सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (Twitter) पर एक पोस्ट ने इंटरनेट पर बड़ा हंगामा खड़ा कर दिया है। इस पोस्ट में दावा किया गया है कि Zomato की डिलीवरी व्यवस्था में एक ऐसा “लूपहोल” मौजूद है, जिसका फायदा उठाकर ग्राहक प्लेटफॉर्म फीस और रेस्टोरेंट कमीशन से बच सकते हैं। जैसे ही यह दावा सामने आया, सोशल मीडिया पर यूजर्स के बीच बहस तेज हो गई और लोग इसे लेकर अलग-अलग राय देने लगे। कोई इसे सिर्फ एक अफवाह बता रहा है, तो कोई इसे सिस्टम की संभावित कमजोरी मानकर चिंता जता रहा है।
इस वायरल पोस्ट ने फूड डिलीवरी बिजनेस के पूरे मॉडल पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं। खास बात यह है कि यह मामला तेजी से वायरल होकर हजारों-लाखों लोगों तक पहुंच चुका है, जिससे इसकी चर्चा और भी बढ़ गई है।
कैसे बताया गया पूरा “जुगाड़”?
यह दावा यूजर Prem Soni ने किया है। उनके अनुसार, एक ग्राहक Zomato पर सिर्फ एक छोटा ऑर्डर (जैसे ₹40 की एक रोटी) करता है, जबकि असली बड़ा ऑर्डर सीधे रेस्टोरेंट को फोन या WhatsApp पर दे देता है।
फिर रेस्टोरेंट दोनों ऑर्डर एक साथ पैक कर देता है और डिलीवरी बॉय सिर्फ ऐप वाला छोटा ऑर्डर डिलीवर करता है। इस तरह बड़ा ऑर्डर प्लेटफॉर्म से बाहर चला जाता है।
ग्राहकों और रेस्टोरेंट को क्या फायदा?
इस कथित तरीके से दोनों पक्षों को फायदा मिलने का दावा किया गया है।
ग्राहक को अतिरिक्त चार्ज, डिलीवरी फीस और प्लेटफॉर्म टैक्स से राहत मिलती है।
वहीं रेस्टोरेंट को Zomato के 25–30% कमीशन से बचने का मौका मिल जाता है।
यूजर का कहना है कि अगर ऐसा बढ़ा, तो प्लेटफॉर्म सिर्फ डिलीवरी सर्विस बनकर रह जाएगा और उसकी कमाई पर असर पड़ेगा।
“अगर फैला तो सिस्टम पर असर”
पोस्ट में यह भी दावा किया गया है कि अगर यह तरीका ज्यादा फैल गया, तो फूड डिलीवरी कंपनियों का पूरा बिज़नेस मॉडल कमजोर हो सकता है। कंपनी को डिलीवरी का खर्च उठाना पड़ेगा लेकिन कमाई बहुत कम होगी।
सोशल मीडिया पर दो राय, छिड़ी बहस
इस वायरल पोस्ट के बाद X पर यूजर्स दो हिस्सों में बंट गए हैं। कुछ लोग इसे अव्यवहारिक और मुश्किल मान रहे हैं, जबकि कुछ इसे एक संभावित कमजोरी बता रहे हैं।
कई यूजर्स का कहना है कि इस तरह की गतिविधियों पर रोक लगाने के लिए इनवॉइस मिलान और डिलीवरी वेरिफिकेशन जैसे सिस्टम मजबूत करने चाहिए।
पहले भी सामने आ चुके हैं ऐसे मामले
यह पहली बार नहीं है जब Zomato को लेकर इस तरह के दावे सामने आए हों। साल 2023 में भी कैश ऑन डिलीवरी (COD) सिस्टम को लेकर एक मामला वायरल हुआ था।
उसमें आरोप था कि कुछ डिलीवरी एजेंट ग्राहकों को कम पैसे देकर ऑर्डर “अनडिलीवर्ड” दिखा देते थे और बाद में वही खाना सीधे बेच देते थे।
इस पूरे मामले पर अभी तक Zomato की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। लेकिन सोशल मीडिया पर यह चर्चा लगातार तेज होती जा रही है और लोग इसके असर को लेकर सवाल उठा रहे हैं।