणवत्ता पर सवाल उठने लगे हैं। विशेषज्ञ लोगों को बिना जांचे-परखे कॉस्मेटिक उत्पादों से बचने और सोच-समझकर स्किन केयर प्रोडक्ट चुनने की सलाह दे रहे हैं
मरकरी त्वचा में बनने वाले मेलानिन को कम कर देती है, जिससे रंग हल्का दिखाई देता है।
बाजार में ऐसी कई स्किन-व्हाइटनिंग क्रीम मौजूद हैं जो कुछ ही दिनों में गोरा और बेदाग रंग देने का दावा करती हैं। आकर्षक विज्ञापनों और सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव के कारण बड़ी संख्या में लोग इन प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल भी कर रहे हैं। लेकिन हर चमकदार पैकेज के पीछे सुरक्षित उत्पाद हो, यह जरूरी नहीं है। हाल ही में एक मामले ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या बिना जांचे-परखे ब्यूटी प्रोडक्ट्स पर आंख मूंदकर भरोसा करना सही है। इस घटना के बाद स्किन-केयर प्रोडक्ट्स की गुणवत्ता, उनमें इस्तेमाल होने वाले रसायनों और ऑनलाइन बिकने वाले कॉस्मेटिक सामान की निगरानी को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि त्वचा की देखभाल के लिए हमेशा प्रमाणित और भरोसेमंद उत्पादों का ही चुनाव करना चाहिए, क्योंकि सुंदर दिखने की जल्दबाजी कभी-कभी सेहत पर भारी पड़ सकती है।
तीन ब्यूटी प्रोडक्ट्स पर लगा तत्काल बैन
महाराष्ट्र FDA ने जांच के बाद तीन स्किन-केयर प्रोडक्ट्स की बिक्री, वितरण और इस्तेमाल पर तुरंत रोक लगा दी। इनमें Goree Beauty Cream, Face Fresh Gold (Beauty Cream और Beauty Serum) और Golden Star Beauty Cream शामिल हैं। जांच में इन्हें Not of Standard Quality (NSQ) घोषित किया गया।
लैब टेस्ट में मिला जहरीला सच
एफडीए की लैब जांच में इन क्रीमों में मरकरी (पारा) और लेड (सीसा) की मात्रा तय मानकों से कई गुना ज्यादा पाई गई। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे तत्व लंबे समय तक इस्तेमाल करने पर शरीर के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकते हैं।
चेंबूर से खुली पूरे मामले की कड़ी
इस कार्रवाई से कुछ दिन पहले मुंबई के चेंबूर में एक दुकानदार के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था। आरोप है कि उसने आयात प्रतिबंध के बावजूद कथित तौर पर पाकिस्तान में बनी Goree Beauty Cream का स्टॉक रखा और उसकी बिक्री की।
18 मरीज... और एक जैसी आदत
डॉक्टरों ने जब नागपुर में दो साल के दौरान किडनी की बीमारी से जूझ रही 18 महिलाओं के मामलों का अध्ययन किया तो एक समानता सामने आई। सभी महिलाएं लंबे समय से एक ही स्किन-व्हाइटनिंग क्रीम का इस्तेमाल कर रही थीं। इसी के बाद मामले की गहराई से जांच शुरू हुई।
752 गुना ज्यादा मरकरी होने का दावा
हेल्थ कंटेंट क्रिएटर चिराग बरजात्या ने सोशल मीडिया पर दावा किया कि महाराष्ट्र FDA की रिपोर्ट में Goree Beauty Cream में मरकरी की मात्रा कानूनी सीमा से 752 गुना अधिक पाई गई। उनका कहना है कि यही कारण गंभीर स्वास्थ्य जोखिम की वजह बन सकता है।
कैसे नुकसान पहुंचाती है मरकरी?
विशेषज्ञों के अनुसार, मरकरी त्वचा में बनने वाले मेलानिन को कम कर देती है, जिससे रंग हल्का दिखाई देता है। लेकिन यह असली निखार नहीं बल्कि रासायनिक असर होता है। धीरे-धीरे यह धातु त्वचा के जरिए शरीर में पहुंचकर खासकर किडनी में जमा होने लगती है और गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ा देती है।
ऑनलाइन बिक्री पर उठे बड़े सवाल
रिपोर्ट्स के मुताबिक यह क्रीम कई इंस्टाग्राम पेजों और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म Meesho पर भी उपलब्ध थी। इसके बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने सवाल उठाए कि प्रतिबंध और आयात नियमों के बावजूद ऐसा प्रोडक्ट भारतीय बाजार तक कैसे पहुंचा।
लोगों की बढ़ी चिंता, मीशो ने क्या कहा?
सोशल मीडिया पर कई यूजर्स ने लोगों से बिना जांचे-परखे स्किन-व्हाइटनिंग प्रोडक्ट्स से दूर रहने की अपील की। वहीं Meesho ने कहा कि मामले की जानकारी मिलने के बाद उसने इसकी जांच शुरू कर दी है और आवश्यक कार्रवाई की जा रही है।
विशेषज्ञों की सलाह
अगर आप या आपके परिवार का कोई सदस्य ऐसी स्किन-व्हाइटनिंग क्रीम इस्तेमाल करता है, तो उसकी गुणवत्ता और सामग्री की जांच जरूर करें। बिना लेबल वाले या संदिग्ध स्रोत से खरीदे गए कॉस्मेटिक प्रोडक्ट्स से बचना ही सबसे सुरक्षित विकल्प माना जा रहा है।