भारत में सरकारी दफ्तरों में हर विभाग में नौकरशाही का एक अलग ही महत्व है। ये अफसर न केवल देश के प्रशासनिक कामकाज को सही ढ़ंग से चलता हैं, बल्कि जनता और सरकार के बीच पुल का काम भी निभाते हैं। इनके कार्यालयों और उनके रैंक के अनुसार उन्हें कई तरह की सुविधाएं मिलती हैं, जैसे विशेष बैठने की व्यवस्था, ऑफिस उपकरण और अन्य सुविधाएं। लेकिन इनमें से एक चीज जो लगभग सभी अधिकारियों की कुर्सियों पर समान रूप से देखी जाती है, वो है सफेद तौलिया। ये सिर्फ एक साधारण कपड़ा नहीं है, बल्कि इसके पीछे कई कारण और परंपराएं जुड़ी हुई हैं।
कुछ लोग इसे पद और रैंक का प्रतीक मानते हैं, तो कुछ इसे सफाई और शुद्धता का संकेत समझते हैं। ब्रिटिशकाल से चली आ रही ये परंपरा आज भी सरकारी दफ्तरों में कायम है और अफसरों की कुर्सियों पर इसे रखना एक तरह की पहचान और अनुशासन का प्रतीक बन गया है।
कुछ समय पहले ये विषय ट्विटर पर चर्चा में आया। लोग जिज्ञासु थे कि आखिर अफसरों की कुर्सियों पर सफेद तौलिया क्यों रखा जाता है। फरवरी में भी ये सवाल लोगों के बीच मजाक और बहस का कारण बना। सोशल मीडिया पर कई लोग अपनी राय दे रहे थे, लेकिन कोई निश्चित जवाब नहीं था।
आईआरटीएस संजय कुमार के अनुसार, यह तौलिया कुर्सी को बड़े अधिकारी की पहचान देने का आसान तरीका है। कई लोगों ने इसे पद का प्रतीक बताया, तो कुछ ने इसे सफाई और शुद्धता का संकेत माना।
आईआरएस विकास प्रकाश सिंह के मुताबिक, इस परंपरा की शुरुआत ब्रिटिशकाल में हुई थी। उस समय पतली कुशन वाली कुर्सियों के कारण सर्दियों में ठंड से बचाने और गर्मियों में पसीना सोखने के लिए तौलिया लगाया जाता था। धीरे-धीरे ये रिवाज दफ्तरों में स्थायी बन गया और आज भी अफसरों की कुर्सियों पर सफेद तौलिया देखा जाता है।