ऑटो-रिक्शा भारत की सड़कों पर सबसे आम और आसानी से पहचाने जाने वाले वाहनों में से एक हैं। ज्यादातर ऑटो-रिक्शा अपने पीले और हरे रंग की वजह से आसानी से पहचाने जाते हैं। लेकिन क्या आपने कभी ये सोचा है कि ज्यादातर ऑटो इसी रंग में क्यों होते हैं? बहुत कम लोग जानते हैं कि इन रंगों का चुनाव कुछ खास वजहों को ध्यान में रखकर किया गया था। यही कारण है कि देश के अधिकांश शहरों में ऑटो-रिक्शा इसी पीले और हरे रंग में दिखाई देते हैं। आइए जानते हैं ऑटो-रिक्शा के इन खास रंगों के पीछे की दिलचस्प कहानी।
जानें इसके पीछे का उद्देश्य
ऑटो-रिक्शा का पीला और हरा रंग केवल उन्हें आकर्षक बनाने के लिए नहीं चुना गया है। परिवहन विभाग ने इन वाहनों की आसानी से पहचान हो सके, इसके लिए खास रंगों का इस्तेमाल शुरू किया था। इसके अलावा, इन रंगों का संबंध पर्यावरण संरक्षण से भी जुड़ा है। कई राज्यों में साफ और कम प्रदूषण फैलाने वाले ईंधन को बढ़ावा देने के लिए ऑटो-रिक्शा के लिए इस रंग संयोजन को अपनाया गया, ताकि लोगों को पर्यावरण के प्रति जागरूक किया जा सके।
क्या है कलर के पीछे का मतलब
ऑटो-रिक्शा में इस्तेमाल किया जाने वाला हरा रंग आमतौर पर पर्यावरण के अनुकूल वाहनों की पहचान माना जाता है। ये इस बात का संकेत देता है कि वाहन सीएनजी, एलपीजी या बिजली जैसे अपेक्षाकृत साफ ईंधन पर चल रहा है। वहीं ऊपर की पीली छत का भी एक खास उद्देश्य है। इसका चमकीला रंग दूर से आसानी से दिखाई देता है, जिससे व्यस्त सड़कों और भारी ट्रैफिक के बीच ऑटो को पहचानना यात्रियों, पैदल चलने वालों और अन्य वाहन चालकों के लिए आसान हो जाता है।
समय के साथ अलग-अलग शहरों ने अपनी जरूरत के हिसाब से अलग नियम बनाए। कुछ शहरों में पुराने रंगों वाले ऑटो चलते रहे, जबकि कई जगहों पर सीएनजी और दूसरे साफ ईंधन को बढ़ावा देने के लिए पीले-हरे रंग के ऑटो अपनाए गए। आज भी भारत में कई तरह के ऑटो दिखाई देते हैं, लेकिन पीले और हरे रंग वाला ऑटो सबसे ज्यादा पहचान रखने वाला माना जाता है। यह रंग सुरक्षा, आसान पहचान और पर्यावरण को बचाने की सोच का प्रतीक बन चुका है।