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Solar Storm Ladakh India: इस वजह से सुर्ख हुआ लद्दाख के आसमान का रंग, जानें क्यों खतरे का संकेत बता रहे वैज्ञानिक?

Solar Storm Ladakh India: हाल में लद्दाख में सूर्यास्त के बाद आसमान के रंग ने खगोल वैज्ञानिकों से लेकर सोशल मीडिया तक सबका ध्यान खींचा। यहां सूरज तो ढला, लेकिन उसके बाद रात का अंधेरा नहीं छाया। यहां आसमान सुर्ख हो गया और ऐसा ही बना रहा। आइए जानें इसकी वजह क्या है

MoneyControl Newsअपडेटेड Jan 29, 2026 पर 7:41 PM
Solar Storm Ladakh India: इस वजह से सुर्ख हुआ लद्दाख के आसमान का रंग, जानें क्यों खतरे का संकेत बता रहे वैज्ञानिक?
लद्दाख के हानले में 19 और 20 जनवरी की रात आसमान का रंग सुर्ख हो गया।

Solar Storm Ladakh India: लद्दाख के हानले में हाल में एक ऐसा नजारा दिखा है, जिसने खगोल वैज्ञानिकों के होश उड़ा दिए हैं। यहां 19 और 20 जनवरी की रात आसमान का रंग सुर्ख हो गया। रात के आसमान का आग जैसा दहकता लाल होना जहां सोशल मीडिया पर लोगों के बीच कौतुहल का सबब बना, वहीं खगोल वैज्ञानिक इससे चिंतित नजर आ रहे हैं। यह न तो धुआं था, न प्रदूषण, और न ही कोई आम सूर्यास्त। बल्कि, यह एक दुर्लभ लाल ऑरोरा था जिसने हिमालय के आसमान को रोशन कर दिया। ऐसा लग रहा था जैसे कुदरत ने हिमालय की वादियों को लाल रंग से पेंट कर दिया हो। जहां आम लोगों को कुदरत का करिश्मा लग रहा है, वहीं विज्ञान में इसका तर्कसंगत जबाव है, जो सतर्क होने का संकेत दे रहा है।

कहां दिखा लाल ऑरोरा ?

यह ऑरोरा उत्तरी भारत के लद्दाख के हानले में दिखा। हानले डार्क स्काई रिजर्व में आसमान बिलकुल साफ रहता है। इसकी ऊंचाई और रोशनी के कम प्रदूषण से ऑरोरा का नजारा और भी शानदार नजर आया। दूर-दराज की घाटियों और चोटियों पर आसमान चमक रहा था। यह जगह इस दुर्लभ खगोलीय घटना के लिए एक बेहतरीन मंच बनकर उभरी।

क्यों लाल हुआ हानले का आसमान?

18 जनवरी को सूरज पर एक बहुत बड़ा धमाका हुआ, जिसे X-class सोलर फ्लेयर कहा जाता है। इसके बाद सूरज से गैस और चुंबकीय ऊर्जा का बेहद बड़ा बादल निकला जिसे कोरोनल मास इजेक्शन (CME) कहते हैं। यह बादल 1,700 किमी प्रति सेकंड की रफ्तार से धरती की ओर आया और सिर्फ 25 घंटे में हमारे वातावरण तक पहुंच गया। जब यह सौर कण पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र से टकराए, तो एक जी4 स्तर का शक्तिशाली जियोमैग्नेटिक तूफान बना। यह 2003 के बाद सबसे बड़ी घटना थी। इसी तूफान के कारण हानले में लाल रोशनी नजर आई।

हरे की जगह लाल क्यों?

ऑरोरा आमतौर पर ध्रुवीय अक्षांशों पर हरे रंग के दिखते हैं, लाल नहीं। लाल रोशनी तब बनती है जब ज्श्सदा ऊंचाई पर ऑक्सीजन के एटम सूरज के कणों से रिएक्ट करते हैं। तेज सौर तूफानों ने सूरज से चार्ज वाले कणों को पृथ्वी की ओर भेजा। ये कण आर्कटिक सर्कल में पृथ्वी के मैग्नेटिक फील्ड से टकराए। इसका नतीजा एक आग जैसी लाल चमक थी जो लद्दाख के अक्षांश पर दिखाई दी।

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