Viral Video: 12 साल से खड़े हैं ये बाबा! जानिए कौन हैं दुलाल गिरी जी महाराज

Viral Video: सोशल मीडिया पर इन दिनों दुलाल गिरी जी महाराज की तस्वीरें और वीडियो तेजी से वायरल हो रहे हैं। उनकी अनोखी तपस्या ने लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। कोई इसे अटूट आस्था का प्रतीक बता रहा है, तो कोई इसे लेकर सवाल उठा रहा है। जानिए आखिर कौन हैं यह साधु

अपडेटेड Jun 18, 2026 पर 8:59 AM
Viral Video: सोशल मीडिया पर उनके बारे में कई तरह के दावे किए जा रहे हैं।

सोशल मीडिया पर इन दिनों एक साधु का नाम अचानक चर्चा का केंद्र बन गया है। उनकी कुछ तस्वीरें और वीडियो तेजी से वायरल हो रहे हैं, जिन्हें देखकर लोग हैरानी भी जता रहे हैं और अपनी-अपनी राय भी दे रहे हैं। दावा किया जा रहा है कि साधु ने वर्षों पहले एक ऐसा धार्मिक संकल्प लिया था, जिसे निभाना आम इंसान के लिए बेहद कठिन माना जाता है। वायरल तस्वीरों में उनकी शारीरिक स्थिति और तपस्या का तरीका लोगों का ध्यान खींच रहा है। यही वजह है कि इंटरनेट पर उनके बारे में जानने की उत्सुकता बढ़ गई है।

कोई इसे अटूट श्रद्धा और समर्पण का उदाहरण बता रहा है, तो कुछ लोग इसके स्वास्थ्य संबंधी पहलुओं पर सवाल उठा रहे हैं। आस्था, तपस्या और त्याग से जुड़ी इस कहानी ने सोशल मीडिया पर नई बहस छेड़ दी है। आइए जानते हैं आखिर कौन हैं दुलाल गिरी जी महाराज और क्यों उनकी चर्चा हर तरफ हो रही है।

कौन हैं दुलाल गिरी जी महाराज?


रिपोर्ट्स के अनुसार, दुलाल गिरी जी महाराज ने कम उम्र में ही विश्वविद्यालय की पढ़ाई छोड़ दी थी और अपना जीवन भगवान शिव की भक्ति को समर्पित कर दिया। वे साधु जीवन अपनाकर कठिन तपस्या के मार्ग पर चल पड़े।

वायरल वीडियो में वे खुले बदन, लंबी जटाओं और कमर पर भगवा वस्त्र धारण किए दिखाई देते हैं, जो पारंपरिक हिंदू साधुओं की पहचान माने जाते हैं।

तपस्या की अवधि को लेकर अलग-अलग दावे

सोशल मीडिया पर उनके बारे में कई तरह के दावे किए जा रहे हैं। कुछ लोगों का कहना है कि वे पिछले 5 वर्षों से लगातार खड़े हैं, जबकि कुछ रिपोर्ट्स में यह अवधि 12 साल बताई गई है। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।

पैरों की हालत देखकर लोग हुए हैरान

दुलाल गिरी जी महाराज के वीडियो में उनके पैरों में काफी सूजन दिखाई देती है। पैरों से लेकर जांघों तक त्वचा का रंग भी काफी गहरा नजर आता है।

कुछ वीडियो में उन्हें लकड़ी के विशेष सहारे के साथ खड़े देखा गया है, जबकि मंदिर के सेवक उनके पैरों पर मरहम लगाते दिखाई देते हैं।

खड़े-खड़े ही सोते हैं बाबा!

ऑनलाइन साझा की गई जानकारी के मुताबिक, महाराज न तो बैठते हैं और न ही सामान्य तरीके से लेटते हैं। दावा किया जाता है कि वे विशेष हार्नेस या सहारे की मदद से खड़े-खड़े ही विश्राम करते हैं। यही बात लोगों के बीच सबसे ज्यादा चर्चा का विषय बनी हुई है।

सोशल मीडिया पर बंटी राय

दुलाल गिरी जी महाराज की तपस्या को लेकर इंटरनेट पर लोगों की राय दो हिस्सों में बंटी हुई है।

कुछ लोग इसे अद्भुत आत्मसंयम और अटूट श्रद्धा का प्रतीक मान रहे हैं। वहीं कई लोग इसे शरीर को नुकसान पहुंचाने वाली अत्यधिक धार्मिक कट्टरता बता रहे हैं।

कुछ यूजर्स ने उनकी शारीरिक स्थिति को देखकर तत्काल चिकित्सा सहायता की जरूरत भी जताई।

क्या है 'खड़ा तपस्या' की परंपरा?

कई लोगों ने इस साधना को 'खड़ा तपस्या' या 'खड़ा साधना' बताया है। यह तप का एक प्राचीन रूप है, जिसमें साधक लंबे समय तक खड़े रहकर ध्यान, जप और आध्यात्मिक अभ्यास करता है।

हिंदू, बौद्ध और जैन परंपराओं में तपस्या और आत्मसंयम की ऐसी कई कठोर विधियों का उल्लेख मिलता है। संस्कृत का शब्द 'तप' या 'तपस्या' त्याग, अनुशासन और आध्यात्मिक साधना का प्रतीक माना जाता है।

भगवान शिव से जुड़ी है यह साधना

हिंदू मान्यताओं में भगवान शिव को महान योगी और तपस्वी माना जाता है। इसलिए शिव भक्तों के बीच कठोर व्रत और तपस्या की परंपरा लंबे समय से चली आ रही है।

महाभारत और रामायण जैसे ग्रंथों में भी कठिन तप के जरिए वरदान, ज्ञान और दिव्य कृपा प्राप्त करने की कथाएं मिलती हैं।

अमर भारती से होने लगी तुलना

दुलाल गिरी जी महाराज की चर्चा के बीच कई लोगों ने प्रसिद्ध साधु अमर भारती का भी जिक्र किया। अमर भारती के बारे में कहा जाता है कि उन्होंने 1973 से अपना एक हाथ लगातार ऊपर उठाकर रखा है।

लंबे समय तक हाथ न हिलाने के कारण उनके हाथ की मांसपेशियां लगभग निष्क्रिय हो गई थीं। अब लोग दुलाल गिरी जी महाराज की तपस्या की तुलना उनसे कर रहे हैं।

डॉक्टरों जैसी चिंताएं भी सामने आईं

सोशल मीडिया पर कई लोगों ने उनके पैरों की सूजन को लेकर स्वास्थ्य संबंधी आशंकाएं जताईं।

कुछ लोगों का मानना है कि यह लिम्फेडेमा (Lymphedema) जैसी समस्या हो सकती है, जिसमें शरीर में द्रव जमा होने लगता है। वहीं कुछ यूजर्स ने तस्वीरों में दिखाई दे रहे कालेपन को गंभीर रक्त संचार संबंधी समस्या या गैंग्रीन जैसी स्थिति से जोड़कर देखा।

हालांकि इन दावों की किसी चिकित्सकीय रिपोर्ट से पुष्टि नहीं हुई है।

आस्था या आत्मपीड़ा

जहां समर्थक इसे सदियों पुरानी आध्यात्मिक परंपरा और व्यक्तिगत आस्था का विषय मानते हैं, वहीं आलोचकों का कहना है कि ऐसी कठोर तपस्याओं का महिमामंडन समाज में गलत संदेश दे सकता है।

फिलहाल दुलाल गिरी जी महाराज की रहस्यमयी तपस्या सोशल मीडिया पर चर्चा का बड़ा विषय बनी हुई है और लोग इसे श्रद्धा, जिज्ञासा तथा स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं के अलग-अलग नजरियों से देख रहे हैं।

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