असीम मुनीर की अमेरिका के साथ सीक्रेट डील! पाक सेना खरीदेगी घातक ड्रोन, जानिए इस डील में क्या-क्या छिपा है
Pakistan News: अमेरिका की ड्रोन बनाने वाली कंपनी POWERUS और पाकिस्तान सेना के बीच हुए नए रक्षा समझौते ने पाकिस्तानी फील्ड मार्शल असीम मुनीर की सैन्य खरीद रणनीति पर सवाल खड़े कर दिए हैं। खासकर इस बात पर चर्चा शुरू हो गई है कि भविष्य में पाकिस्तान की पश्चिमी सीमा पर इन बिना पायलट वाले सिस्टम का इस्तेमाल कैसे किया जा सकता है
Pakistan News: अमेरिका और पाकिस्तान के बीच होने वाले डिफेंस डील ने चिंताएं बढ़ा दी हैं
Pakistan News: अमेरिकी ड्रोन निर्माता कंपनी POWERUS और पाकिस्तान आर्मी के बीच हुए एक नए रक्षा समझौते ने पाकिस्तानी फील्ड मार्शल असीम मुनीर की सैन्य खरीद रणनीति को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। खासतौर पर इस बात पर चर्चा शुरु हो गई है कि भविष्य में इन बिना पायलट वाले सिस्टम (Unmanned Systems) का इस्तेमाल पाकिस्तान की पश्चिमी सीमा पर किस तरह किया जा सकता है। बुधवार 16 सितंबर को POWERUS के सह-संस्थापक रॉबर्ट ब्रेट वेलिकोविच के नेतृत्व में कंपनी के प्रतिनिधिमंडल ने रावलपिंडी स्थित जनरल हेडक्वार्टर (GHQ) में पाकिस्तान के चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ और चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज फील्ड मार्शल असीम मुनीर से मुलाकात की।
पाकिस्तानी सेना के मुताबिक, बैठक में उभरती रक्षा तकनीक, सैन्य खरीद, उत्पादन और लंबी अवधि में क्षमता निर्माण जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई। हालांकि, इसी बीच न्यूज एजेंसी Reuters की एक रिपोर्ट ने इस मुलाकात को और महत्वपूर्ण बना दिया है। रिपोर्ट के अनुसार, POWERUS ने पाकिस्तान आर्मी के साथ एक समझौता ज्ञापन (MoU) किया है। इसमें अनमैन्ड एरियल सिस्टम (UAS) से जुड़ा एक शुरुआती ऑर्डर भी शामिल है। हालांकि, इस ऑर्डर की कीमत और सिस्टम की पूरी जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है।
क्या है POWERUS की सीक्रेट डील?
Reuters के मुताबिक, POWERUS के सह-संस्थापक ब्रेट वेलिकोविच ने पाकिस्तान आर्मी असीम मुनीर के साथ MoU और शुरुआती ऑर्डर की पुष्टि की है। हालांकि, उन्होंने ऑर्डर की कीमत या इसमें शामिल ड्रोन सिस्टम के बारे में जानकारी देने से इनकार किया। इसकी वजह सुरक्षा संबंधी संवेदनशीलता और गोपनीयता बताई गई।
दिलचस्प बात यह है कि पाकिस्तान सेना की ओर से GHQ बैठक के बाद जारी आधिकारिक बयान में इस MoU या शुरुआती ऑर्डर का उल्लेख नहीं किया गया। सेना ने केवल इतना कहा कि दोनों पक्षों ने रक्षा खरीद, उत्पादन और क्षमता निर्माण पर चर्चा की। असीम मुनीर ने बैठक में टेक्नोलॉजी इनोवेशन और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एडवांस टेक्नोलॉजी के महत्व पर जोर दिया।
क्या ईरान सीमा पर हो सकता है इस्तेमाल?
इस डील के बाद पाकिस्तान की ईरान से लगी सीमा को लेकर भी अटकलें सामने आई हैं। पाकिस्तान और ईरान के बीच करीब 909 किलोमीटर लंबी सीमा है। इसका बड़ा हिस्सा पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत से गुजरता है। यह इलाका सीमा पार आतंकवाद, तस्करी नेटवर्क और सुरक्षा चुनौतियों के कारण रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है। ऐसे में हाइटेक ड्रोन या काउंटर-ड्रोन सिस्टम पाकिस्तान को निगरानी और सीमा पर स्थिति की जानकारी जुटाने में मदद कर सकते हैं।
CNN-News18 के अनुसार, खुफिया सूत्रों ने संभावना जताई है कि POWERUS की टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल भविष्य में ईरान सीमा के आसपास गतिविधियों की निगरानी के लिए किया जा सकता है। हालांकि, यह अभी यह सिर्फ दावा किया जा रहा है। पाकिस्तान सेना या POWERUS ने सार्वजनिक रूप से यह नहीं कहा है कि इस समझौते के तहत मिलने वाली तकनीक को ईरान सीमा या बलूचिस्तान में तैनात किया जाएगा। GHQ की आधिकारिक बैठक के विवरण में भी ईरान, बलूचिस्तान या पश्चिमी सीमा की निगरानी का कोई उल्लेख नहीं है। इसलिए POWERUS समझौते को सीधे ईरान की निगरानी की रणनीति से जोड़ना फिलहाल सार्वजनिक रूप से उपलब्ध तथ्यों से आगे की बात होगी।
POWERUS की $22.3 मिलियन वाली मिडिल ईस्ट डील क्या है?
पाकिस्तान के साथ समझौते से पहले POWERUS ने करीब 22.3 मिलियन डॉलर के एक अन्य डिफेंस डील की घोषणा की थी। इसके तहत कंपनी को मध्य पूर्व में महत्वपूर्ण तेल और गैस इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए नेटवर्क आधारित काउंटर-यूएएस (Counter-UAS) क्षमता उपलब्ध करानी है।
यह सिस्टम ड्रोन खतरों को डिटेक्ट, ट्रैक और क्लासिफाई करने के साथ-साथ कमांड-एंड-कंट्रोल सिस्टम के जरिए शुरुआती चेतावनी देने के लिए बनाया गया है। कंपनी ने यह भी संकेत दिया है कि भविष्य में इसमें इंटरसेप्टर तकनीक को जोड़ा जा सकता है। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि इस 22.3 मिलियन डॉलर के मध्य-पूर्वी अनुबंध की तकनीक पाकिस्तान को दी जाएगी या नहीं।
अमेरिका-पाकिस्तान डिफेंस डील और चीन फैक्टर
POWERUS के साथ यह डील अमेरिका और पाकिस्तान के बीच रक्षा तकनीकी सहयोग के लिए एक नया रास्ता खोल सकता है। Reuters के अनुसार, कंपनी अमेरिका और पाकिस्तान के बीच संयुक्त ड्रोन तकनीक विकसित करने और पाकिस्तान में संभावित निर्माण की संभावनाएं भी तलाश रही है।
POWERUS के संस्थापक और CEO एंड्रयू फॉक्स ने पाकिस्तान के निजी रक्षा क्षेत्र को उभरता हुआ बताया है, हालांकि उनके मुताबिक यह क्षेत्र अभी पूरी तरह परिपक्व नहीं हुआ है। वेलिकोविच ने कहा कि कंपनी का लक्ष्य ऐसा संयुक्त तकनीकी संबंध विकसित करना है जिसमें अमेरिकी और पाकिस्तानी क्षमताओं को साथ लाया जा सके।
यह घटनाक्रम इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि पाकिस्तान की सैन्य आपूर्ति में चीन की बड़ी भूमिका है। अमेरिकी रक्षा कंपनियों के साथ बढ़ता सहयोग पाकिस्तान को तकनीक के एक अतिरिक्त स्रोत तक पहुंच दे सकता है। साथ ही, संवेदनशील रक्षा तकनीक की खरीद में पारदर्शिता, संचालन संबंधी नियंत्रण और उससे जुड़ी शर्तों को लेकर भी सवाल उठ सकते हैं।
ट्रंप परिवार से जुड़ा नया कनेक्शन?
POWERUS के कॉरपोरेट ढांचे में भी जल्द बदलाव होने की उम्मीद है। कंपनी का Aureus Greenway Holdings के साथ विलय प्रस्तावित है। यह एक सार्वजनिक रूप से कारोबार करने वाली कंपनी है, जिसे एक ऐसे निवेश फंड का समर्थन प्राप्त है। इसका संबंध डोनाल्ड ट्रंप जूनियर और एरिक ट्रंप से जुड़ा बताया गया है। Reuters के अनुसार, दोनों कंपनियों को उम्मीद है कि यह विलय अक्टूबर की शुरुआत में पूरा हो जाएगा।
अब तक क्या पता है और क्या छिपा है?
POWERUS और पाकिस्तान आर्मी के बीच हुए समझौते से फिलहाल तीन बातें सामने आती हैं। पहली, दोनों पक्षों ने एक MoU पर हस्ताक्षर किए हैं। दूसरी, पाकिस्तान आर्मी ने अनमॅन्ड एरियल सिस्टिम्स से जुड़ा एक शुरुआती लेकिन अघोषित मूल्य वाला ऑर्डर दिया है। और तीसरी, दोनों पक्ष रक्षा खरीद, उत्पादन और क्षमता निर्माण में व्यापक सहयोग की संभावनाएं तलाश रहे हैं।
समझौते का उद्देश्य क्या है?
ईरान सीमा और बलूचिस्तान में संभावित इस्तेमाल की चर्चा इसलिए सामने आई है क्योंकि POWERUS काउंटर-ड्रोन तकनीक विकसित करती है। पाकिस्तान की पश्चिमी सीमा सुरक्षा के लिहाज से संवेदनशील क्षेत्र है। लेकिन अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं है कि POWERUS समझौते का उद्देश्य ईरान सीमा की निगरानी है।
फिलहाल असीम मुनीर के नेतृत्व वाली पाकिस्तान आर्मी और POWERUS के बीच सहयोग का वास्तविक दायरा सार्वजनिक रूप से सीमित जानकारी तक ही सामने आया है। शुरुआती ड्रोन ऑर्डर की कीमत, सिस्टम की प्रकृति और संभावित ऑपरेशनल इस्तेमाल को लेकर जानकारी अभी गोपनीय रखी गई है।