परिवार, समाज के दबाव में 1.5 करोड़ का फ्लैट खरीद EMI गुलामी में फंसा ये शख्स! दर्द सुन छिड़ी Rent vs Buy की बहस

Bengaluru Luxury Apartments problems: बेंगलुरु के एक तकनीकी कर्मचारी ने 1.5 करोड़ रुपये का फ्लैट खरीदा है। अब उसने बताया कि उसके साथ लग्जरी के नाम पर बड़ा धोखा किया गया है। करोड़ों के फ्लैट की दीवारों से पानी टपकने, बिजली कटौती और सोसाइटी के अंदर पानी के टैंकरों के लिए रोजाना होने वाले झगड़ों जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है।

अपडेटेड May 29, 2026 पर 1:19 PM
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टेक प्रोफेशनल ने बताया कि बिल्डर्स ने फ्लैट बेचते समय जिस लग्जरी लाइफस्टाइल का वादा किया था, उसकी असलियत पूरी तरह से अलग और परेशान कर देने वाली निकली।

Bengaluru Luxury Apartments problems: मेट्रो सिटीज में काम करने वाले हर वर्किंग प्रोफेशनल का सपना एक अदद फ्लैट जरूर होता है। पर बढ़ती महंगाई और भारी भरकम ईएमआई का बोझ ऐसा है कि कभी कभी ये सपना पूरा होने के बाद बुरा सपना भी बन जाता है। ऐसे में हैवी EMI चुकाने और महंगे मेंटेनेंस चार्ज देने के बाद भी बुनियादी सुविधाओं का अभाव घर खरीदारों को निराश कर रहा है। हाल ही में बेंगलुरु के एक टेक प्रोफेशनल ने 1.5 करोड़ रुपये का फ्लैट खरीदने के बाद अपना दर्दनाक अनुभव सोशल मीडिया पर साझा किया है। परिवार और समाज के दबाव में आकर जीवनभर के लिए ईएमआई की गुलामी में फंसे इस शख्स का केस देख इंटरनेट पर एक बार फिर Rent vs Buy (किराए पर रहें या घर खरीदें) की बहस छिड़ गई है। आइए जानते हैं क्या है यह पूरा मामला।

कॉर्पोरेट जगत के पेशेवरों के बीच लोकप्रिय प्लेटफॉर्म ग्रेपवाइन पर एक डिजिटल पेमेंट कंपनी के एक कर्मचारी ने अपनी आपबीती साझा की है। इस टेक प्रोफेशनल ने बताया कि भारी-भरकम रकम चुकाने के बावजूद वह आज भी अपने ही घर में बुनियादी समस्याओं से जूझ रहा है। उसने अपनी पोस्ट में लिखा कि मैंने 1.5 करोड़ रुपये में एक फ्लैट खरीदा। इसके बावजूद मुझे हर महीने 8,000 रुपये का भारी मेंटेनेंस चार्ज देना पड़ रहा है।

बिल्डर ने वादा किया लग्जरी का, हकीकत में मिलीं ये समस्याएं


टेक प्रोफेशनल ने बताया कि बिल्डर्स ने फ्लैट बेचते समय जिस लग्जरी लाइफस्टाइल का वादा किया था, उसकी असलियत पूरी तरह से अलग और निराशाजनक निकली। लग्जरी फ्लैट बताकर उसे करोड़ों में जो घर बेचा गया उसकी दीवारें लीक हो रही हैं। यहां रहने वाले लोग लगातार ट्रैफिक के शोर और बार-बार होने वाली पावर कट से परेशान हैं।

टेक प्रोफेशनल के मुताबिक भले ही सोसाइटी का मेन एंट्रेंस एक बेहद प्रीमियम रेजिडेंशियल कॉम्प्लेक्स का अहसास कराता है लेकिन अंदर की हकीकत यह है कि निवासियों को रोज़ाना पानी के टैंकरों के लिए लड़ाई लड़नी पड़ती है। महीने की मोटी ईएमआई और 8000 रुपये के मेंटेनेंस चार्ज के अलावा, इस सोसाइटी में रहने के लिए कई तरह के और हिडेन कॉस्ट भी वसूले जा रहे हैं। पोस्ट के मुताबिक यहां लोगों को पार्किंग स्पेस के लिए अलग चार्ज, क्लबहाउस एक्सेस, जनरेटर का इस्तेमाल, सोसाइटी में शिफ्ट होने की मंजूरी, यहां तक कि पालतू जानवरों के लिए भी अलग से चार्ज देना पड़ता है।

सोशल मीडिया पर आ रहे खूब रिएक्शन

इस वायरल पोस्ट ने बड़े शहरों की गेटेड कम्युनिटीज में रहने वाले अन्य लोगों को भी अपनी आपबीती साझा करने पर मजबूर कर दिया है। एक यूजर ने सलाह देते हुए कमेंट किया कि सिर्फ प्रेस्टिज जैसे कुछ गिने-चुने प्रीमियम बिल्डर्स ही भरोसे के लायक हैं। दूसरों के मामले में बेहतर होगा कि आप थोड़ा अधिक भुगतान कर दें और सब कुछ अच्छी तरह से जांचने के बाद ही सेकंड-हैंड (रिसेल) प्रॉपर्टी खरीदें। एक दूसरे शख्स ने ने बेंगलुरु के रियल्टी मार्केट की तुलना पुणे से करते हुए लिखा कि पार्किंग, क्लबहाउस और जनरेटर के लिए अलग से शुल्क!!! इस मामले में तो पुणे कहीं बेहतर है।

बेंगलुरु के हाउसिंग मार्केट से लगातार बढ़ रही निराशा

यह पहली बार नहीं है जब बेंगलुरु में घर की कीमतों और खराब इंफ्रास्ट्रक्चर को लेकर गुस्सा फूटा है। हाल के महीनों में कई किरायेदारों और मकान मालिकों ने ऑनलाइन आकर बढ़ते किराए, पानी की भारी किल्लत और ऊंचे दाम चुकाने के बावजूद खराब बुनियादी ढांचे की शिकायतें की हैं। लोगों का कहना है कि बिल्डर्स विज्ञापन में तो आलीशान जिंदगी दिखाते हैं, लेकिन पजेशन मिलने के बाद बुनियादी सुविधाएं देने में भी फेल हो जाते हैं। इस बहस ने कुछ समय पहले बेंगलुरु के ही इंदिरा नगर के पास एक 3BHK अपार्टमेंट की यादें ताजा कर दीं, जिसे हर महीने 1.1 लाख रुपये के किराए पर लिस्ट किया गया था। उस पोस्ट ने भी शहर में रहने की बढ़ती लागत और हाउसिंग प्रेशर को लेकर इंटरनेट पर भारी आक्रोश और तीखी प्रतिक्रियाएं पैदा की थीं।

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