देश के कई इलाकों में बारिश शुरू होने से गर्मी से राहत मिली है। बारिश के साथ मच्छरों की संख्या भी तेजी से बढ़ने लगती है। बरसात के मौसम में जगह-जगह पानी जमा होने से मच्छरों को पनपने का अनुकूल माहौल मिल जाता है, जिससे डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया जैसी बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है। इसलिए इस मौसम में मच्छरों से बचाव करना बेहद जरूरी है। ऐसे में ये जानना जरूरी है कि बारिश के बाद मच्छर अचानक इतने ज्यादा क्यों बढ़ जाते हैं और उनसे बचाव के लिए क्या सावधानियां अपनानी चाहिए।
घर में पानी ना जमा होने दें
बारिश के बाद बाल्टी, कूलर, गमले, पुराने टायर, नालियों और गड्ढों में पानी जमा हो जाता है। यही रुका हुआ पानी मच्छरों के पनपने की सबसे बड़ी वजह बनता है। मादा मच्छर इसमें अंडे देती हैं, जो कुछ ही दिनों में लार्वा बन जाते हैं और करीब एक सप्ताह के भीतर बड़े मच्छरों में बदल जाते हैं। यही वजह है कि तेज बारिश के कुछ दिन बाद मच्छरों की संख्या अचानक बढ़ जाती है। बारिश का जमा पानी उनके लिए पनपने की सही जगह बन जाता है। इसके अलावा, बारिश के बाद हवा में नमी बढ़ने से मच्छरों को लंबे समय तक जीवित रहने और ज्यादा एक्टिव रहने के लिए अनुकूल माहौल मिल जाता है।
बारिश में मच्छरों का खतरा बढ़ जाता है
बारिश रुकने के बाद मच्छर आमतौर पर झाड़ियों, पौधों के नीचे, दीवारों के किनारे और घर के बरामदे जैसी ठंडी व नम जगहों पर छिपे रहते हैं। ये स्थान उन्हें धूप से बचाते हैं। सुबह और शाम के समय मच्छर सबसे ज्यादा एक्टिव होते हैं, इसलिए बारिश के बाद इन घंटों में उनके काटने का खतरा भी काफी बढ़ जाता है। दिलचस्प बात ये है कि बारिश मच्छरों को आसानी से नुकसान नहीं पहुंचाती। बारिश की बूंदें उनसे कई गुना बड़ी और भारी होती हैं, फिर भी मच्छर अपनी हल्की बनावट और मजबूत बाहरी परत की वजह से इनसे बच जाते हैं। कई बार बारिश की बूंद उन्हें कुचलने के बजाय अपने साथ बहा ले जाती है, जिससे वे फिर भी जीवित रह सकते हैं।
बारिश के मौसम में मच्छरों की संख्या बढ़ने से डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया जैसी बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि इन बीमारियों से बचने के लिए सबसे जरूरी है कि घर और आसपास कहीं भी पानी जमा न होने दिया जाए, क्योंकि यही मच्छरों के पनपने की सबसे बड़ी वजह होती है।