शेयर बाजार और म्यूचुअल फंड में निवेश करने वाला शायद ही कोई ऐसा व्यक्ति हो, जो अपने पैसे पर ज्यादा से ज्यादा रिटर्न नहीं चाहता। हर निवेशक की नजर बेहतर प्रदर्शन करने वाले फंड और ज्यादा कमाई के आंकड़ों पर रहती है। लेकिन क्या हर बार ज्यादा रिटर्न के पीछे भागना आपके लिए फायदेमंद होता है? Edelweiss Mutual Fund की MD और CEO Radhika Gupta ने इसी आदत को लेकर निवेशकों को सावधान किया है।
उनका कहना है कि कई बार निवेशक अपने तय वित्तीय लक्ष्य के करीब पहुंचने के बावजूद सिर्फ इसलिए बेचैन हो जाते हैं, क्योंकि किसी दूसरे फंड ने उनसे ज्यादा रिटर्न दे दिया। यही बेचैनी धीरे-धीरे निवेश की रणनीति बदलने और संपत्ति को नुकसान पहुंचाने का कारण बन सकती है।
शुरुआत होती है एक साफ लक्ष्य से
Radhika Gupta के मुताबिक ज्यादातर लोग निवेश की शुरुआत किसी स्पष्ट मकसद के साथ करते हैं। किसी को हर साल एक निश्चित रिटर्न चाहिए, कोई महंगाई को मात देना चाहता है, तो कोई रिटायरमेंट के लिए पर्याप्त पैसा जमा करना चाहता है। यानी शुरुआत में निवेशक के लिए सबसे जरूरी चीज होती है उसका अपना लक्ष्य। लेकिन समय के साथ तस्वीर बदलने लगती है। निवेशक अपने प्रदर्शन की तुलना दूसरों से करने लगता है और यहीं से परेशानी शुरू होती है।
जब 'मेरे लिए काफी' बदलकर 'दूसरे से ज्यादा' हो जाता है
Gupta ने समझाया कि अगर किसी निवेश का प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक है और निवेशक अपने लक्ष्य की ओर सही रास्ते पर बढ़ रहा है, तब भी एक नया और बेहतर प्रदर्शन करने वाला फंड उसकी सोच बदल सकता है। उसे लगने लगता है कि जब दूसरा फंड ज्यादा कमा रहा है, तो वह पीछे क्यों रहे।
यानी निवेश का शुरुआती सवाल “क्या मेरा लक्ष्य पूरा हो रहा है?” धीरे-धीरे बदलकर “किसने मुझसे ज्यादा कमाया?” बन जाता है।
यही बदलाव निवेशकों को बार-बार अपना पैसा एक फंड से दूसरे फंड में लगाने के लिए प्रेरित कर सकता है।
ज्यादा रिटर्न के पीछे भागना कितना जोखिम भरा?
Radhika Gupta के मुताबिक लगातार बेहतर प्रदर्शन करने वाले फंड की तलाश सिर्फ निवेशक की रणनीति ही नहीं बदलती, बल्कि इसका असर फंड मैनेजरों पर भी पड़ सकता है। जब निवेशक लगातार सबसे ज्यादा रिटर्न की उम्मीद करने लगते हैं, तो फंड मैनेजरों पर भी प्रदर्शन बढ़ाने का दबाव बनता है। इसके चलते पोर्टफोलियो में ज्यादा जोखिम लिया जा सकता है और हर कोई हाल के विजेता के पीछे भागने लगता है। ऐसे माहौल में बाजार का संतुलन भी प्रभावित हो सकता है।
असाधारण रिटर्न दिखे तो एक सवाल जरूर पूछें
Gupta की सबसे अहम बात यह है कि निवेशकों को सिर्फ कम रिटर्न देखकर ही सवाल नहीं पूछना चाहिए। अगर किसी निवेश में असाधारण रिटर्न दिखाई दे रहा है, तो उसके पीछे छिपे जोखिम को भी समझना जरूरी है। क्योंकि बाजार में बिना जोखिम के असाधारण कमाई मिलना आसान नहीं होता। ज्यादा रिटर्न के साथ ज्यादा उतार-चढ़ाव या ऐसा जोखिम जुड़ा हो सकता है, जो पहली नजर में दिखाई न दे।
हर साल का 'विनर' ढूंढना जरूरी नहीं
Gupta के मुताबिक सफल निवेश का मतलब यह नहीं है कि आप हर साल सबसे ज्यादा रिटर्न देने वाले फंड को खोजते रहें। ज्यादा महत्वपूर्ण यह है कि आपकी निवेश रणनीति आपके लंबे समय के लक्ष्य के अनुकूल हो और आप उसमें अनुशासन बनाए रखें।
अगर आपका निवेश आपके लक्ष्य को पूरा करने की दिशा में सही चल रहा है, तो सिर्फ इसलिए उसे बदलना जरूरी नहीं कि किसी दूसरे विकल्प ने हाल में बेहतर प्रदर्शन किया है।