कभी बेंगलुरु की सड़कों पर डिलीवरी करते नजर आने वाले कौशिक खरवी आज अपना सीफूड कारोबार चला रहे हैं। करीब नौ साल पहले वह Swiggy के डिलीवरी एजेंट थे, लेकिन उस दौर की सबसे बड़ी चुनौती कमाई या मेहनत नहीं थी। उन्हें इस बात का डर रहता था कि अगर कोई दोस्त या परिचित उन्हें डिलीवरी करते देख लेगा, तो उसके मन में उनके लिए क्या धारणा बनेगी। अब अपने पुराने दिनों को याद करते हुए कौशिक ने सोशल मीडिया पर अपनी कहानी साझा की है। उनकी यह यात्रा बताती है कि मुश्किल समय में किया गया कोई भी काम आगे चलकर जिंदगी बदलने की शुरुआत बन सकता है।
डिलीवरी करते वक्त दोस्तों से छिपते थे
कौशिक ने बताया कि वह कई बार डिलीवरी करते समय अपने दोस्तों से छिप जाया करते थे। उन्हें डर रहता था कि अगर कोई परिचित उन्हें डिलीवरी करते देख लेगा, तो वह उनके बारे में क्या सोचेगा। उनके मुताबिक, मेहनत करने में उन्हें कोई झिझक नहीं थी, लेकिन ‘डिलीवरी बॉय’ के तौर पर पहचाने जाने का डर जरूर था।
पुरानी तस्वीरों ने फिर याद दिलाया संघर्ष
कौशिक ने अपनी पुरानी यादों को Google Photos के जरिए दोबारा देखा। इसके बाद उन्होंने अपनी जिंदगी के बदलाव को एक वीडियो में साझा किया। वीडियो में उनके पुराने संघर्ष से लेकर आज के मुकाम तक का सफर नजर आता है। कभी वह रेस्टोरेंट के बाहर खाना लेने के लिए इंतजार करते थे, तो आज खुद अपने कारोबार को आगे बढ़ा रहे हैं।
डिलीवरी से अपना सीफूड बिजनेस तक
आज कौशिक खुद को सीफूड कंसल्टेंट बताते हैं। वह बेंगलुरु में मंगलुरियन सीफूड से जुड़ा अपना कारोबार चला रहे हैं। उनके Instagram प्रोफाइल के अनुसार, उनका बिजनेस फूड ट्रक और द कोंकण किचन के रूप में काम करता है। यानी जिस काम को लेकर कभी उन्हें लोगों से छिपना पड़ता था, उसी दौर ने उन्हें आगे बढ़ने का मौका दिया और आज वो अपने दम पर कारोबार खड़ा कर चुके हैं।
मुश्किल समय में Swiggy ने दिया सहारा
कौशिक ने अपनी पोस्ट में Swiggy को भी धन्यवाद दिया। उन्होंने माना कि मुश्किल दौर में कंपनी ने उन्हें काम का मौका दिया। उनके लिए ये नौकरी सिर्फ कमाई का जरिया नहीं थी, बल्कि आगे की जिंदगी की नींव भी बनी।
सोशल मीडिया यूजर्स ने जमकर सराहा
कौशिक की कहानी सामने आने के बाद लोगों ने उनकी जमकर तारीफ की। कई यूजर्स ने कहा कि कोई भी काम छोटा नहीं होता और हर पेशे का सम्मान किया जाना चाहिए।
एक यूजर ने लिखा कि अगर समाज सभी कामों को बराबर सम्मान दे, तो बच्चों पर करियर को लेकर बना दबाव भी कम हो सकता है। वहीं एक अन्य यूजर ने उनकी कहानी को एक लाइन में बताया “कभी खाना पहुंचाते थे, आज अपना सपना लोगों को परोस रहे हैं।”