अलास्का, नॉर्वे जैसे देशों में दिखने वाला दुर्लभ सौर तूफान Aurora भारत में कहां दिखेगा? नोट करें जगह का नाम

सूरज से निकल रही तेज़ ऊर्जा और चार्ज्ड कणों की लहर धरती की ओर बढ़ रही है, जिससे सोलर स्टॉर्म का खतरा या असर देखा जा रहा है। इससे आसमान में रंगीन रोशनी यानी ऑरोरा बनने की संभावना बढ़ जाती है। खगोल प्रेमी जानना चाहते हैं कि क्या यह नजारा भारत में भी दिख सकता है

अपडेटेड Jun 08, 2026 पर 3:00 PM
कुल मिलाकर, भारत में ऑरोरा देखना एक बेहद दुर्लभ घटना है।

सूरज से निकलने वाली तेज ऊर्जा और चार्ज्ड कणों की एक बड़ी लहर इस समय पृथ्वी की ओर बढ़ रही है। इसे सोलर स्टॉर्म कहा जाता है। जब ऐसे कण पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र से टकराते हैं, तो आसमान में रंग-बिरंगी रोशनी दिखाई देती है, जिसे ऑरोरा कहा जाता है। यह नजारा आमतौर पर बेहद खूबसूरत और दुर्लभ होता है, जिसे देखने के लिए लोग खास जगहों पर जाते हैं। इस बार इस सोलर गतिविधि को लेकर खगोल प्रेमियों में उत्साह बढ़ गया है कि क्या इसका असर इतना ज्यादा हो सकता है कि ऑरोरा भारत जैसे देशों में भी दिखाई दे। हालांकि यह घटना सामान्य रूप से ध्रुवीय क्षेत्रों तक ही सीमित रहती है, फिर भी इसकी ताकत को लेकर वैज्ञानिक लगातार नजर बनाए हुए हैं और लोग इसके असर को लेकर उत्सुक हैं।

क्या होते हैं ऑरोरा और कैसे बनते हैं ये रंगीन नजारे?

ऑरोरा तब बनते हैं जब सूरज से आए कण पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र से टकराते हैं। इससे आसमान में हरे, नीले और गुलाबी रंग की चमकदार रोशनी दिखाई देती है। आमतौर पर ये दृश्य सिर्फ ध्रुवीय क्षेत्रों जैसे आर्कटिक और अंटार्कटिका के पास ही दिखते हैं।


किन देशों में दिखते हैं ये शानदार नजारे?

नॉर्मल हालात में ऑरोरा केवल बेहद ठंडे और उत्तरी देशों में दिखाई देते हैं। जैसे नॉर्वे, आइसलैंड, कनाडा और अलास्का। लेकिन जब सोलर स्टॉर्म बहुत तेज होता है, तो यह रोशनी थोड़ा और दक्षिण तक फैल सकती है।

क्या भारत में भी दिख सकता है ऑरोरा?

भारत में इसे देखना बेहद मुश्किल माना जाता है। वैज्ञानिकों के अनुसार सिर्फ बहुत ही असामान्य और शक्तिशाली सोलर स्टॉर्म के दौरान ही इसका हल्का असर भारत के कुछ उत्तरी हिस्सों तक पहुंच सकता है।

लद्दाख बन सकता है सबसे संभावित जगह

भारत में अगर कहीं बहुत हल्की ऑरोरा गतिविधि दिखाई दे भी, तो वह सिर्फ लद्दाख के लेह और हनले जैसे ऊंचाई वाले इलाकों में ही संभव है। साफ आसमान और ऊंचाई इसे देखने की थोड़ी संभावना पैदा करते हैं।

कश्मीर में भी उम्मीद बेहद कम

जम्मू-कश्मीर में भी ऑरोरा देखने की संभावना बहुत कम मानी जा रही है। इसके लिए बेहद शक्तिशाली भू-चुंबकीय तूफान की जरूरत होगी, जो आम तौर पर नहीं होता।

कितनी तेज होनी चाहिए सोलर स्टॉर्म?

वैज्ञानिकों के मुताबिक, भारत में ऑरोरा देखने के लिए सोलर स्टॉर्म को बेहद उच्च स्तर तक पहुंचना होगा। यह सामान्य या मध्यम तूफानों से कहीं ज्यादा शक्तिशाली होना चाहिए।

अगर दिख भी गया तो कैसा होगा नजारा?

अगर कभी ऐसा दुर्लभ नजारा दिखता भी है, तो वह बहुत हल्का होगा और क्षितिज के बिल्कुल पास दिखाई देगा। इसे नंगी आंखों से देख पाना भी काफी मुश्किल हो सकता है।

दुनिया के बाकी हिस्सों में दिखेगा शानदार शो

जहां भारत में इसकी संभावना कम है, वहीं यूरोप, अमेरिका और अन्य उत्तरी देशों में इस सोलर स्टॉर्म के दौरान आसमान रंगीन रोशनी से जगमगा सकता है।

भारत के लिए यह कितना दुर्लभ है?

कुल मिलाकर, भारत में ऑरोरा देखना एक बेहद दुर्लभ घटना है। यह तभी संभव है जब सोलर स्टॉर्म असाधारण रूप से शक्तिशाली हो और पूरी पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र पर बड़ा असर डाले।

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