पुणे के लोहगढ़ किले में 18 जून को हुई 26 साल के केतन विशाल अग्रवाल की मौत को पहले एक हादसा माना गया था, लेकिन जांच आगे बढ़ते ही मामला पूरी तरह बदल गया। पुलिस को मिले डिजिटल सबूत, कॉल रिकॉर्ड और संदिग्ध गतिविधियों ने इस घटना को एक साजिश की ओर मोड़ दिया है। अब इसे महज दुर्घटना नहीं, बल्कि पहले से रची गई हत्या की योजना बताया जा रहा है। जांच में कई ऐसे संकेत मिले हैं, जिन्होंने पूरे मामले को और रहस्यमयी बना दिया है।
जैसे-जैसे पुलिस परत-दर-परत सच खंगाल रही है, वैसे-वैसे इस केस के नए पहलू सामने आ रहे हैं। इस घटना ने न सिर्फ परिवार को झकझोर दिया है, बल्कि पूरे शहर में सनसनी फैला दी है और लोग अब सच्चाई जानने को बेताब हैं।
बहन के एक सवाल से शुरू हुआ शक का खेल
न्यूज 18 के रिपोर्ट के मुताबिक, मामले का टर्निंग पॉइंट तब आया जब केतन के अंतिम संस्कार के चार दिन बाद उसकी मंगेतर सिया गोयल घर पहुंची। बातचीत के दौरान केतन की बहन को उसके जवाबों में कुछ अजीब लगा और यहीं से परिवार को शक हुआ, जिसने पुलिस जांच को नई दिशा दे दी।
2000 से ज्यादा कॉल्स, 238 घंटे की बातचीत ने खोला राज
पुलिस जांच में सिया गोयल और चेतन चौधरी के बीच 1 जनवरी से जून के बीच 2004 कॉल्स का खुलासा हुआ। दोनों के बीच करीब 238 घंटे तक लगातार बातचीत हुई, जिससे शक और गहरा गया।
घटना वाले दिन ‘गायब’ हुआ इंटरनेट और लोकेशन ट्रिक
18 जून को चेतन चौधरी का इंटरनेट सुबह 7 बजे से शाम 5:40 बजे तक बंद रहा। पुलिस को शक है कि लोकेशन छिपाने के लिए उसने अपना मोबाइल दुकान पर छोड़ दिया और कर्मचारी का फोन लेकर लोहगढ़ पहुंचा।
16-17 जून की ‘प्लानिंग मीटिंग’ और अगला दिन खौफनाक वारदात
जांच में सामने आया कि 16 और 17 जून को हत्या की पूरी योजना बनाई गई थी। दोनों ने कॉल और वीडियो कॉल के जरिए पूरी साजिश को अंजाम देने की तैयारी की।
लोहगढ़ फोर्ट पर कैसे दिया गया वारदात को अंजाम
18 जून को सिया केतन को किले पर लेकर पहुंची, जहां पहले से चेतन मौजूद था। एकांत जगह पर केतन को खड़ा कर उस पर हमला किया गया और उसे खाई में धक्का देकर मौत के घाट उतारने का आरोप है।
डिजिटल सबूत, कॉल रिकॉर्ड और लोकेशन ट्रेसिंग के आधार पर पुलिस का कहना है कि यह कोई दुर्घटना नहीं बल्कि पहले से रची गई हत्या की साजिश थी। फिलहाल दोनों आरोपियों से पूछताछ जारी है।