सोशल मीडिया पर ट्रेन में सीट को लेकर किया गया पोस्ट काफी वायरल हो रहा है। पोस्ट में बताया गया कि एक युवा यात्री ने अपनी साइड लोअर बर्थ एक बुजुर्ग दंपति को देने से मना कर दिया। युवक ने सीट के लिए करीब 2,100 रुपये खर्च किए थे और सीट बदलने के लिए उसने बुजुर्ग दंपति से पैसे भी मांगे। वहीं इस पोस्ट पर लोग तरह-तरह के रिएक्शन दे रहे हैं। इस मामले को लेकर सोशल मीडिया पर लोगों की राय बंटी हुई है और इसे लेकर बहस जारी है। सोशल मीडिया पर ये पोस्ट तेजी से वायरल हो रहा है।
सीट चेंज करने से किया मना
इस मामले को एक्स यूजर ने सोशल मीडिया पर शेयर किया। उन्होंने बताया कि, वह 3AC कोच में सफर कर रही थीं और उनकी सीट ऊपर वाली बर्थ पर थी। वहीं सामने बैठे एक युवक की सीट साइड लोअर थी। पोस्ट के अनुसार, एक बुजुर्ग दंपति ने युवक से उसकी साइड लोअर सीट देने की मांग की। उन्होंने कहा कि युवक उम्र में छोटा है, इसलिए वह ऊपर वाली बर्थ पर आसानी से सो सकता है और उन्हें नीचे वाली सीट की जरूरत ज्यादा है। युवक ने बुजुर्ग दंपति की बात तुरंत नहीं मानी।
युवक ने बताया कि उसने साइड लोअर बर्थ के लिए करीब 2,100 रुपये का टिकट खरीदा। इसके बाद बातचीत तब अलग मोड़ ले गई, जब युवक ने कहा कि अगर दंपति उसे टिकट की कीमत का आधा यानी 1,050 रुपये दे दें, तो वह अपनी बर्थ उन्हें दे सकता है। उसकी इस बात पर मामला और चर्चा में आ गया। एक्स यूजर के अनुसार, पैसे देने की बात सामने आने के बाद बुजुर्ग दंपति ने अपनी मांग छोड़ दी और युवक अपनी साइड लोअर बर्थ पर बैठा रहा। ऊपर वाली बर्थ से पूरा मामला देखने वाले यात्री ने इस घटना को काफी अलग अनुभव बताया।
पोस्ट में बताया कि, लंबी ट्रेन यात्रा में साइड लोअर बर्थ को यात्री काफी पसंद करते हैं, इसलिए कई लोग इसे आसानी से छोड़ना नहीं चाहते। इस घटना के बाद सोशल मीडिया पर भी सीट को लेकर यात्रियों की पसंद और बुजुर्गों को प्राथमिकता देने के मुद्दे पर चर्चा शुरू हो गई। पोस्ट में पूछा गया कि क्या किसी यात्री को दूसरे की सुविधा के लिए अपनी रिजर्व बर्थ छोड़ देनी चाहिए। यूजर ने लोगों से पूछा कि वे बुजुर्ग दंपति को अपनी साइड लोअर बर्थ देंगे या इसके बदले पैसे लेने की मांग करेंगे। इस पर लोगों की अलग-अलग राय सामने आई।
ये पोस्ट सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गई। इसके बाद कई लोगों ने रेलवे के रिजर्वेशन नियमों और सफर के दौरान बुजुर्ग यात्रियों को होने वाली परेशानियों को लेकर अपनी राय साझा की। लोगों ने इस मामले पर अपने अनुभव भी बताए और बताया कि ऐसी स्थिति में यात्री और सीनियर सिटीजन दोनों के लिए क्या सही होना चाहिए।
एक अन्य यूजर ने सवाल उठाया कि, 'सीनियर सिटिजन्स को हमेशा लोअर बर्थ क्यों नहीं दी जाती, जबकि टिकट बुक करते समय उनकी उम्र की जानकारी पहले ही दर्ज की जाती है।' एक यूजर ने कहा कि, 'उसके माता-पिता और परिवार के अन्य बुजुर्ग सदस्य ऊपर की बर्थ पर नहीं चढ़ सकते, फिर भी उन्हें कई बार अपर बर्थ दे दी जाती है।' यूजर ने सवाल किया कि जब बुकिंग के समय उम्र की जानकारी साफ तौर पर दी जाती है, तो इसके बावजूद बुजुर्गों को लोअर बर्थ न मिलने की जिम्मेदारी आखिर किसकी है।
दूसरे यूजर ने कहा कि, 'हो सकता है युवक ने लेट बुकिंग या तत्काल टिकट के लिए ज्यादा पैसे दिए हों।' उसके मुताबिक, 'टिकट की कीमत यात्रा के लिए होती है, सिर्फ सीट के लिए नहीं। अगर बुजुर्ग दंपति को लोअर बर्थ की सच में जरूरत थी, तो युवक का पैसे लेने का फैसला उसकी अपनी मर्जी थी।'