नई नौकरी की तलाश के दौरान उम्मीदवारों को कई तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। हाल ही में नई नौकरी की तलाश कर रही एक उम्मीदवार ने इंटरव्यू से जुड़ा अपना अनुभव सोशल मीडिया पर शेयर किया। सोशल मीडिया पर ये पोस्ट तेजी से वायरल हो रहा है। उन्होंने बताया कि, इंटरव्यू के दौरान सब कुछ ठीक चल रहा था और उन्हें लगा कि जल्द ही नौकरी मिल जाएगी। लेकिन बाद में काफी इंतजार और कई बार संपर्क करने के बावजूद कंपनी की ओर से कोई जवाब नहीं आया। LinkedIn पर शेयर किया गया ये पोस्ट सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।
सोशल मीडिया पर ये एक्सपीरिएंश श्रुति राय ने LinkedIn पर शेयर किया, जहां उन्होंने इसे “अब तक का सबसे बुरा अनुभव” बताया।
सोशल मीडिया पर किया पोस्ट
श्रुति राय ने पोस्ट में कहा, “अब तक का सबसे बुरा अनुभव। मैंने हाल ही में एक एजेंसी में इंटरव्यू दिया, जहां मैं पहले काम कर चुकी थी। इंटरव्यू शुरू होने से पहले ही मैंने अपनी सैलरी की उम्मीदें साफ तौर पर बता दी थीं। मैंने उनसे ये भी कहा था कि अगर मेरी अपेक्षाएं उनके बजट में फिट नहीं बैठतीं, तो मैं किसी का समय बर्बाद नहीं करना चाहूँगी। इसके बावजूद उन्होंने इंटरव्यू की प्रक्रिया जारी रखने पर जोर दिया।”
क्या यहीं है हायरिंग का सही तरीका
उन्होंने कहा, “इंटरव्यू खुद अजीब लगा। मेरे अनुभव, मेरे काम या मेरे द्वारा लीड किए गए कैंपेन को समझने की कोशिश करने के बजाय, ऐसा लगा कि इंटरव्यू लेने वाला किसी सार्थक बातचीत के बजाय अपनी बात साबित करने में ज्यादा दिलचस्पी रखता था। मेरे हर जवाब पर एक नया सवाल खड़ा कर दिया जाता था, मानो उम्मीदवार को असहज करना ही मकसद हो। अगर यही हायरिंग का तरीका है, तो मुझे सच में लगता है कि ये अब पुराना हो चुका है। इंटरव्यू का उद्देश्य किसी की काबिलियत को परखना होना चाहिए, न कि बेवजह पावर डायनामिक बनाना।”
मुझे रिजेक्ट होने से कोई परेशानी नहीं
राय ने बताया कि उन्हें पूरा भरोसा था कि जल्द ही नौकरी का ऑफर मिल जाएगा। इसी वजह से उन्होंने एक दूसरे नौकरी के अवसर को फिलहाल आगे नहीं बढ़ाया। लेकिन जब उन्होंने तय समय के बाद कंपनी से संपर्क किया, तो उनकी ओर से कोई जवाब नहीं मिला। उन्होंने कहा, “मुझे रिजेक्ट होने से कोई परेशानी नहीं है, अगर फैसला यही है तो। कंपनियों को किसी दूसरे उम्मीदवार को चुनने का पूरा अधिकार है। लेकिन परेशानी इस बात से है कि उम्मीदवार से समय देने की उम्मीद की जाती है, जबकि उसके समय की कोई कद्र नहीं की जाती।
उन्होंने आगे लिखा, "अगर आप आगे नहीं बढ़ना चाहते, तो साफ बता दीजिए। अगर आपके प्लान बदल गए हैं, तो इसकी जानकारी दे दीजिए। उम्मीदवार भी इंसान होते हैं, कोई ऐसी जगह नहीं जहां आप बिना कुछ बताए चीजें लंबित छोड़ दें।"
उन्होंने आगे लिखा, "मुझे सच में उम्मीद है कि कंपनियां समझेंगी कि उनकी हायरिंग प्रक्रिया भी उनके कार्य संस्कृति को उतना ही दिखाती है, जितना किसी उम्मीदवार का इंटरव्यू उसकी काबिलियत को दिखाता है। P.S. इस वजह से मैंने एक और अच्छा मौका खो दिया, और यही बात मुझे सबसे ज्यादा परेशान करती है।”
एक यूजर ने लिखा, "मैं पूरी तरह सहमत हूं। यही सबसे ज्यादा परेशान करने वाली बात होती है। मुझे समझ नहीं आता कि इतने सारे उम्मीदवारों को जानबूझकर तनाव और बेचैनी में रखने के बाद लोग चैन से कैसे रह लेते हैं।" एक अन्य यूजर ने कमेंट किया, "आपने बिल्कुल सही कहा। मेरे साथ भी ऐसा ही हुआ है। उन लोगों ने मुझसे काफी बातचीत की, लेकिन आखिर में बिना किसी जवाब के गायब हो गए।" एक और यूजर ने कहा, "यह वाकई मुश्किल होता है। मेरे साथ भी ऐसा हो चुका है। एक बार तो मुझसे मेरी खुद की जॉब डिस्क्रिप्शन तक लिखवाई गई और उसके बाद मुझे कोई जवाब नहीं मिला। फिर भी आगे बढ़ना ही पड़ता है। आप यह कर सकते हैं।"