दफ्तर पहुंचे तो लगा था ताला! रातोंरात बंद हो गई पुणे की ये IT कंपनी और 700 एंप्लॉयी हो गए बेरोजगार
पुणे के आईटी सेक्टर से जुड़ा एक मामला इन दिनों चर्चा में है। एक टेक कंपनी के अचानक बंद होने के बाद सैकड़ों कर्मचारी मुश्किल में फंस गए हैं। कर्मचारियों का आरोप है कि उन्हें वेतन नहीं मिला और बिना किसी सूचना के कंपनी का कामकाज ठप हो गया। अब इस मामले की जांच पुलिस कर रही है
घटना सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों की तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं।
नौकरी की तलाश में लोग बड़ी उम्मीदों के साथ किसी कंपनी से जुड़ते हैं, लेकिन कभी-कभी हालात अचानक बदल जाते हैं। पुणे के एक आईटी हब से सामने आया ताजा मामला भी कुछ ऐसा ही है। यहां एक टेक कंपनी के अचानक बंद होने से सैकड़ों कर्मचारी मुश्किल में पड़ गए। कर्मचारियों का कहना है कि उन्हें कई महीनों से वेतन नहीं मिला और कंपनी की ओर से कोई स्पष्ट जानकारी भी नहीं दी गई।
मामला सामने आने के बाद पुलिस जांच में जुट गई है। इस घटना ने निजी क्षेत्र में नौकरी की सुरक्षा और कर्मचारियों के अधिकारों को लेकर नई चर्चा छेड़ दी है। अब सभी की नजर जांच के नतीजों और प्रभावित कर्मचारियों को मिलने वाली राहत पर टिकी हुई है।
नौकरी के सपने दिखाए, फिर शुरू हुई मुश्किलें
कर्मचारियों के मुताबिक, कंपनी ने 2025 के दौरान बड़े पैमाने पर भर्ती अभियान चलाए थे। फ्रेशर्स, सॉफ्टवेयर इंजीनियरों और इंटर्न्स को बेहतर करियर और आकर्षक अवसरों का भरोसा दिया गया था।
शुरुआती महीनों में वेतन और स्टाइपेंड समय पर मिलने से कर्मचारियों का भरोसा मजबूत हुआ, लेकिन धीरे-धीरे हालात बदलने लगे।
वेतन में देरी और बढ़ती चिंता
कई कर्मचारियों का दावा है कि इस साल की शुरुआत से वेतन समय पर मिलना बंद हो गया। प्रबंधन की ओर से बार-बार यह आश्वासन दिया गया कि आंतरिक वित्तीय और प्रशासनिक समस्याएं जल्द सुलझ जाएंगी और सभी भुगतान कर दिए जाएंगे।
हालांकि कर्मचारियों का आरोप है कि ये वादे सिर्फ आश्वासन बनकर रह गए और बकाया रकम लगातार बढ़ती चली गई।
— Forum For IT Employees - FITE (@FITEMaharashtra) June 3, 2026
जब ऑफिस पहुंचे तो मिला बड़ा झटका
स्थिति तब और गंभीर हो गई जब कई कर्मचारी रोज की तरह ऑफिस पहुंचे और पाया कि कंपनी का कार्यालय बंद पड़ा है। कर्मचारियों का कहना है कि कंपनी के वरिष्ठ अधिकारियों से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला।
कई लोगों को यह तक नहीं बताया गया कि उनकी नौकरी जारी है या खत्म हो चुकी है।
बाउंस हुए चेक, बढ़ी परेशानी
कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि बकाया भुगतान के लिए कंपनी द्वारा जारी किए गए कुछ चेक भी बाद में बाउंस हो गए। इससे पहले से आर्थिक संकट झेल रहे कर्मचारियों की मुश्किलें और बढ़ गईं।
कई लोगों का कहना है कि महीनों से वेतन नहीं मिलने के कारण वे पहले ही वित्तीय दबाव में थे।
सिक्योरिटी डिपॉजिट को लेकर भी सवाल
कुछ कर्मचारियों और इंटर्न्स ने आरोप लगाया कि कंपनी ने जॉइनिंग या लैपटॉप से जुड़ी प्रक्रिया के नाम पर 15 हजार रुपये तक का सिक्योरिटी डिपॉजिट लिया था।
आरोप है कि यह राशि भी वापस नहीं की गई। कुछ इंटर्न्स ने यह भी दावा किया कि उन्हें न तो वादा किया गया उपकरण मिला और न ही स्टाइपेंड।
पुलिस की एंट्री और CEO की गिरफ्तारी
मामले ने नया मोड़ तब लिया जब पुलिस ने कंपनी के CEO को कथित धोखाधड़ी और विश्वासघात के आरोपों में गिरफ्तार कर लिया। जांच के दायरे में कंपनी के ट्रेनिंग एंड डेवलपमेंट प्रमुख और एचआर मैनेजर भी शामिल हैं।
पुलिस अब कंपनी के वित्तीय रिकॉर्ड और कामकाज की जांच कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि कर्मचारियों के साथ वास्तव में क्या हुआ।
सोशल मीडिया पर भड़का गुस्सा
घटना सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों की तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। कई यूजर्स ने कर्मचारियों के साथ सहानुभूति जताई और कहा कि पहली नौकरी किसी भी युवा के करियर की सबसे महत्वपूर्ण शुरुआत होती है।
वहीं कुछ लोगों ने नौकरी तलाशने वालों को चेतावनी दी कि अगर कोई कंपनी सिक्योरिटी डिपॉजिट मांगती है, तो सावधानी बरतनी चाहिए।
कर्मचारियों के लिए बना बड़ा सबक
यह मामला सिर्फ एक कंपनी के बंद होने की कहानी नहीं है, बल्कि उन सैकड़ों युवाओं की चिंता भी दिखाता है जिन्होंने बेहतर भविष्य की उम्मीद में नौकरी शुरू की थी। अब जांच के नतीजों का इंतजार है और प्रभावित कर्मचारी अपने बकाया वेतन तथा जमा रकम वापस मिलने की उम्मीद लगाए बैठे हैं।