Video: होम गार्ड भर्ती में साड़ी पहन नंगे पैर दौड़ने वाली कविता की कहानी! पति नहीं रहे तो बच्चों, ससुराल का बोझ उठाने का ये जज्बा इमोशनल कर देगा

रामगढ़ की 32 वर्षीय कविता कुमारी इन दिनों अपने हौसले से मिसाल बन गई हैं। विधवा होने के बावजूद दो बच्चों की जिम्मेदारी संभालते हुए वह रोज सुबह करीब 8 किलोमीटर दूर मैदान पहुंचती हैं। न ट्रैकसूट है, न रनिंग शूज, फिर भी साड़ी पहनकर दौड़ रही कविता का सपना एक सरकारी नौकरी और बच्चों का बेहतर भविष्य है

अपडेटेड Oct 07, 2026 पर 1:28 PM
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कविता शुरुआत में मैदान पर दूसरे अभ्यर्थियों को ट्रेनिंग करते हुए देखने पहुंची थीं।

रामगढ़ की सुबह इन दिनों सिर्फ सूरज की पहली किरणों से नहीं, बल्कि उन महिलाओं के हौसले से भी रोशन होती है, जो अपने सपनों के लिए मैदान में पसीना बहा रही हैं। इन्हीं में 32 वर्षीय कविता कुमारी की कहानी सबसे अलग नजर आती है। दुलमी प्रखंड के सोसो गांव की रहने वाली कविता विधवा हैं और दो बच्चों की मां भी। परिवार की जिम्मेदारियों के बीच उन्होंने अपने लिए एक ऐसा लक्ष्य चुना है, जो उनकी जिंदगी बदल सकता है। हर सुबह घर के जरूरी काम निपटाने के बाद कविता करीब 8 किलोमीटर दूर रामगढ़ के सिदो-कान्हू मैदान पहुंचती हैं। उनके पास महंगे रनिंग शूज, ट्रैकसूट या स्पोर्ट्स टी-शर्ट नहीं हैं।

ऐसे में साड़ी ही उनका अभ्यास का पहनावा बन गई है। तेज धूप, लंबा रास्ता और सीमित साधन भी उनके कदम नहीं रोक पाए। कविता की कोशिश सिर्फ नौकरी पाने तक सीमित नहीं है, बल्कि वह अपने बच्चों के लिए बेहतर और सुरक्षित भविष्य तैयार करना चाहती हैं।

पहले देखने पहुंचीं, फिर खुद दौड़ने लगीं


कविता शुरुआत में मैदान पर दूसरे अभ्यर्थियों को ट्रेनिंग करते हुए देखने पहुंची थीं। धीरे-धीरे उन्होंने खुद भी दौड़ लगाने का फैसला किया। शुरुआत में 1.6 किलोमीटर की दूरी पूरी करने में उन्हें करीब 8 मिनट लगते थे। अब वह यही दूरी लगभग 7 मिनट में पूरी कर लेती हैं।

भर्ती परीक्षा के दौरान साड़ी पहनकर दौड़ते हुए उनका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। खास बात यह है कि कविता को काफी समय तक पता ही नहीं था कि उनका वीडियो इंटरनेट पर चर्चा में आ चुका है।

दो बच्चों की मां, परिवार की जिम्मेदारी भी कंधों पर

कविता के पति का निधन हो चुका है और वह अपने दो बच्चों के साथ बुजुर्ग ससुरालवालों की जिम्मेदारी भी संभालती हैं। आर्थिक परेशानियों के बावजूद उन्होंने तैयारी का रास्ता नहीं छोड़ा। वह बताती हैं कि उनका मकसद सिर्फ नौकरी हासिल करना नहीं है। वह होमगार्ड बनकर अपने बच्चों की पढ़ाई और भविष्य को सुरक्षित करना चाहती हैं।

मैदान पर सिर्फ कविता नहीं, सैकड़ों संघर्ष की कहानियां

सिदो-कान्हू मैदान में हर सुबह का नजारा किसी कहानी से कम नहीं। ट्रैकसूट पहने युवतियों के साथ कई महिलाएं साड़ी और चप्पलों में दौड़ती दिखाई देती हैं। इनमें कई ऐसी हैं, जो घर का काम, बच्चों की देखभाल या खेतों का काम निपटाकर सीधे मैदान पहुंचती हैं।

बूढ़ा-खुखरा गांव की 30 वर्षीय सुनीता कुमारी भी साड़ी में दौड़ती हैं। उनका कहना है कि गरीब किसान परिवार से होने के कारण परिवार ट्रैकसूट और जूते नहीं खरीद सका, लेकिन इससे उनका हौसला कम नहीं हुआ।

किसी के लिए नौकरी, तो किसी के लिए बच्चों का भविष्य

गोला की मोनिका कुमारी ने 1.6 किलोमीटर की दौड़ करीब 6 मिनट 4 सेकंड में पूरी की। वहीं कई अन्य महिला अभ्यर्थियों के लिए यह भर्ती सिर्फ रोजगार का मौका नहीं, बल्कि परिवार की आर्थिक स्थिति बदलने की उम्मीद है। फिटनेस कोच सिकंदर पांडेय और एक मार्शल आर्ट्स प्रशिक्षक अभ्यर्थियों को मुफ्त प्रशिक्षण दे रहे हैं। 2 अक्टूबर को आयोजित एक बड़ी दौड़ में करीब 2,500 अभ्यर्थियों ने हिस्सा लिया।

284 पदों ने जगाई नई उम्मीद

रामगढ़ में 284 होमगार्ड पदों के लिए भर्ती प्रक्रिया 24 अक्टूबर से 5 नवंबर तक प्रस्तावित है। इसमें 50 प्रतिशत पद महिलाओं के लिए और अतिरिक्त 5 प्रतिशत सीटें विधवा व तलाकशुदा महिलाओं के लिए आरक्षित हैं। भर्ती में 1.6 किलोमीटर की दौड़ के अलावा लंबाई, सीना और अन्य शारीरिक परीक्षण होंगे। प्रशासन ने पारदर्शी तरीके से योग्यता और फिटनेस के आधार पर चयन की तैयारी की है।

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