अच्छी सैलरी वाली नौकरी छोड़ने के लिए कोई व्यक्ति कितना बड़ा फैसला ले सकता है? खर्चे कैसे चलेंगे? रोजमर्रा के खर्चों के लिए भी सोचना पड़ेगा। किराया कैसे देंगे? पेरेंट्स से पैसे लेने पड़े तो? बस यही वो सारी दिक्कतें हैं, जो टॉक्सिक जॉब छोड़ने की ही नहीं हिम्मत जुटाने देती हैं। लेकिन एक महिला ने अलग रास्ता चुना। उसने तय किया कि डेली लाइफ की जरुरतों से ज्यादा जरूरी आर्थिक स्वतंत्रता है। अपने इस टारगेट को हासिल करने के लिए उसने कई जरुरतों पर लगाम लगाया और करीब 18 महीनों तक लगातार मेहनत करके यह साबित कर दिया कि सही प्लानिंग और डिसिप्लिन के साथ आर्थिक आजादी हासिल की जा सकती है।
