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आखिर आम का नाम ‘लंगड़ा’ कैसे पड़ा? जानिए बनारस के मशहूर आम की कहानी

हम बात कर रहे हैं बनारस के मशहूर लंगड़ा आम की, जिसका नाम सुनते ही लोगों के मन में सवाल उठता है कि आखिर बिना पैरों वाले आम को ‘लंगड़ा’ क्यों कहा जाता है। इसके पीछे छुपी सदियों पुरानी कहानी आज भी लोगों को आकर्षित करती है। स्वाद, खुशबू और अनोखी पहचान इसे बाकी आमों से बिल्कुल अलग बनाती है

Edited By: Anchal Jhaअपडेटेड May 10, 2026 पर 11:50 AM
आखिर आम का नाम ‘लंगड़ा’ कैसे पड़ा? जानिए बनारस के मशहूर आम की कहानी
लंगड़ा आम का असली स्वाद बनारस की मिट्टी और वहां की जलवायु से जुड़ा माना जाता है।

गर्मी शुरू होते ही फलों के बाजार में आम की खुशबू हर तरफ फैलने लगती है। कोई दशहरी का दीवाना होता है, तो किसी को चौसा और अल्फांसो पसंद आता है। लेकिन इन सबके बीच एक ऐसा आम भी है, जिसका नाम सुनते ही लोग ठिठक जाते हैं। यह है बनारस का मशहूर ‘लंगड़ा आम’। नाम थोड़ा अजीब जरूर लगता है, क्योंकि आम का पैर तो होता नहीं, फिर इसे लंगड़ा क्यों कहा जाता है?

दरअसल, इस आम की पहचान सिर्फ उसके स्वाद से नहीं, बल्कि उससे जुड़ी एक दिलचस्प कहानी से भी है। सदियों पुरानी यह कहानी आज भी लोगों की जुबान पर जिंदा है। यही वजह है कि लंगड़ा आम सिर्फ एक फल नहीं, बल्कि बनारस की खास विरासत माना जाता है, जिसकी मिठास और रहस्य दोनों लोगों को अपनी ओर खींचते हैं।

एक साधु से जुड़ी है इस आम की पहचान

कहते हैं कि बनारस के एक मंदिर में रहने वाले एक दिव्यांग साधु ने आम के कुछ पौधे लगाए थे। समय के साथ जब उन पेड़ों पर फल आए, तो उनका स्वाद लोगों को इतना पसंद आया कि पूरे इलाके में उनकी चर्चा होने लगी।

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