Archaeological Find: 26 लाख साल पुरानी गुत्थी, क्या मिला इंसान का खोया हुआ रिश्तेदार?

Archaeological Find: इथियोपिया में मिली नई खोज ने मानव विकास की कहानी को उलझा दिया है। यहां से मिले लाखों साल पुराने जीवाश्म दांतों ने संकेत दिए हैं कि हमारे पूर्वजों में कोई अज्ञात शाखा भी मौजूद थी, जिसके बारे में विज्ञान अब तक अनजान था। यह खोज मानव इतिहास को नए सिरे से समझने का मौका देती है

अपडेटेड Aug 24, 2025 पर 9:55 AM
Archaeological Find: नेचर जर्नल में प्रकाशित ये अध्ययन बताता है कि मानव विकास सीधी रेखा में नहीं है

इथियोपिया के अफार इलाके में पुरातत्वविदों की एक बड़ी खोज ने मानव विकास के इतिहास में नया मोड़ ला दिया है। यहां से मिले 26 से 28 लाख साल पुराने जीवाश्म दांतों ने संकेत दिए हैं कि उस दौर में इंसानों की कोई ऐसी प्रजाति भी रही होगी, जिसके बारे में विज्ञान अब तक अनजान था। कुल 13 दांत मिले हैं, जिनमें से कुछ शुरुआती मानव वंशों ऑस्ट्रेलोपिथेकस और होमो से मेल खाते हैं, जबकि कुछ पूरी तरह अलग हैं। ये खोज बताती है कि मानव विकास एक सीधी रेखा में नहीं, बल्कि कई समानांतर शाखाओं में हुआ।

इस नई प्रजाति का रहस्य वैज्ञानिकों के लिए रोचक चुनौती बन गया है और शोधकर्ता अब इन दांतों की जांच कर रहे हैं ताकि ये समझा जा सके कि ये समूह कहां और कैसे रहते थे और आपस में उनका संबंध कैसा था।

पूर्वी अफ्रीका में चार मानव वंश


अध्ययन के अनुसार, 25 से 30 लाख साल पहले पूर्वी अफ्रीका में कम से कम चार अलग-अलग मानव वंश रहते थे होमो, ऑस्ट्रेलोपिथेकस गढ़ी, लेडी-गेरारू क्षेत्र से मिला नया ऑस्ट्रेलोपिथेकस और पैरेन्थ्रोपस। इस खोज ने मानव विकास की प्रक्रिया को लेकर वैज्ञानिकों की सोच बदल दी है। अब माना जा रहा है कि मानव विकास की कई समानांतर शाखाएं हो सकती थीं।

ज्वालामुखी की परतों के नीचे मिले दांत

ये जीवाश्म ज्वालामुखीय परतों में दबे हुए थे, जिनकी जांच से उनकी उम्र का पता चला। लगभग 26.3 लाख साल पुराने 10 दांत ऑस्ट्रेलोपिथेकस  के हैं, जबकि एक दांत करीब 27.8 लाख साल पुराना है। एक ही स्थान पर अलग-अलग प्रजातियों के दांत मिलना कई नए सवाल खड़े करता है।

वैज्ञानिकों की जांच और नए सवाल

अब शोधकर्ता ये पता लगाने के लिए दांतों के इनेमल की रासायनिक जांच करेंगे कि ये प्रजातियां क्या खाती थीं। इससे ये भी स्पष्ट होगा कि क्या ये समूह एक ही इलाके में शांति से रहते थे या भोजन के लिए प्रतिस्पर्धा करते थे। आमतौर पर चिंपैंजी और गोरिल्ला अलग क्षेत्रों में पाए जाते हैं, लेकिन इन प्रजातियों का एक साथ होना मानव इतिहास की जटिलता को दर्शाता है।

मानव विकास पर बड़ा संकेत

नेचर जर्नल में प्रकाशित ये अध्ययन बताता है कि मानव विकास सीधी रेखा में नहीं, बल्कि जटिल शाखाओं के रूप में हुआ। इस नई प्रजाति की खोज से स्पष्ट है कि हमारे पूर्वजों का इतिहास अब तक की सोच से कहीं अधिक विविध और रहस्यमय था।

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